टाटा पावर के प्रस्तावित बिजली वितरण लाइसेंस के खिलाफ विकास उपाध्याय ने दायर की याचिका

पूर्व संसदीय सचिव विकास उपाध्याय ने रायपुर, धरसीवा, मंदिर हसौद और अभनपुर तहसील क्षेत्रों में टाटा पावर को वितरण लाइसेंस दिए जाने के प्रस्ताव के खिलाफ न्यायालय में याचिका दायर करने की जानकारी दी है। उन्होंने प्रस्ताव को लेकर बिजली दर, सीएसपीडीसीएल, उपभोक्ताओं और स्थानीय उद्योगों पर संभावित प्रभाव से जुड़े सवाल उठाए हैं। छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत नियामक आयोग में टाटा पावर की याचिका क्रमांक 89/2026 दर्ज है और इस पर 1 अक्टूबर 2026 को सार्वजनिक सुनवाई निर्धारित है।

Sep 22, 2026 - 09:21
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टाटा पावर के प्रस्तावित बिजली वितरण लाइसेंस के खिलाफ विकास उपाध्याय ने दायर की याचिका

UNITED NEWS OF ASIA. अमृतेश्वर सिंह, रायपुर l रायपुर जिले के रायपुर, धरसीवा, मंदिर हसौद और अभनपुर तहसील क्षेत्रों में टाटा पावर को बिजली वितरण लाइसेंस दिए जाने के प्रस्ताव को लेकर राजनीतिक विरोध शुरू हो गया है। पूर्व संसदीय सचिव और कांग्रेस नेता विकास उपाध्याय ने इस मामले के खिलाफ न्यायालय में याचिका दायर करने की जानकारी दी है। उन्होंने प्रस्तावित समानांतर बिजली वितरण लाइसेंस को लेकर उपभोक्ताओं, किसानों, स्थानीय उद्योगों और छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत वितरण कंपनी लिमिटेड यानी सीएसपीडीसीएल पर संभावित प्रभाव को लेकर सवाल उठाए हैं।

छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत नियामक आयोग के रिकॉर्ड के अनुसार टाटा पावर कंपनी लिमिटेड ने याचिका क्रमांक 89/2026 के माध्यम से रायपुर, धरसीवा, मंदिर हसौद और अभनपुर तहसीलों के भौगोलिक रूप से जुड़े क्षेत्र के लिए विद्युत वितरण लाइसेंस देने का आवेदन किया है। यह आवेदन विद्युत अधिनियम, 2003 की धारा 14 और 15 तथा संबंधित लाइसेंस नियमों के तहत प्रस्तुत किया गया है। आयोग ने इस मामले पर आपत्ति और सुझाव आमंत्रित किए हैं। इस याचिका पर सार्वजनिक सुनवाई 1 अक्टूबर 2026 को सुबह 11:30 बजे निर्धारित है।

 

विकास उपाध्याय ने कहा कि प्रस्तावित लाइसेंस के कारण सरकारी बिजली वितरण व्यवस्था और उपभोक्ताओं पर पड़ने वाले प्रभाव का गंभीरता से परीक्षण होना चाहिए। उन्होंने टाटा पावर के आवेदन में प्रस्तावित निवेश और संबंधित क्षेत्र में बिजली वितरण नेटवर्क के विस्तार को लेकर भी सवाल उठाए। उपाध्याय का आरोप है कि सीमित निवेश के साथ बड़े क्षेत्र में नई वितरण व्यवस्था तैयार करना चुनौतीपूर्ण होगा और भविष्य में मौजूदा ग्रिड के उपयोग की आवश्यकता पड़ सकती है।

उन्होंने निजी वितरण कंपनियों के अन्य राज्यों में संचालन का उदाहरण देते हुए उनके अनुभवों की समीक्षा किए जाने की मांग की। उपाध्याय ने आशंका जताई कि निजी वितरण कंपनी के प्रवेश से उपभोक्ताओं के लिए बिजली दर और सेवा व्यवस्था पर असर पड़ सकता है। हालांकि इन प्रभावों का वास्तविक स्वरूप लाइसेंस की शर्तों, नियामक निर्णयों और भविष्य में लागू होने वाली दर व्यवस्था पर निर्भर करेगा।

विकास उपाध्याय ने स्मार्ट मीटरिंग को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने बिजली बिलों में कथित बढ़ोतरी और प्री-पेड स्मार्ट मीटर व्यवस्था के प्रभाव का मुद्दा उठाते हुए सरकार से स्थिति स्पष्ट करने की मांग की। दूसरी ओर, उपलब्ध आधिकारिक जानकारी के अनुसार टाटा पावर ने छत्तीसगढ़ में सीएसपीडीसीएल के लिए रायपुर शहर और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में स्मार्ट मीटर परियोजना से संबंधित कार्य किया है।

उपाध्याय ने कहा कि यदि लाभ वाले औद्योगिक और वाणिज्यिक उपभोक्ता किसी निजी वितरण कंपनी के क्षेत्र में चले जाते हैं तो सरकारी वितरण कंपनी के राजस्व और क्रॉस-सब्सिडी व्यवस्था पर असर पड़ सकता है। उन्होंने रायपुर, धरसीवा और अभनपुर के औद्योगिक क्षेत्रों में बिजली दरों और आपूर्ति व्यवस्था को लेकर भी चिंता जताई। उनका कहना है कि बिजली की लागत बढ़ने से स्थानीय उद्योगों और रोजगार पर प्रभाव पड़ सकता है।

उन्होंने सीएसपीडीसीएल की भूमिका को लेकर भी अपनी आपत्तियां रखीं और कहा कि राज्य की सार्वजनिक बिजली व्यवस्था को कमजोर नहीं किया जाना चाहिए। उपाध्याय ने केंद्र और राज्य सरकार की ऊर्जा नीतियों पर भी सवाल उठाते हुए बिजली कटौती, लोड शेडिंग, बिल और निजीकरण से जुड़े मुद्दे उठाए।

विकास उपाध्याय ने मांग की कि याचिका क्रमांक 89/2026 पर निर्णय लेने से पहले उपभोक्ताओं, किसानों, उद्योगों और सीएसपीडीसीएल पर पड़ने वाले संभावित प्रभावों का विस्तृत परीक्षण किया जाए। उन्होंने टाटा पावर के वितरण लाइसेंस आवेदन को निरस्त करने की मांग भी रखी है। मामले में आगे की स्थिति छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत नियामक आयोग की सुनवाई और निर्णय के बाद स्पष्ट होगी। आयोग के आधिकारिक रिकॉर्ड में फिलहाल 1 अक्टूबर की सार्वजनिक सुनवाई निर्धारित है।