कार्यक्रम के मुख्य अतिथि दुर्ग लोकसभा सांसद विजय बघेल रहे। उन्होंने विधिवत पूजा-अर्चना के बाद छत्तीसगढ़ महतारी की प्रतिमा का अनावरण किया। प्रतिमा स्थापना को लेकर स्थानीय लोगों में विशेष उत्साह देखने को मिला। नागरिकों ने इसे छत्तीसगढ़ की संस्कृति, परंपरा और गौरव से जुड़ा महत्वपूर्ण आयोजन बताया।
समारोह के दौरान विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रमों का भी आयोजन किया गया। कलाकारों ने छत्तीसगढ़ की संस्कृति और परंपरा पर आधारित मनमोहक प्रस्तुतियां देकर उपस्थित लोगों का मनोरंजन किया। सांस्कृतिक प्रस्तुतियों को दर्शकों ने खूब सराहा और कलाकारों का उत्साहवर्धन किया। कार्यक्रम स्थल पर लोगों की मौजूदगी से आयोजन का माहौल उत्सवमय बना रहा।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सांसद विजय बघेल ने कहा कि छत्तीसगढ़ महतारी हमारी संस्कृति, परंपरा, पहचान और अस्मिता का प्रतीक हैं। उनकी प्रतिमा की स्थापना हमारी माटी और संस्कृति के प्रति सम्मान तथा गौरव को और मजबूत करने का कार्य करती है। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजनों के माध्यम से नई पीढ़ी को अपनी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को समझने और उससे जुड़ने की प्रेरणा मिलती है।
उन्होंने आयोजन से जुड़े सभी समितियों के पदाधिकारियों और सदस्यों को इस पहल के लिए बधाई दी। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ की अपनी विशिष्ट संस्कृति, लोक परंपराएं और गौरवशाली विरासत है, जिसे आगे बढ़ाने में समाज की महत्वपूर्ण भूमिका है। स्थानीय स्तर पर होने वाले ऐसे आयोजन लोगों को अपनी जड़ों और परंपराओं से जोड़ने का माध्यम बनते हैं।
कार्यक्रम में विधायक प्रतिनिधि सतीश साहू, ओबीसी मोर्चा प्रदेश महामंत्री उपकार चंद्राकर, तेजपाल, ग्राम विकास समिति अध्यक्ष सुकालू मढ़रिया, पार्षद राकेश बंछोर, पुनीत साहू, पंचू यादव, भिखु बंछोर, द्रोण वर्मा, अजय बंछोर, सुरजीत वर्मा, आशीष, रोशन, देवेंद्र साहू, शरद, राजा, नागेश यमन, प्रेम सहित विभिन्न समितियों के पदाधिकारी और सदस्य उपस्थित रहे।
आयोजन को लेकर हथखोज के स्थानीय नागरिकों में विशेष उत्साह दिखाई दिया। लोगों ने छत्तीसगढ़ महतारी की प्रतिमा स्थापना को क्षेत्र के लिए गौरव का विषय बताते हुए ऐसे आयोजनों की सराहना की। नागरिकों का कहना रहा कि संस्कृति और परंपरा से जुड़े कार्यक्रमों से समाज में आपसी जुड़ाव बढ़ता है और युवा पीढ़ी को अपनी विरासत के बारे में जानने का अवसर मिलता है।
समारोह के माध्यम से छत्तीसगढ़ की संस्कृति, परंपरा और अस्मिता के प्रति सम्मान का संदेश दिया गया। प्रतिमा अनावरण के साथ आयोजित सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने समारोह को यादगार बना दिया। स्थानीय समितियों और नागरिकों की सहभागिता ने आयोजन को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।