प्राप्त जानकारी के अनुसार, डीआरजी (डिस्ट्रिक्ट रिजर्व गार्ड) के जवान इलाके में आईईडी की खोज और उसे निष्क्रिय करने के अभियान में लगे हुए थे। इसी दौरान अचानक एक छिपा हुआ आईईडी विस्फोटित हो गया, जिससे मौके पर अफरा-तफरी मच गई। इस विस्फोट की चपेट में आकर इंस्पेक्टर सुखराम वट्टी, कॉन्स्टेबल कृष्णा कोमरा और बस्तर फाइटर कॉन्स्टेबल संजय गढ़पाले ने मौके पर ही वीरगति प्राप्त कर ली।
वहीं, इस हादसे में गंभीर रूप से घायल बस्तर फाइटर कॉन्स्टेबल परमानंद कोर्राम को तत्काल उपचार के लिए रायपुर रेफर किया गया, लेकिन इलाज के दौरान उन्होंने भी दम तोड़ दिया। इस तरह इस हादसे में कुल चार जवानों की शहादत हो गई, जिससे पूरे क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई है।
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, सुरक्षा बलों को हाल के महीनों में आत्मसमर्पण कर चुके माओवादी कैडरों से महत्वपूर्ण सूचनाएं मिली थीं, जिनके आधार पर लगातार सर्च और डी-माइनिंग ऑपरेशन चलाए जा रहे थे। इन अभियानों के दौरान अब तक सैकड़ों आईईडी बरामद कर उन्हें सफलतापूर्वक निष्क्रिय किया जा चुका है।
हालांकि, यह घटना इस बात का संकेत है कि नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में खतरा अब भी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। माओवादी संगठन अब भी सुरक्षा बलों को निशाना बनाने के लिए आईईडी जैसे घातक हथियारों का इस्तेमाल कर रहे हैं।
घटना के बाद सुरक्षा बलों ने पूरे इलाके को घेर लिया है और सर्च ऑपरेशन को और तेज कर दिया गया है। आसपास के क्षेत्रों में अतिरिक्त बल तैनात किया गया है और हर संदिग्ध गतिविधि पर नजर रखी जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि दोषियों को जल्द ही पकड़ने के लिए हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं।
इस दुखद घटना ने एक बार फिर नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में तैनात जवानों के साहस और बलिदान को सामने लाया है। देश की सुरक्षा के लिए अपने प्राणों की आहुति देने वाले इन जवानों की शहादत को हमेशा याद रखा जाएगा।
सरकार और पुलिस प्रशासन ने शहीद जवानों के परिजनों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त की है और हर संभव सहायता का आश्वासन दिया है। वहीं, पूरे क्षेत्र में इस घटना को लेकर गहरा शोक और आक्रोश का माहौल बना हुआ है।