धान उत्पादन में नैनो उर्वरकों का वैज्ञानिक उपयोग बढ़ाएगा उपज, आईसीएआर-एनआईबीएसएम रायपुर का शोध

आईसीएआर-एनआईबीएसएम रायपुर द्वारा धान उत्पादन में नैनो यूरिया, नैनो डीएपी, नैनो जिंक और नैनो बोरॉन के वैज्ञानिक उपयोग पर उन्नत परीक्षण किए जा रहे हैं। इनका उद्देश्य उत्पादन बढ़ाने, लागत घटाने, मृदा स्वास्थ्य सुधारने और टिकाऊ कृषि को बढ़ावा देना है।

Jul 23, 2026 - 11:01
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धान उत्पादन में नैनो उर्वरकों का वैज्ञानिक उपयोग बढ़ाएगा उपज, आईसीएआर-एनआईबीएसएम रायपुर का शोध

UNITED NEWS OF ASIA. अमृतेश्वर सिंह, रायपुर l भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) के राष्ट्रीय जैविक स्ट्रैस प्रबंधन संस्थान (आईसीएआर-एनआईबीएसएम), रायपुर द्वारा खरीफ मौसम में धान की फसल के लिए नैनो उर्वरकों के वैज्ञानिक उपयोग पर उन्नत फील्ड परीक्षण संचालित किए जा रहे हैं। इन परीक्षणों में नैनो यूरिया, नैनो डीएपी, नैनो जिंक और नैनो बोरॉन के संतुलित उपयोग का धान की उत्पादकता, पोषक तत्व उपयोग दक्षता तथा पर्यावरणीय प्रभावों पर अध्ययन किया जा रहा है।

संस्थान के निदेशक पी. के. राय के मार्गदर्शन में चल रहे इस शोध का मुख्य उद्देश्य किसानों के लिए प्रमाण-आधारित तकनीकी अनुशंसाएं तैयार करना है, जिससे रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम हो, उत्पादन लागत घटे और टिकाऊ कृषि प्रणाली को बढ़ावा मिले। शोध के माध्यम से मृदा स्वास्थ्य को बेहतर बनाने और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

संस्थान के अनुसंधान प्रक्षेत्र में वैज्ञानिक किसानों, कृषि अधिकारियों, शोधार्थियों और कृषि विशेषज्ञों को नैनो उर्वरकों के सही उपयोग, उचित मात्रा, सुरक्षित छिड़काव तकनीक और एकीकृत पोषक तत्व प्रबंधन की जानकारी भी प्रदान कर रहे हैं। इसका उद्देश्य आधुनिक कृषि तकनीकों को खेत स्तर तक पहुंचाना और किसानों को वैज्ञानिक खेती के लिए प्रेरित करना है।

परियोजना प्रमुख एवं संयुक्त निदेशक अनिल दीक्षित ने बताया कि संस्थान भारत सरकार की सतत एवं प्राकृतिक संसाधन आधारित कृषि नीति के अनुरूप कार्य कर रहा है। उन्होंने कहा कि जैविक स्रोतों के साथ नैनो उर्वरकों का संतुलित उपयोग न केवल मृदा की गुणवत्ता में सुधार करेगा, बल्कि किसानों की आय बढ़ाने, पर्यावरण संरक्षण और उर्वरक उपयोग दक्षता बढ़ाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

वैज्ञानिक परीक्षणों के तहत धान की पौध की जड़ों का नैनो डीएपी से उपचार किया जा रहा है। इसके साथ सक्रिय कल्ले बनने की अवस्था में नैनो यूरिया का पर्णीय छिड़काव कर पौधों की वृद्धि, पोषक तत्व अवशोषण और पारंपरिक रासायनिक उर्वरकों की आवश्यकता में संभावित कमी का मूल्यांकन किया जा रहा है।

सूक्ष्म पोषक तत्वों की कमी को दूर करने के लिए नैनो जिंक और नैनो बोरॉन की प्रभावशीलता का भी अध्ययन किया जा रहा है। नैनो जिंक पौधों में क्लोरोफिल निर्माण बढ़ाने और खैरा रोग की रोकथाम में सहायक माना जाता है, जबकि नैनो बोरॉन पुष्पन, बालियों के विकास, दानों के भराव और उनकी गुणवत्ता सुधारने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

शोध के दौरान पौधों की वृद्धि, पोषक तत्वों के अवशोषण, कीट एवं रोगों के प्रति सहनशीलता, उपज और गुणवत्ता पर नैनो उर्वरकों के प्रभाव का विस्तृत विश्लेषण किया जा रहा है। इन परीक्षणों से प्राप्त निष्कर्ष भविष्य में धान उत्पादन के लिए वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित, पर्यावरण-अनुकूल और लागत-कुशल पोषक तत्व प्रबंधन तकनीकों के विकास में महत्वपूर्ण आधार बनेंगे।

आईसीएआर-एनआईबीएसएम रायपुर का यह अनुसंधान देश में संतुलित पोषक तत्व प्रबंधन, मृदा स्वास्थ्य संरक्षण, उर्वरक उपयोग दक्षता में वृद्धि और टिकाऊ धान उत्पादन प्रणाली विकसित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है। इससे किसानों को कम लागत में अधिक उत्पादन प्राप्त करने के साथ पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा मिलेगा।