केयर इकोनॉमी से विकसित छत्तीसगढ़ को मिलेगी नई दिशा, राज्य स्तरीय कार्यशाला में विशेषज्ञों ने साझा किए सुझाव
रायपुर में समाज कल्याण विभाग द्वारा आयोजित राज्य स्तरीय कार्यशाला में केयर इकोनॉमी को विकसित छत्तीसगढ़ की आधारभूत आवश्यकता बताया गया। कार्यशाला में विशेषज्ञों ने रोजगार सृजन, दिव्यांगजन, वरिष्ठ नागरिकों, महिलाओं और बच्चों के कल्याण से जुड़े विषयों पर चर्चा की तथा नशामुक्त समाज और सम्मानजनक देखभाल का संकल्प लिया।
UNITED NEWS OF ASIA. अमृतेश्वर सिंह, रायपुर l छत्तीसगढ़ में समावेशी विकास और सामाजिक सुरक्षा को मजबूत बनाने की दिशा में समाज कल्याण विभाग द्वारा "सुचारु एवं सशक्त केयर इकोनॉमी के निर्माण" विषय पर राज्य स्तरीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। रायपुर में आयोजित इस कार्यशाला में विभिन्न विभागों के अधिकारियों, विषय विशेषज्ञों, विकास सहयोगी संस्थाओं के प्रतिनिधियों तथा बड़ी संख्या में प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया। कार्यक्रम का उद्देश्य राज्य में ऐसी केयर इकोनॉमी विकसित करना था, जो वृद्धजनों, दिव्यांगजनों, महिलाओं, बच्चों और अन्य जरूरतमंद वर्गों को बेहतर देखभाल, सुरक्षा और सम्मान प्रदान करने के साथ-साथ रोजगार के नए अवसर भी सृजित कर सके।
कार्यशाला के उद्घाटन अवसर पर महिला एवं बाल विकास एवं समाज कल्याण मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने कहा कि केयर इकोनॉमी केवल सामाजिक कल्याण तक सीमित अवधारणा नहीं है, बल्कि विकसित भारत और विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण की आधारभूत आवश्यकता बन चुकी है। उन्होंने कहा कि बदलते सामाजिक परिवेश में वृद्धजनों, दिव्यांगजनों, महिलाओं और बच्चों के लिए सुरक्षित, सम्मानजनक और समावेशी व्यवस्था तैयार करना समय की सबसे बड़ी जरूरत है। यदि इस क्षेत्र में प्रभावी निवेश किया जाए तो इससे रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे, महिलाओं की कार्यभागीदारी बढ़ेगी और समाज अधिक संवेदनशील तथा जिम्मेदार बनेगा।
उन्होंने कहा कि विकसित भारत @2047 के राष्ट्रीय लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार सामाजिक सुरक्षा, दिव्यांगजन कल्याण, वृद्धजन सेवाओं, पुनर्वास, कौशल विकास तथा महिला एवं बाल विकास से जुड़ी योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन कर रही है। उन्होंने सभी विभागों से समन्वित प्रयास करते हुए केयर इकोनॉमी को मजबूत बनाने का आह्वान किया ताकि समाज के प्रत्येक वर्ग तक गुणवत्तापूर्ण सेवाएं पहुंचाई जा सकें।
कार्यक्रम के दौरान उपस्थित सभी प्रतिभागियों ने "नशा मुक्त भारत अभियान" के अंतर्गत नशामुक्त समाज के निर्माण का सामूहिक संकल्प लिया। इसके साथ ही वरिष्ठ नागरिकों के सम्मान, उनकी सुरक्षा, स्वास्थ्य और देखभाल सुनिश्चित करने की शपथ भी दिलाई गई। प्रतिभागियों ने समाज में सकारात्मक वातावरण निर्माण और वृद्धजनों के प्रति संवेदनशील व्यवहार अपनाने का संकल्प दोहराया।
कार्यशाला के तकनीकी सत्रों में देशभर के विशेषज्ञों ने केयर इकोनॉमी के विभिन्न आयामों पर अपने विचार साझा किए। डॉ. ए.सी. रेड्डी ने विकसित भारत के निर्माण में केयर इकोनॉमी की केंद्रीय भूमिका पर विस्तार से प्रकाश डाला। बसवराजु एस. ने इस क्षेत्र में रोजगार सृजन की संभावनाओं को रेखांकित करते हुए बताया कि भविष्य में केयर सेक्टर देश के सबसे बड़े रोजगार प्रदाता क्षेत्रों में शामिल हो सकता है।
डॉ. स्मित श्रीवास्तव ने वरिष्ठ नागरिकों के स्वास्थ्य, पोषण और देखभाल की आवश्यकता पर विस्तार से जानकारी दी। यूनिसेफ के विशेषज्ञों ने बाल संरक्षण और चाइल्ड केयर से जुड़े विषयों पर प्रस्तुति दी, जबकि हेल्पएज इंडिया के प्रतिनिधियों ने राज्य में वृद्धजन देखभाल की वर्तमान स्थिति, चुनौतियों और भविष्य की संभावनाओं पर अपने अनुभव साझा किए।
कार्यक्रम में राइट्स एंड इंक्लूजन इंडिया, टाटा ट्रस्ट्स, एसओएस चिल्ड्रेन्स विलेज, राज्य स्वास्थ्य संसाधन केंद्र, श्रम विभाग तथा अन्य संस्थाओं के विशेषज्ञों ने दिव्यांगजन पुनर्वास, मानसिक स्वास्थ्य, सामाजिक सुरक्षा, स्वयं सहायता समूहों की भूमिका, कौशल विकास, डिजिटल केयर मॉडल और सामुदायिक भागीदारी जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा की। विशेषज्ञों ने कहा कि केयर इकोनॉमी को मजबूत बनाने के लिए केवल सरकारी योजनाएं पर्याप्त नहीं हैं, बल्कि समुदाय, स्वयंसेवी संस्थाओं और निजी क्षेत्र की सक्रिय भागीदारी भी आवश्यक है।
कार्यशाला के दौरान प्रतिभागियों को अलग-अलग विषयगत समूहों में विभाजित कर राज्य में केयर इकोनॉमी को और प्रभावी बनाने के लिए सुझाव तैयार किए गए। इन समूहों ने वृद्धजन सेवाओं, दिव्यांगजन कल्याण, बाल संरक्षण, महिला सशक्तिकरण, कौशल विकास, डिजिटल सेवाओं और सामाजिक सुरक्षा से जुड़े कई व्यावहारिक सुझाव प्रस्तुत किए। इन अनुशंसाओं पर विस्तार से चर्चा की गई और भविष्य की नीतियों एवं कार्ययोजनाओं में उन्हें शामिल करने की दिशा में सहमति बनी।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि राज्य में डेटा आधारित योजना, विभागीय समन्वय, प्रशिक्षित मानव संसाधन और आधुनिक तकनीक का प्रभावी उपयोग किया जाए तो केयर इकोनॉमी न केवल सामाजिक सुरक्षा को मजबूत करेगी बल्कि रोजगार, आर्थिक विकास और सामाजिक समावेशन का भी मजबूत माध्यम बनेगी। इससे महिलाओं की आर्थिक भागीदारी बढ़ेगी और जरूरतमंद वर्गों को बेहतर जीवन स्तर उपलब्ध कराया जा सकेगा।
कार्यक्रम के समापन अवसर पर लक्ष्मी राजवाड़े ने विश्वास व्यक्त किया कि कार्यशाला में प्राप्त सुझाव राज्य की भावी नीतियों के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार का लक्ष्य ऐसा संवेदनशील, समावेशी और रोजगारोन्मुखी केयर इकोनॉमी मॉडल विकसित करना है, जो समाज के हर वर्ग को सुरक्षा, सम्मान और बेहतर जीवन का अवसर प्रदान करे। उन्होंने कहा कि सरकार सभी विभागों और सहयोगी संस्थाओं के साथ मिलकर इस दिशा में निरंतर कार्य करती रहेगी, ताकि छत्तीसगढ़ केयर इकोनॉमी के क्षेत्र में देश के अग्रणी राज्यों में अपनी पहचान स्थापित कर सके।