मृत व्यक्ति के नाम पर फर्जी दस्तावेज बनाकर जमीन हड़पने का आरोप, SDM से शिकायत
कुसमी तहसील के ग्राम पंचायत जिगनियां के पारा अम्बाकोना से जमीन धोखाधड़ी का गंभीर मामला सामने आया है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि वर्ष 2012 में मृत लोया आ० चकिया के नाम दर्ज जमीन का फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र और पहचान दस्तावेज तैयार कर गोवर्धन ने खुद को उनका बेटा बताते हुए फौती नामांतरण अपने नाम करा लिया। मामले की शिकायत कुसमी SDM से कर जांच और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की गई है।
UNITED NEWS OF ASIA. अली खान, बलरामपुर l कुसमी तहसील अंतर्गत ग्राम पंचायत जिगनियां के पारा अम्बाकोना से जमीन धोखाधड़ी का एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि एक मृत व्यक्ति के नाम से फर्जी दस्तावेज तैयार कर उसकी जमीन दूसरे व्यक्ति के नाम कराने का खेल किया गया। मामले को लेकर ग्रामीणों ने कुसमी के अनुविभागीय अधिकारी राजस्व यानी SDM को शिकायत पत्र सौंपकर जांच और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।
ग्रामीणों के मुताबिक अम्बाकोना में शामिल खाता जमीन लोया आ० चकिया के नाम पर राजस्व अभिलेखों में दर्ज थी। बताया गया है कि लोया की मृत्यु वर्ष 2012 में ही हो चुकी थी, इसके बावजूद वर्ष 2025 तक राजस्व रिकॉर्ड में उनका नाम दर्ज रहा।
आरोप है कि ग्राम जलबोथा निवासी गोवर्धन, पिता लेडग, ने लोया के नाम से फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र और पहचान संबंधी दस्तावेज तैयार करवाए। इसके बाद खुद को लोया का पुत्र बताते हुए जमीन का फौती नामांतरण अपने नाम करा लिया गया। ग्रामीणों का कहना है कि इस पूरी प्रक्रिया में वास्तविक वारिसों को किसी प्रकार की सूचना नहीं दी गई।
शिकायतकर्ताओं ने 2003 की मतदाता सूची का हवाला देते हुए बताया कि उसमें गोवर्धन के पिता का नाम लेढ़गा दर्ज है। ग्रामीणों का दावा है कि इसके बावजूद गोवर्धन ने सरकारी रिकॉर्ड में खुद को लोया का बेटा बताया। उनका यह भी कहना है कि लोया का कोई बेटा नहीं था। लोया की केवल एक बेटी है, जिसका विवाह गोपातु में हुआ है और वह वर्तमान में जीवित है।
मामले में ग्रामीणों ने कुछ भू-अभिलेख कर्मचारियों की भूमिका पर भी सवाल उठाए हैं और मिलीभगत की आशंका जताई है। ग्रामीणों की मांग है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर फर्जी दस्तावेजों की सत्यता की जांच की जाए, जमीन के नामांतरण की प्रक्रिया और उससे जुड़े रिकॉर्ड की पड़ताल की जाए तथा यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाए।
फिलहाल यह मामला प्रशासन के समक्ष पहुंच चुका है। अब ग्रामीणों की नजर SDM कार्यालय की जांच और आगामी कार्रवाई पर है। जमीन के राजस्व रिकॉर्ड में कथित फर्जीवाड़े की जांच के बाद ही पूरे मामले की वास्तविक तस्वीर साफ हो सकेगी।