प्रदर्शनकारियों का कहना है कि यह मंदिर लंबे समय से क्षेत्र की धार्मिक और सामाजिक पहचान का केंद्र रहा है। मंदिर में प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन और पूजा-अर्चना के लिए पहुंचते हैं। ऐसे में मंदिर को हटाने या तोड़ने की कार्रवाई से लोगों की धार्मिक भावनाएं आहत हुई हैं। इसी मुद्दे को लेकर लोगों ने नगर निगम प्रशासन के खिलाफ नाराजगी जताई।
जोन कार्यालय के बाहर प्रदर्शन के दौरान लोगों ने वार्ड पार्षद के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि मंदिर को लेकर उचित संवाद और वैकल्पिक व्यवस्था किए बिना कार्रवाई की गई। लोगों ने इस मामले में जिम्मेदार अधिकारियों और संबंधित लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।
विरोध प्रदर्शन में शामिल नागरिकों का कहना है कि किसी भी धार्मिक स्थल से जुड़ा निर्णय लेने से पहले स्थानीय लोगों की राय ली जानी चाहिए थी। उनका आरोप है कि प्रशासन ने लोगों की भावनाओं की अनदेखी करते हुए कार्रवाई की, जिससे क्षेत्र में आक्रोश का माहौल बन गया है।
प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस सहित अन्य राजनीतिक दलों के कार्यकर्ताओं ने भी प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। उनका कहना है कि धार्मिक स्थलों से जुड़े मामलों में संवेदनशीलता बरतना आवश्यक है और भविष्य में इस प्रकार की कार्रवाई से पहले जनप्रतिनिधियों एवं स्थानीय नागरिकों से चर्चा की जानी चाहिए।
प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी कि यदि मंदिर से जुड़े मामले में संतोषजनक समाधान नहीं निकाला गया और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा। मौके पर बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे, जिससे जोन कार्यालय परिसर में काफी देर तक तनावपूर्ण स्थिति बनी रही।
हालांकि, इस पूरे मामले में नगर निगम प्रशासन की ओर से तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। प्रशासन की ओर से यह भी स्पष्ट नहीं किया गया है कि मंदिर को हटाने की कार्रवाई किस आधार पर की गई और आगे इस मामले में क्या कदम उठाए जाएंगे।
समाचार लिखे जाने तक जोन कार्यालय परिसर में विरोध प्रदर्शन जारी था। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि वे मंदिर की सुरक्षा और धार्मिक आस्था की रक्षा के लिए अपना आंदोलन जारी रखेंगे। अब सभी की नजर प्रशासन के अगले कदम और इस विवाद के समाधान पर टिकी हुई है।