बालोद में दुग्ध उत्पादकों का बड़ा ऐलान, 24 अगस्त से अनिश्चितकालीन दूध बिक्री बंद करने की चेतावनी
बालोद जिले में दूध के खरीदी रेट में बढ़ोतरी और लंबित बोनस भुगतान की मांग को लेकर दुग्ध उत्पादक किसानों ने मोर्चा खोल दिया है। किसानों ने दुग्ध उत्पादन एवं प्रसंस्करण सहकारी समिति, बालोद को ज्ञापन सौंपकर तीन प्रमुख मांगें रखी हैं। मांगें पूरी नहीं होने पर किसानों ने 24 अगस्त 2026 से अनिश्चितकालीन दूध बिक्री बंद करने की चेतावनी दी है।
UNITED NEWS OF ASIA. सुनील साहू, बालोद l जिले में दुग्ध उत्पादक किसानों ने दूध के खरीदी रेट में बढ़ोतरी और पिछले पांच महीनों से लंबित बोनस भुगतान को लेकर मोर्चा खोल दिया है। किसानों ने दुग्ध उत्पादन एवं प्रसंस्करण सहकारी समिति, बालोद को ज्ञापन सौंपकर अपनी मांगों से अवगत कराया है। मांगें पूरी नहीं होने पर किसानों ने 24 अगस्त 2026 से अनिश्चितकालीन दुग्ध विक्रय बंद करने की चेतावनी दी है।
समस्त दुग्ध उत्पादक किसान संघ की ओर से 22 अगस्त 2026 को ज्ञापन सौंपा गया। किसानों का कहना है कि पशुपालन में लगातार लागत बढ़ रही है। चारा, पशु आहार और अन्य खर्च बढ़ने के बावजूद दूध के खरीदी रेट में अपेक्षित बढ़ोतरी नहीं की गई है। इससे दुग्ध उत्पादकों को आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
किसानों ने रखीं तीन प्रमुख मांगें
दुग्ध उत्पादक किसानों ने ज्ञापन के माध्यम से तीन प्रमुख मांगें रखी हैं। पहली मांग है कि गाय के दूध का खरीदी रेट 50 रुपये प्रति किलो और भैंस के दूध का खरीदी रेट 60 रुपये प्रति किलो किया जाए।
दूसरी मांग के तहत किसानों ने दुग्ध लिमिटेड में गाय के दूध का रेट 60 रुपये और भैंस के दूध का रेट 70 रुपये प्रति किलो निर्धारित करने की मांग की है।
तीसरी और अहम मांग 1 अप्रैल 2025 से 31 मार्च 2026 तक की अवधि के लिए 2 रुपये प्रति किलो बोनस राशि का भुगतान करने की है। किसानों के अनुसार यह बोनस पिछले पांच महीनों से लंबित है और अभी तक इसका भुगतान नहीं किया गया है।
24 अगस्त से दूध बिक्री बंद करने की चेतावनी
किसानों ने स्पष्ट किया है कि यदि उनकी मांगों पर जल्द निर्णय नहीं लिया गया तो 24 अगस्त 2026 से जिले में अनिश्चितकालीन दुग्ध विक्रय बंद कर दिया जाएगा। किसानों के इस ऐलान के बाद दुग्ध क्षेत्र से जुड़े कारोबार और दूध आपूर्ति को लेकर भी स्थिति महत्वपूर्ण हो गई है।
दुग्ध उत्पादकों का कहना है कि पशुपालन अब लगातार महंगा होता जा रहा है। पशुओं के चारे और देखभाल पर होने वाला खर्च बढ़ने के कारण मौजूदा दूध दर पर किसानों के लिए पशुपालन करना मुश्किल हो रहा है। किसानों ने सरकार और संबंधित सहकारी संस्था से उनकी मांगों पर जल्द सकारात्मक निर्णय लेने की अपील की है।
ज्ञापन में मुकेश यादव, गोवर्धन दास सहित बड़ी संख्या में दुग्ध उत्पादक किसानों के हस्ताक्षर बताए गए हैं। किसानों ने कहा है कि यदि समय रहते दूध के दाम में उचित बढ़ोतरी और लंबित बोनस का भुगतान नहीं किया गया, तो वे अपने आंदोलन को आगे भी जारी रखेंगे।
अब देखना होगा कि दुग्ध उत्पादकों की मांगों पर संबंधित विभाग और प्रशासन की ओर से क्या निर्णय लिया जाता है और क्या 24 अगस्त से प्रस्तावित अनिश्चितकालीन दूध बिक्री बंद होने से पहले किसानों और प्रशासन के बीच कोई समाधान निकल पाता है।