संसद में उठा छत्तीसगढ़ के भारतनेट प्रोजेक्ट का मुद्दा, बृजमोहन अग्रवाल ने स्वतंत्र निगरानी समिति बनाने की मांग की
रायपुर सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने संसद में नियम 377 के तहत छत्तीसगढ़ में भारतनेट परियोजना के क्रियान्वयन में कथित अनियमितताओं और अधूरी सेवाओं का मुद्दा उठाया। उन्होंने ₹3,942 करोड़ की नई स्वीकृत राशि के प्रभावी उपयोग और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए स्वतंत्र निगरानी समिति के गठन की मांग की।
UNITED NEWS OF ASIA. अमृतेश्वर सिंह, रायपुर l रायपुर लोकसभा क्षेत्र के सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने संसद में नियम 377 के तहत छत्तीसगढ़ में भारतनेट परियोजना के क्रियान्वयन से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाते हुए केंद्र सरकार से स्वतंत्र निगरानी समिति गठित करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों तक डिजिटल सेवाएं पहुंचाने के उद्देश्य से शुरू की गई इस महत्वाकांक्षी योजना का अपेक्षित लाभ आज भी राज्य के हजारों गांवों तक नहीं पहुंच पाया है।
सांसद ने अपने नोटिस में कहा कि भारतनेट परियोजना का उद्देश्य ग्रामीण भारत को हाई-स्पीड इंटरनेट के माध्यम से ई-गवर्नेंस, ई-हेल्थ, ई-एजुकेशन और अन्य डिजिटल सेवाओं से जोड़ना है। हालांकि, छत्तीसगढ़ में इस परियोजना के क्रियान्वयन की स्थिति संतोषजनक नहीं है, जिसके कारण बड़ी संख्या में ग्रामीण नागरिक इन सुविधाओं से वंचित हैं।
बृजमोहन अग्रवाल ने संसद में प्रस्तुत आंकड़ों का उल्लेख करते हुए कहा कि परियोजना के पहले चरण में राज्य की 4,114 ग्राम पंचायतों तक ऑप्टिकल फाइबर केबल बिछाई गई थी, लेकिन इनमें से केवल 595 ग्राम पंचायतों में ही इंटरनेट सेवा संचालित हो रही है। शेष 3,519 ग्राम पंचायतों में कनेक्टिविटी उपलब्ध नहीं होने से करोड़ों रुपये का बुनियादी ढांचा अपेक्षित परिणाम नहीं दे पा रहा है।
उन्होंने दूसरे चरण का भी उल्लेख करते हुए कहा कि लगभग ₹1,754 करोड़ की लागत से 5,540 ग्राम पंचायतों में ऑप्टिकल फाइबर नेटवर्क तैयार किया गया, लेकिन वर्तमान में एक भी ग्राम पंचायत में इंटरनेट सेवा प्रभावी रूप से संचालित नहीं हो रही है। सांसद ने इसे गंभीर चिंता का विषय बताते हुए कहा कि इतनी बड़ी सार्वजनिक राशि से तैयार अधोसंरचना का उपयोग नहीं हो पाना जवाबदेही का प्रश्न खड़ा करता है।
सांसद ने यह भी कहा कि छत्तीसगढ़ इंफोटेक प्रमोशन सोसायटी (CHiPS) और परियोजना के रखरखाव से जुड़ी एजेंसी टाटा प्रोजेक्ट्स लिमिटेड के बीच भुगतान संबंधी विवाद न्यायालय में लंबित है। उनका कहना है कि इस विवाद का सीधा असर परियोजना के संचालन पर पड़ा है और ग्रामीण क्षेत्रों में इंटरनेट सेवाएं शुरू नहीं हो सकी हैं।
उन्होंने केंद्र सरकार द्वारा संशोधित भारतनेट कार्यक्रम के तहत छत्तीसगढ़ के लिए स्वीकृत ₹3,942 करोड़ की नई राशि का भी उल्लेख किया। सांसद का कहना था कि पहले और दूसरे चरण की कमियों का समाधान किए बिना नई राशि का प्रभावी उपयोग सुनिश्चित करना चुनौतीपूर्ण हो सकता है। इसलिए पारदर्शिता और जवाबदेही के लिए स्वतंत्र निगरानी व्यवस्था आवश्यक है।
बृजमोहन अग्रवाल ने केंद्र सरकार से मांग की कि परियोजना की प्रगति, पूर्व चरणों की समीक्षा, संबंधित एजेंसियों के बीच विवादों के समाधान तथा नए फंड के उपयोग की निगरानी के लिए एक स्वतंत्र समिति का गठन किया जाए। उनके अनुसार इससे परियोजना के क्रियान्वयन में पारदर्शिता बढ़ेगी और ग्रामीण क्षेत्रों तक डिजिटल सेवाएं समयबद्ध तरीके से पहुंच सकेंगी।
उन्होंने कहा कि भारतनेट परियोजना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के डिजिटल इंडिया अभियान की महत्वपूर्ण आधारशिला है। यदि यह योजना प्रभावी ढंग से लागू होती है तो ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों को ऑनलाइन शिक्षा, टेलीमेडिसिन, डिजिटल बैंकिंग, सरकारी सेवाओं और रोजगार के नए अवसरों का लाभ मिलेगा। उन्होंने यह भी कहा कि ग्रामीण भारत के समग्र विकास के लिए विश्वसनीय इंटरनेट कनेक्टिविटी आज मूलभूत आवश्यकता बन चुकी है।
सांसद ने विश्वास जताया कि यदि परियोजना की कमियों को दूर कर प्रभावी निगरानी व्यवस्था लागू की जाती है, तो भारतनेट योजना अपने मूल उद्देश्य को पूरा करते हुए छत्तीसगढ़ के हजारों गांवों को डिजिटल रूप से सशक्त बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकेगी।