फुटपाथी दुकानदारों पर कार्रवाई का आरोप: सरपंच-सचिव से परेशान गरीब तहसीलदार की शरण में

चांदों में फुटपाथ पर दुकान लगाकर गुजर-बसर करने वाले गरीब दुकानदारों ने सरपंच और सचिव पर जबरन हटाने का आरोप लगाया है। पीड़ितों ने तहसीलदार से न्याय की गुहार लगाते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की है।

Apr 12, 2026 - 16:56
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फुटपाथी दुकानदारों पर कार्रवाई का आरोप: सरपंच-सचिव से परेशान गरीब तहसीलदार की शरण में

UNITED NEWS OF ASIA. अली खान, बलरामपुर l चांदों क्षेत्र में फुटपाथ पर छोटे-मोटे व्यवसाय कर अपने परिवार का पालन-पोषण करने वाले गरीब दुकानदारों के सामने आजीविका का संकट खड़ा हो गया है। पीडब्ल्यूडी सड़क किनारे वर्षों से दुकान लगाकर जीवन यापन कर रहे इन लोगों ने स्थानीय सरपंच और सचिव पर गंभीर आरोप लगाए हैं।

दुकानदारों का कहना है कि उन्हें अचानक नोटिस देकर दुकानें हटाने के लिए दबाव बनाया जा रहा है। उनका आरोप है कि सरपंच और सचिव द्वारा बिना किसी स्पष्ट कारण के उन्हें धमकाया जा रहा है और जबरन हटाने की कोशिश की जा रही है। इससे उनके सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है।

चांदों मुख्य मार्ग पर लंबे समय से कई ग्रामीण चाय की टापरी, पान दुकान और अन्य छोटे व्यवसाय कर रहे हैं। इन दुकानों के जरिए ही वे अपने परिवार का भरण-पोषण करते हैं। दुकानदारों का कहना है कि वे मेहनत-मजदूरी कर किसी तरह जीवन यापन कर रहे हैं, लेकिन अब प्रशासनिक दबाव के चलते उनका रोजगार छिनने का खतरा पैदा हो गया है।

इस कथित प्रताड़ना से परेशान होकर सभी पीड़ित दुकानदार तहसीलदार के पास पहुंचे और अपनी समस्या से अवगत कराया। उन्होंने प्रशासन से न्याय की गुहार लगाते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की है।

दुकानदारों ने स्पष्ट किया कि वे विकास कार्यों के विरोधी नहीं हैं। यदि सड़क चौड़ीकरण या किसी अन्य सरकारी योजना के तहत नियमानुसार जगह खाली करनी पड़े, तो वे स्वयं दुकानें हटा देंगे। लेकिन उन्होंने यह भी कहा कि यदि व्यक्तिगत रंजिश या मनमानी के तहत उन्हें हटाने की कोशिश की गई, तो वे इसका विरोध करेंगे।

पीड़ितों ने स्थानीय जनप्रतिनिधियों के रवैये पर नाराजगी जताते हुए कहा कि जनप्रतिनिधियों का कर्तव्य गरीबों की मदद करना होता है, न कि उनकी आजीविका छीनना। अचानक मिले नोटिस और कथित धमकियों से क्षेत्र में आक्रोश का माहौल है।

ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि मामले की गंभीरता को देखते हुए निष्पक्ष जांच कराई जाए और यह सुनिश्चित किया जाए कि किसी भी गरीब व्यक्ति के साथ अन्याय न हो। साथ ही उन्होंने यह भी अपील की कि उन्हें वैकल्पिक व्यवस्था उपलब्ध कराई जाए, ताकि उनका रोजगार प्रभावित न हो।

अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस मामले में क्या कदम उठाता है और क्या पीड़ित दुकानदारों को राहत मिल पाती है या नहीं। फिलहाल इस पूरे घटनाक्रम ने स्थानीय स्तर पर जनप्रतिनिधियों की कार्यशैली पर सवाल खड़े कर दिए हैं।