बलरामपुर में पत्रकार पर रंगदारी मांगने का आरोप, जनप्रतिनिधि ने जांच और कार्रवाई की मांग की

बलरामपुर जिले में एक पत्रकार पर स्थानीय जनप्रतिनिधि से कथित रूप से ₹10,000 की मांग करने और राशि नहीं मिलने पर भ्रामक समाचार प्रसारित करने का आरोप लगा है। जनपद सदस्य दीपक गुप्ता ने पुलिस, जिला प्रशासन और कलेक्टर को शिकायत सौंपकर मामले की निष्पक्ष जांच एवं कार्रवाई की मांग की है।

Jun 4, 2026 - 13:00
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बलरामपुर में पत्रकार पर रंगदारी मांगने का आरोप, जनप्रतिनिधि ने जांच और कार्रवाई की मांग की

UNITED NEWS OF ASIA. अली खान, बलरामपुर l बलरामपुर। जिले में पत्रकारिता की विश्वसनीयता और नैतिकता को लेकर एक गंभीर विवाद सामने आया है। एक स्थानीय जनप्रतिनिधि ने एक पत्रकार पर अवैध रूप से धनराशि मांगने और मांग पूरी नहीं होने पर भ्रामक समाचार प्रसारित करने का आरोप लगाया है। मामले ने क्षेत्र में चर्चा का विषय बना दिया है और प्रशासन से निष्पक्ष जांच की मांग की जा रही है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार ग्राम पंचायत टांगर माहरी के जनपद सदस्य दीपक गुप्ता ने बलरामपुर कोतवाली, पुलिस अधीक्षक और जिला कलेक्टर को लिखित शिकायत सौंपकर आरोप लगाया है कि बी.एस. टीवी से जुड़े जिला रिपोर्टर संजीव सिंह ने उनसे ₹10,000 की मांग की थी। शिकायत में कहा गया है कि यह मांग एक वीडियो को सार्वजनिक न करने और समाचार प्रसारित न करने के बदले की गई थी।

दीपक गुप्ता के अनुसार उन्होंने अपने निवास के बाहर आम नागरिकों और राहगीरों की सुविधा के लिए एक सार्वजनिक पेयजल नल की व्यवस्था कर रखी है। यह नल क्षेत्र के लोगों के उपयोग के लिए खुला रहता है। उनका कहना है कि कई बार लोग पानी पीने के बाद नल बंद करना भूल जाते हैं, जिससे कुछ समय तक पानी बहता रहता है। इसी प्रकार की एक घटना का वीडियो कथित रूप से पत्रकार द्वारा बनाया गया था।

शिकायत में आरोप लगाया गया है कि वीडियो बनाने के बाद पत्रकार ने मामले को समाचार के रूप में प्रसारित नहीं करने के एवज में ₹10,000 की मांग की। जनपद सदस्य का दावा है कि जब उन्होंने किसी भी प्रकार की राशि देने से इनकार कर दिया, तब उनके खिलाफ एक भ्रामक और तथ्यहीन समाचार प्रसारित किया गया। उनका आरोप है कि इससे उनकी सामाजिक प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने का प्रयास किया गया तथा सार्वजनिक जीवन में उनकी छवि प्रभावित हुई है।

जनप्रतिनिधि ने प्रशासन से मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच कराई जाए। साथ ही यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित व्यक्ति के खिलाफ कानूनी प्रावधानों के तहत सख्त कार्रवाई की जाए। शिकायत में यह भी कहा गया है कि इस तरह की घटनाएं पत्रकारिता जैसे जिम्मेदार पेशे की छवि को नुकसान पहुंचाती हैं और समाज में गलत संदेश देती हैं।

दूसरी ओर, इस मामले में आरोपित पत्रकार की ओर से अब तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। ऐसे में मामले के सभी पक्षों को सुनने और तथ्यों की जांच के बाद ही किसी निष्कर्ष पर पहुंचा जा सकता है। प्रशासनिक अधिकारियों ने शिकायत प्राप्त होने की पुष्टि करते हुए मामले की जांच प्रक्रिया शुरू किए जाने की जानकारी दी है।

मीडिया लोकतंत्र का महत्वपूर्ण स्तंभ माना जाता है और उसकी विश्वसनीयता निष्पक्षता, सत्यता तथा जवाबदेही पर आधारित होती है। वहीं किसी भी व्यक्ति पर लगाए गए आरोपों की सत्यता की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकती है। ऐसे में इस प्रकरण में भी प्रशासनिक जांच की रिपोर्ट आने के बाद ही पूरे मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

फिलहाल शिकायत के बाद मामला प्रशासनिक स्तर पर विचाराधीन है और क्षेत्र के लोगों की नजरें जांच के परिणाम पर टिकी हुई हैं। जांच पूरी होने के बाद ही यह तय हो सकेगा कि लगाए गए आरोपों में कितनी सच्चाई है और आगे क्या कार्रवाई की जाएगी।