विस्थापन नहीं, हमें विकास चाहिए; टाइगर रिजर्व में विकास कार्यों की मांग को लेकर आदिवासी ग्रामीणों ने भरी हुंकार

नगरी ब्लॉक के रिसगांव में गरियाबंद और धमतरी जिले के टाइगर रिजर्व क्षेत्र में बसे 128 गांवों के ग्रामीणों की बैठक आयोजित हुई। ग्रामीणों ने वन विभाग द्वारा विस्थापन के लिए दबाव बनाए जाने का आरोप लगाते हुए इसका विरोध किया और क्षेत्र में सड़क, बिजली, स्वास्थ्य तथा शिक्षा जैसी मूलभूत सुविधाओं के विकास की मांग उठाई। बैठक में जल, जंगल, जमीन संघर्ष समिति का गठन कर श्रीधन सोम को अध्यक्ष चुना गया।

Sep 6, 2026 - 16:39
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विस्थापन नहीं, हमें विकास चाहिए; टाइगर रिजर्व में विकास कार्यों की मांग को लेकर आदिवासी ग्रामीणों ने भरी हुंकार

UNITED NEWS OF ASIA. रिजवान मेमन, धमतरी l नगरी। नगरी ब्लॉक के रिसगांव में टाइगर रिजर्व क्षेत्र में बसे ग्रामीणों की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक में गरियाबंद जिले और नगरी क्षेत्र के टाइगर रिजर्व इलाके में रहने वाले ग्रामीणों ने वन विभाग की कार्यशैली, विकास कार्यों में कथित अवरोध और विस्थापन को लेकर अपनी बात रखी। ग्रामीणों ने स्पष्ट रूप से कहा कि उन्हें विस्थापन नहीं, बल्कि अपने गांव और क्षेत्र में विकास चाहिए। बैठक में क्षेत्र की समस्याओं पर विस्तार से चर्चा करते हुए जल, जंगल और जमीन संघर्ष समिति का गठन भी किया गया।

बताया गया कि टाइगर रिजर्व क्षेत्र में बसे ग्रामीणों के साथ वन विभाग द्वारा गांव-गांव में बैठकें आयोजित कर विस्थापन को लेकर चर्चा की जा रही है। ग्रामीणों का आरोप है कि कुछ लोगों से व्यक्तिगत रूप से संपर्क कर विस्थापन के लिए सहमति बनाने का प्रयास किया जा रहा है। ग्रामीणों ने इसे नियमों के विपरीत बताते हुए हर ग्राम में ग्राम सभा के माध्यम से विस्थापन के विरोध में प्रस्ताव पारित करने की बात कही।

बैठक में ग्रामीणों ने निर्णय लिया कि वे किसी भी प्रकार के प्रलोभन में आकर वन विभाग से संबंधित दस्तावेजों पर हस्ताक्षर नहीं करेंगे। ग्रामीणों का कहना है कि उनके गांवों और जंगलों से उनका वर्षों पुराना जुड़ाव है। वे जंगल से वनोपज संग्रहण करते हैं और अपने मवेशियों को भी जंगल क्षेत्र में चराने के लिए ले जाते हैं। ऐसे में बिना उनकी इच्छा के विस्थापन का प्रयास स्वीकार नहीं किया जाएगा।

बैठक में जनप्रतिनिधि मनोज साक्षी, श्रीधन सोम, नरेश माझी और रेवा देवदास ने भी ग्रामीणों की समस्याओं को उठाया। ग्रामीणों ने टाइगर रिजर्व में बाघों की मौजूदगी को लेकर भी सवाल उठाए। उनका कहना है कि क्षेत्र में बाघ की नियमित मौजूदगी दिखाई नहीं देती और कभी-कभार दूसरे क्षेत्रों से बाघ के आने की जानकारी मिलती है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि वन विभाग कैमरा लगाने और अन्य गतिविधियों पर बड़ी राशि खर्च कर रहा है, लेकिन क्षेत्र के मूलभूत विकास की स्थिति अभी भी चिंताजनक बनी हुई है।

ग्रामीणों ने सड़क, बिजली, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसी सुविधाओं की कमी को लेकर भी नाराजगी जताई। अर्जुन नायक, माखन सलाम, चंद्र कुमार अग्रवानी, बीरबल पद्माकर और टिकम सिंह नागवंशी सहित ग्रामीणों ने कहा कि क्षेत्र में आज भी कई गांव बुनियादी सुविधाओं से वंचित हैं। सड़क की स्थिति खराब है और बिजली, स्वास्थ्य तथा शिक्षा की पर्याप्त व्यवस्था नहीं होने से लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ता है।

ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि गांव में विकास कार्य स्वीकृत होने के बाद भी वन विभाग की आपत्तियों के कारण कई कार्य प्रभावित हो जाते हैं। उनका कहना है कि लंबे समय से क्षेत्र के लोग विकास की मांग कर रहे हैं, लेकिन उन्हें सुविधाएं देने के बजाय विस्थापन की चर्चा की जा रही है। ग्रामीणों ने मांग की कि पहले क्षेत्र में आवश्यक सुविधाएं विकसित की जाएं और स्थानीय लोगों के अधिकारों एवं ग्राम सभा की सहमति का सम्मान किया जाए।

रिसगांव में आयोजित बैठक में 128 गांव और पारा-टोला के ग्रामीणों की मौजूदगी रही। बैठक में विकास और विस्थापन के मुद्दे पर सामूहिक रणनीति तैयार की गई। इसी दौरान जल, जंगल, जमीन संघर्ष समिति का गठन सर्वसम्मति से किया गया। समिति का अध्यक्ष श्रीधन सोम को चुना गया। इसके अलावा उदंती, राजापड़ाव, रिसगांव, बोरई, सीतानदी, कट्टीगांव, बहीगांव, खल्लारी, बेलरबहारा, ठेन्ही और लिलाज क्षेत्र से उपाध्यक्ष, सचिव, सलाहकार, मीडिया प्रभारी और सदस्यों की जिम्मेदारियां तय की गईं।

ग्रामीणों ने कहा कि उनका संघर्ष क्षेत्र में मूलभूत सुविधाओं और अपने अधिकारों के लिए है। उन्होंने प्रशासन से मांग की कि विकास कार्यों में आने वाली बाधाओं को दूर कर गांवों में सड़क, बिजली, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं तथा विस्थापन से जुड़े किसी भी निर्णय में ग्राम सभा और स्थानीय ग्रामीणों की सहमति को प्राथमिकता दी जाए।