स्थानीय नागरिकों के अनुसार प्रतिदिन सुबह से शाम तक दर्जनों ट्रैक्टर और टीपर हसदेव नदी से रेत निकालकर विभिन्न स्थानों तक पहुंचाते हैं। आरोप यह भी है कि कई जगहों पर जेसीबी मशीनों का उपयोग कर नदी से बड़े पैमाने पर रेत निकाली जा रही है। लोगों का कहना है कि यदि यह गतिविधियां नियमों के विपरीत संचालित हो रही हैं, तो इससे न केवल शासन के राजस्व को नुकसान पहुंच रहा है, बल्कि नदी के प्राकृतिक स्वरूप और पर्यावरण पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है।
ग्रामीणों का कहना है कि क्षेत्र में प्रतिबंध लागू होने के बावजूद रेत निकासी और परिवहन का सिलसिला नहीं रुका है। उनका आरोप है कि कई बार शिकायत करने के बावजूद संबंधित विभागों की ओर से ठोस कार्रवाई नहीं की गई। यही कारण है कि अब लोगों ने जिला प्रशासन और खनिज विभाग से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की मांग की है।
मामले में कुछ स्थानीय लोगों के नाम भी सामने आए हैं। विश्वसनीय सूत्रों के हवाले से घनश्याम, नन्हा, सद्दाम, सुभाष, रंजू, गंगा, पिंटू, राजकुमार और रवि सहित कुछ अन्य लोगों का उल्लेख किया जा रहा है। हालांकि इन आरोपों की किसी सक्षम सरकारी एजेंसी द्वारा आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है और इन व्यक्तियों को किसी अपराध का दोषी नहीं ठहराया गया है। मामले की सच्चाई जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
बताया जा रहा है कि इस संबंध में उपलब्ध फोटो और वीडियो में सीतामढ़ी रेत घाट पर बड़े पैमाने पर रेत निकासी की गतिविधियां दिखाई देती हैं। यदि जांच में यह पाया जाता है कि यह कार्य बिना वैध अनुमति या निर्धारित नियमों के विपरीत किया जा रहा था, तो संबंधित लोगों के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई की जा सकती है। फिलहाल इन दावों की स्वतंत्र आधिकारिक पुष्टि होना बाकी है।
अब सभी की नजर खनिज विभाग और जिला प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी हुई है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि निष्पक्ष जांच कर दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई की जाती है तो इससे अवैध उत्खनन पर रोक लगाने में मदद मिलेगी। वहीं, संबंधित विभाग का पक्ष सामने आने के बाद मामले की स्थिति और स्पष्ट होगी। फिलहाल यह मामला जांच और प्रशासनिक कार्रवाई की प्रतीक्षा में है तथा क्षेत्र के लोग इस पूरे घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए हैं।