छत्तीसगढ़ में सीसीटीएनएस होगा और मजबूत, न्याय प्रक्रिया को डिजिटल व त्वरित बनाने पर जोर

छत्तीसगढ़ में नवीन भारतीय न्याय संहिता के प्रभावी क्रियान्वयन और न्याय प्रक्रिया को तकनीक आधारित बनाने के लिए उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा और स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने सीसीटीएनएस की उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक की। बैठक में ई-एफआईआर, ई-साक्ष्य, मेडलीपार, ई-फोरेंसिक और अन्य डिजिटल प्रणालियों को मजबूत करने के निर्देश दिए गए।

Jul 22, 2026 - 11:12
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छत्तीसगढ़ में सीसीटीएनएस होगा और मजबूत, न्याय प्रक्रिया को डिजिटल व त्वरित बनाने पर जोर

UNITED NEWS OF ASIA. अमृतेश्वर सिंह, रायपुर l छत्तीसगढ़ में न्याय व्यवस्था को आधुनिक, पारदर्शी और तकनीक आधारित बनाने की दिशा में राज्य सरकार ने महत्वपूर्ण कदम उठाया है। उप मुख्यमंत्री एवं गृह मंत्री विजय शर्मा तथा स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने क्राइम एंड क्रिमिनल ट्रैकिंग नेटवर्क एंड सिस्टम (सीसीटीएनएस) की उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में न्यायिक और पुलिस व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने के लिए कई अहम निर्देश दिए। बैठक में नवीन भारतीय न्याय संहिता के प्रभावी क्रियान्वयन, डिजिटल मॉड्यूल के बेहतर एकीकरण और विभिन्न विभागों के बीच समन्वय बढ़ाने पर विशेष जोर दिया गया।

बैठक के दौरान विजय शर्मा ने कहा कि राज्य सरकार का उद्देश्य अपराधों की विवेचना, साक्ष्य संकलन, न्यायालयीन प्रक्रिया और विभिन्न विभागों के बीच समन्वय को पूरी तरह डिजिटल और समयबद्ध बनाना है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि सीसीटीएनएस के माध्यम से न्याय प्रक्रिया के प्रत्येक चरण को सरल, पारदर्शी और नागरिक हितैषी बनाया जाए ताकि लोगों को त्वरित न्याय मिल सके।

समीक्षा बैठक में ई-एफआईआर, ई-चालान, ई-साक्ष्य, मेडलीपार, ई-प्रिजन, ई-फोरेंसिक, सीआईएस और न्याय श्रुति जैसी डिजिटल प्रणालियों के प्रभावी संचालन पर विस्तार से चर्चा की गई। अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि इन सभी मॉड्यूलों को सीसीटीएनएस के साथ बेहतर तरीके से जोड़ा जाए, जिससे पुलिस, न्यायालय और अन्य विभागों के बीच सूचना का आदान-प्रदान तेज और अधिक प्रभावी हो सके।

डिजिटल साक्ष्यों के बढ़ते महत्व को देखते हुए सभी जिलों में ई-साक्ष्य प्रणाली के लिए विशेष प्रशिक्षण अभियान चलाने का निर्णय लिया गया। इसके तहत पुलिस अधिकारियों और संबंधित कर्मचारियों को डिजिटल साक्ष्यों के संग्रह, संरक्षण और न्यायालय में प्रस्तुत करने की प्रक्रिया का व्यापक प्रशिक्षण दिया जाएगा। सरकार का मानना है कि इससे जांच प्रक्रिया अधिक मजबूत और विश्वसनीय बनेगी।

बैठक में न्याय श्रुति प्रणाली को जल्द शुरू करने पर भी सहमति बनी। इसके लिए सभी न्यायाधीशों की आवश्यक आईडी तैयार कर प्रणाली को शीघ्र गो-लाइव करने के निर्देश दिए गए। इससे न्यायालयीन कार्यों में तकनीक का उपयोग बढ़ेगा और प्रक्रियाओं में पारदर्शिता आएगी।

नागरिकों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए दुर्ग, बिलासपुर और रायपुर कमिश्नरेट के सभी थानों में दो-दो ई-साइनिंग पैड उपलब्ध कराने का निर्णय लिया गया है। इसके अलावा राज्य के प्रत्येक जिले के दो थानों में भी यह सुविधा शुरू की जाएगी। ई-साइनिंग पैड के माध्यम से शिकायतकर्ताओं के डिजिटल हस्ताक्षर की प्रक्रिया आसान होगी और दस्तावेजों का ऑनलाइन निष्पादन तेजी से हो सकेगा।

बैठक में इंटरऑपरेबल क्रिमिनल जस्टिस सिस्टम (आईसीजेएस) के पांचों प्रमुख स्तंभों—पुलिस, न्यायालय, जेल, फोरेंसिक और अभियोजन—को और अधिक मजबूत बनाने पर भी जोर दिया गया। अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि इन सभी विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित कर न्याय प्रक्रिया को समयबद्ध और प्रभावी बनाया जाए।

स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने मेडिकल जांच और रिपोर्टिंग प्रक्रिया को तेज करने के लिए स्वास्थ्य विभाग की ओर से हरसंभव सहयोग का भरोसा दिया। उन्होंने सभी जिला अस्पतालों को मेडलीपार प्रणाली से जोड़ने, प्रत्येक जिले में नोडल अधिकारी नियुक्त करने और प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करने के निर्देश दिए। लक्ष्य है कि अगले तीन से चार महीनों के भीतर यह पूरी प्रणाली पूरी तरह कार्यशील हो जाए।

बैठक में राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) और राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र (एनआईसी) के बीच समन्वय बढ़ाकर तकनीकी समस्याओं के शीघ्र समाधान पर भी चर्चा हुई। साथ ही सरकारी अस्पतालों के साथ-साथ निजी अस्पतालों को भी चरणबद्ध तरीके से सीसीटीएनएस से जोड़ने की योजना पर विचार किया गया, जिससे मेडिकल साक्ष्यों के आदान-प्रदान और जांच प्रक्रिया में और तेजी लाई जा सके।

विधि विज्ञान प्रयोगशाला (एफएसएल) की कार्यप्रणाली की समीक्षा करते हुए जांच की समय-सीमा कम करने, सभी प्रकार के मामलों के लिए मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) तैयार करने और फोरेंसिक विशेषज्ञों की भर्ती प्रक्रिया में तेजी लाने के निर्देश भी दिए गए। राज्य सरकार का उद्देश्य डिजिटल तकनीक के माध्यम से न्याय व्यवस्था को अधिक पारदर्शी, प्रभावी और नागरिकों के लिए सुलभ बनाना है। साथ ही लंबित मामलों को कम कर न्याय प्रक्रिया को समयबद्ध रूप से पूरा करने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।