छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में हवाई सेवा विस्तार पर सुनवाई टली, नई एयरलाइंस को फिलहाल नहीं बुलाएगी सरकार
छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय में हवाई सेवा विस्तार से जुड़ी याचिका पर सुनवाई अब जुलाई तक के लिए टाल दी गई है। राज्य सरकार ने फिलहाल नई एयरलाइंस को आमंत्रित करने से इनकार किया है, जिससे प्रदेश में एयर कनेक्टिविटी विस्तार की प्रक्रिया धीमी पड़ सकती है।
UNITED NEWS OF ASIA. छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय में प्रदेश में हवाई सेवाओं के विस्तार से संबंधित एक महत्वपूर्ण याचिका पर सुनवाई को जुलाई तक के लिए स्थगित कर दिया गया है। इस फैसले के साथ ही फिलहाल नई एयरलाइंस को राज्य में आमंत्रित करने की प्रक्रिया भी रोक दी गई है, जिससे हवाई कनेक्टिविटी बढ़ाने की योजना को झटका लगा है।
यह मामला राज्य में सीमित हवाई सेवाओं और यात्रियों को हो रही असुविधा को लेकर दायर किया गया था। याचिका में मांग की गई थी कि छत्तीसगढ़ के प्रमुख शहरों, खासकर रायपुर से देश के अन्य बड़े शहरों के लिए अधिक उड़ानों की व्यवस्था की जाए और नई एयरलाइंस को संचालन की अनुमति दी जाए।
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से कोर्ट को बताया गया कि वर्तमान में एयर सेवा विस्तार के लिए विभिन्न स्तरों पर समीक्षा की जा रही है। सरकार का कहना है कि नई एयरलाइंस को बुलाने से पहले मौजूदा बुनियादी ढांचे, यात्री संख्या और आर्थिक व्यवहार्यता का मूल्यांकन जरूरी है। इसी कारण फिलहाल किसी नई एयरलाइन को आमंत्रित करने का निर्णय नहीं लिया गया है।
कोर्ट ने सरकार के इस रुख को ध्यान में रखते हुए मामले की अगली सुनवाई जुलाई में निर्धारित की है। इस दौरान सरकार से अपेक्षा की गई है कि वह विस्तृत रिपोर्ट पेश करे, जिसमें हवाई सेवा विस्तार की संभावनाओं और चुनौतियों का उल्लेख हो।
प्रदेश के व्यापारिक और औद्योगिक संगठनों ने इस निर्णय पर चिंता जताई है। उनका मानना है कि बेहतर एयर कनेक्टिविटी से निवेश और व्यापार को बढ़ावा मिलता है, जबकि सीमित उड़ानों के कारण व्यवसायिक गतिविधियों पर असर पड़ता है। विशेष रूप से दुर्ग और भिलाई जैसे औद्योगिक क्षेत्रों के लिए यह मुद्दा काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
विशेषज्ञों का कहना है कि छत्तीसगढ़ जैसे तेजी से विकसित हो रहे राज्य में हवाई सेवाओं का विस्तार समय की मांग है। बेहतर कनेक्टिविटी न केवल पर्यटन को बढ़ावा देगी, बल्कि स्वास्थ्य, शिक्षा और व्यापार के क्षेत्र में भी नई संभावनाएं खोलेगी।
हालांकि, सरकार का यह भी तर्क है कि बिना पर्याप्त मांग और आधारभूत संरचना के एयरलाइंस को आमंत्रित करना व्यावहारिक नहीं होगा। एयरपोर्ट सुविधाओं, रनवे क्षमता और यात्री भार जैसे पहलुओं का संतुलन बनाना जरूरी है।
अब सभी की नजर जुलाई में होने वाली अगली सुनवाई पर टिकी है, जहां यह तय होगा कि राज्य में हवाई सेवाओं के विस्तार को लेकर क्या ठोस कदम उठाए जाएंगे। तब तक के लिए यात्रियों और व्यापारिक वर्ग को मौजूदा सीमित सुविधाओं के साथ ही काम चलाना होगा।