बीजापुर ने रचा इतिहास, तेंदूपत्ता नीलामी में मिला वर्षों का सर्वाधिक रिकॉर्ड मूल्य

बीजापुर जिला यूनियन ने तेंदूपत्ता नीलामी में वर्षों का सर्वाधिक रिकॉर्ड मूल्य हासिल किया है। वन मंत्री केदार कश्यप ने इसे नई तेंदूपत्ता नीति, गुणवत्तापूर्ण संग्रहण और पारदर्शी नीलामी व्यवस्था का परिणाम बताते हुए संग्राहकों, सहकारी समितियों और वन विभाग को बधाई दी।

Jul 23, 2026 - 11:04
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बीजापुर ने रचा इतिहास, तेंदूपत्ता नीलामी में मिला वर्षों का सर्वाधिक रिकॉर्ड मूल्य

UNITED NEWS OF ASIA. अमृतेश्वर सिंह, रायपुर l छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले ने तेंदूपत्ता नीलामी में वर्षों का सर्वाधिक रिकॉर्ड मूल्य प्राप्त कर नया इतिहास रच दिया है। इस उल्लेखनीय उपलब्धि पर वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री केदार कश्यप ने तेंदूपत्ता संग्राहकों, प्राथमिक वनोपज सहकारी समितियों और वन विभाग की पूरी टीम को बधाई देते हुए इसे वनाधारित आजीविका और ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए बड़ी सफलता बताया।

मंत्री ने कहा कि राज्य सरकार की नई तेंदूपत्ता नीति, गुणवत्तापूर्ण संग्रहण, वैज्ञानिक उपचार, व्यवस्थित भंडारण और पारदर्शी नीलामी प्रक्रिया के कारण बीजापुर को यह ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल हुई है। इससे हजारों तेंदूपत्ता संग्राहक परिवारों की आय में वृद्धि होगी और उन्हें बोनस के रूप में भी अतिरिक्त आर्थिक लाभ मिलेगा।

बीजापुर जिला यूनियन की 28 प्राथमिक वनोपज सहकारी समितियों के माध्यम से इस वर्ष 45 तेंदूपत्ता लॉटों का विभागीय संग्रहण किया गया। इनमें से 36 लॉटों पर प्रतिस्पर्धात्मक निविदाएं प्राप्त हुईं, जिससे नीलामी में रिकॉर्ड मूल्य हासिल हुआ। चार लॉटों की बोली 10 हजार रुपये प्रति मानक बोरा से अधिक लगी, जबकि आठ लॉटों को 9 हजार रुपये से अधिक का मूल्य मिला। इसके अलावा चार लॉटों को 8 हजार रुपये और दस लॉटों को 7 हजार रुपये से अधिक की दर प्राप्त हुई। शेष सभी लॉटों को भी बेहतर बाजार मूल्य मिला।

केदार कश्यप ने कहा कि यह सफलता केवल बेहतर कीमत मिलने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह वनवासी परिवारों की मेहनत, सहकारी समितियों की सक्रिय भूमिका और वन विभाग की प्रभावी कार्यप्रणाली का परिणाम है। उन्होंने कहा कि गुणवत्तापूर्ण संग्रहण और पारदर्शी व्यवस्था से तेंदूपत्ता व्यापार को नई पहचान मिली है और इससे प्रदेश के अन्य जिलों को भी प्रेरणा मिलेगी।

उन्होंने कहा कि बीजापुर ने यह साबित कर दिया है कि यदि संग्रहण से लेकर नीलामी तक पूरी प्रक्रिया व्यवस्थित और पारदर्शी हो तो वनाधारित अर्थव्यवस्था को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया जा सकता है। इससे न केवल संग्राहकों की आय बढ़ेगी बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था भी मजबूत होगी।

वन मंत्री ने बीजापुर जिला यूनियन की सभी 28 प्राथमिक वनोपज सहकारी समितियों, तेंदूपत्ता संग्राहकों, स्थानीय ग्रामीणों, समिति पदाधिकारियों तथा वन विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों के योगदान की सराहना की। उन्होंने विश्वास जताया कि आने वाले वर्षों में भी बीजापुर इसी तरह नए कीर्तिमान स्थापित करेगा और वनाधारित आजीविका को सशक्त बनाने में अग्रणी भूमिका निभाएगा।

बीजापुर की यह उपलब्धि राज्य में वन संपदा के बेहतर प्रबंधन, संगठित प्रयासों और जनभागीदारी का सफल उदाहरण मानी जा रही है। इससे वनवासियों के आर्थिक सशक्तिकरण के साथ-साथ तेंदूपत्ता व्यापार को भी नई दिशा मिलने की उम्मीद है।