बलरामपुर में खरीदी अनियमितता के आरोपों पर जांच जारी, अंतिम निष्कर्ष से पहले डीईओ पर सवाल क्यों?

बलरामपुर जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय में साइकिल, फर्नीचर, साइंस किट और स्वच्छता सामग्री की खरीदी को लेकर अनियमितता के आरोप सामने आए हैं। हालांकि, मामले की जांच अभी जारी है और आरोपों की पुष्टि नहीं हुई है। विभागीय जानकारी के अनुसार कई खरीदारियां ऑनलाइन प्रक्रिया से की गईं तथा सामग्री की आपूर्ति, पावती, गुणवत्ता परीक्षण और भौतिक सत्यापन के बाद भुगतान किए जाने का दावा है। ऐसे में जांच पूरी होने से पहले किसी निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी माना जा रहा है।

Aug 23, 2026 - 17:07
 0  78
बलरामपुर में खरीदी अनियमितता के आरोपों पर जांच जारी, अंतिम निष्कर्ष से पहले डीईओ पर सवाल क्यों?

UNITED NEWS OF ASIA. अली खान, बलरामपुर l जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय में शैक्षणिक मदों से जुड़ी खरीदी को लेकर अनियमितता के आरोपों के बीच अब विभागीय प्रक्रिया और दस्तावेजों को लेकर कई सवाल सामने आ रहे हैं। साइकिल, फर्नीचर, साइंस किट और स्वच्छता सामग्री की खरीदी में करोड़ों रुपये की गड़बड़ी के आरोप लगाए जा रहे हैं, लेकिन फिलहाल इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। मामले की जांच जारी है और अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगा।

ऑनलाइन प्रक्रिया से खरीदी का दावा

विभागीय जानकारी के अनुसार साइकिलों की खरीदी संचालक लोक शिक्षण संचालनालय स्तर से GeM पोर्टल के माध्यम से की गई। खरीदी के बाद साइकिलें संबंधित विकासखंड शिक्षा अधिकारियों को उपलब्ध कराई गईं। इसके बाद गठित समिति द्वारा उनकी गुणवत्ता का परीक्षण किया गया और फिर साइकिलों को संबंधित विद्यालयों तक पहुंचाया गया।

विद्यालयों में पात्र विद्यार्थियों को जनप्रतिनिधियों के माध्यम से साइकिलों का वितरण कराया गया। विभाग का दावा है कि पूरी प्रक्रिया निर्धारित व्यवस्था के अनुसार आगे बढ़ाई गई।

फर्नीचर की आपूर्ति और गुणवत्ता जांच

फर्नीचर की खरीदी और आपूर्ति को लेकर भी विभाग की ओर से प्रक्रिया संबंधी जानकारी दी गई है। संबंधित शैक्षणिक संस्थाओं में फर्नीचर पहुंचने के बाद पावती प्राप्त की गई। उपलब्ध सामग्री का गुणवत्ता परीक्षण भी कराया गया और प्रक्रिया पूरी होने के बाद संबंधित फर्मों को ट्रेजरी के माध्यम से भुगतान किए जाने की बात कही गई है।

साइंस किट का भी ऑनलाइन माध्यम से प्रावधान

साइंस किट की खरीदी राज्य स्तर से डायरेक्टरेट के माध्यम से ऑनलाइन प्रक्रिया के तहत किए जाने की जानकारी सामने आई है। संबंधित फर्म द्वारा संस्थानों में किट उपलब्ध कराई गई और उसकी प्राप्ति संबंधी पावती ली गई। इसके बाद टीम द्वारा गुणवत्ता परीक्षण और भौतिक सत्यापन किया गया।

विभागीय जानकारी के मुताबिक निर्धारित प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही भुगतान किया गया।

स्वच्छता सामग्री की खरीदी

स्वच्छता सामग्री के मामले में भी GeM पोर्टल के माध्यम से खरीदी किए जाने का दावा है। सप्लायर द्वारा सामग्री संबंधित विकासखंड शिक्षा अधिकारियों को उपलब्ध कराई गई। इसके बाद सामग्री की स्टॉक एंट्री और विद्यालयों में वितरण की प्रक्रिया पूरी की गई। वितरण और स्टॉक संबंधी प्रक्रिया के बाद संबंधित फर्म को भुगतान किया गया।

जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगी वास्तविकता

विभागीय स्तर पर यह दावा किया जा रहा है कि विभिन्न मदों में ऑनलाइन खरीदी, सामग्री की आपूर्ति, पावती, गुणवत्ता परीक्षण, भौतिक सत्यापन और भुगतान की प्रक्रिया अपनाई गई। हालांकि, आरोपों की वास्तविकता जांच के बाद ही स्पष्ट होगी।

ऐसे में जांच पूरी होने और दस्तावेजों की पूरी पड़ताल सामने आने से पहले किसी अधिकारी को दोषी ठहराना उचित नहीं माना जा सकता। फिलहाल आरोप सिद्ध नहीं हुए हैं और अंतिम निष्कर्ष जांच रिपोर्ट पर निर्भर करेगा।

शिक्षा व्यवस्था में प्रशासनिक सुधार का दावा

इधर विभागीय जानकारों का कहना है कि जिला शिक्षा अधिकारी द्वारा जिले की शैक्षणिक व्यवस्था में प्रशासनिक कसावट लाने के प्रयास किए जा रहे हैं। विद्यालयों में शिक्षकों की समय पर उपस्थिति, नियमित मॉनिटरिंग और शैक्षणिक व्यवस्था में सुधार पर जोर दिए जाने की बात कही जा रही है।

जानकारों के अनुसार, लोगों को अपनी समस्याओं के समाधान के लिए सीधे जिला शिक्षा अधिकारी से मिलने की सुविधा मिलने से बिचौलियों की भूमिका भी कम हुई है। इसी वजह से कुछ लोगों में नाराजगी होने और अधिकारी की छवि प्रभावित करने की कोशिश की चर्चा भी सामने आ रही है। हालांकि, यह दावा भी स्वतंत्र रूप से प्रमाणित नहीं है।

फिलहाल पूरे मामले में जांच जारी है। इसलिए अंतिम रिपोर्ट सामने आने से पहले आरोपों को तथ्य के रूप में पेश करने के बजाय जांच के निष्कर्ष का इंतजार करना ही उचित होगा।