शोभायात्रा प्रारंभ होने से पहले समाज के आराध्य देव भगवान श्रीकृष्ण की विधिवत पूजा-अर्चना की गई। समाजजनों ने भगवान श्रीकृष्ण का आशीर्वाद लेकर शोभायात्रा का शुभारंभ किया। शोभायात्रा रायपुर राज महादेव घाट मुख्यालय से प्रारंभ हुई। समाजजनों द्वारा खारून नदी से पवित्र जल लिया गया, जिसके बाद शोभायात्रा मुख्य मार्ग से होते हुए राम मूर्ति पहुंची। यहां से शोभायात्रा वापस हटकेश्वर नाथ मंदिर पहुंची, जहां खारून नदी से लाए गए पवित्र जल से भगवान हटकेश्वर नाथ का जलाभिषेक किया गया। पूजा-अर्चना और आशीर्वाद प्राप्त करने के बाद शोभायात्रा का विधिवत समापन हुआ।
शोभायात्रा के दौरान ठेठवार समाज के अखाड़ा दल ने शौर्य और साहस का शानदार प्रदर्शन किया। अखाड़ा दल के प्रदर्शन ने उपस्थित समाजजनों और नागरिकों में उत्साह एवं रोमांच भर दिया। वहीं आकर्षक बग्गी में बाल स्वरूप में सजे राधा-कृष्ण की मनमोहक झांकी भी लोगों के आकर्षण का प्रमुख केंद्र रही। बाल रूप में राधा-कृष्ण की सुंदर झांकी ने श्रद्धालुओं का मन मोह लिया और पूरे वातावरण को भक्तिमय बना दिया।
आयोजन में नारी शक्ति की सहभागिता भी विशेष रही। समाज की महिलाओं ने सिर पर सुसज्जित मंगल कलश धारण कर शोभायात्रा में भाग लिया। पारंपरिक वेशभूषा में महिलाओं की यह गरिमामयी प्रस्तुति समाज की आस्था, संस्कार, परंपरा और सामाजिक एकजुटता का संदेश देती नजर आई। महिलाओं की श्रद्धापूर्ण सहभागिता की उपस्थित समाजजनों और नागरिकों ने सराहना की।
शोभायात्रा में शामिल सामाजिक बंधुओं ने पीले वस्त्र धारण किए थे। पीले परिधानों में एक साथ नजर आए समाजजनों की सामूहिक उपस्थिति ने शोभायात्रा को विशेष आकर्षण प्रदान किया। भक्ति और उमंग से भरे वातावरण में विभिन्न स्थानों पर दही-मटकी फोड़ कार्यक्रम आयोजित किए गए। कई स्थानों पर सामाजिक एवं धार्मिक मंचों द्वारा शोभायात्रा का पुष्पवर्षा कर स्वागत किया गया।
इस दौरान समाजजनों ने पारंपरिक दोहे और भजन प्रस्तुत किए। धार्मिक गीतों और पारंपरिक दोहों के साथ जय श्रीकृष्ण और राधे-राधे के जयकारों से पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठा। शोभायात्रा में युवाओं की सक्रिय भागीदारी ने आयोजन में नई ऊर्जा का संचार किया।
आयोजन के समापन अवसर पर सामाजिक बंधुओं और श्रद्धालुओं के लिए प्रसाद वितरण एवं सामूहिक भोजन की विशेष व्यवस्था की गई। सभी ने श्रद्धा और प्रेम के साथ प्रसाद ग्रहण किया। यादव ठेठवार समाज युवा प्रकोष्ठ, रायपुर राज की यह शोभायात्रा धार्मिक आस्था, सामाजिक एकता, नारी शक्ति, युवा ऊर्जा, संस्कृति और परंपरा का सुंदर संगम रही। 600 से अधिक समाजजनों की सहभागिता ने कृष्ण जन्मोत्सव के इस आयोजन को भव्य और यादगार बना दिया।