कार्यशाला में विशेषज्ञों ने विकसित ग्राम पंचायत योजना (VGPP) को ग्रामीण विकास की नई आधारशिला बताते हुए कहा कि अब पंचायतों की भूमिका केवल निर्माण कार्यों तक सीमित नहीं रहेगी। पंचायतों को स्थानीय आर्थिक विकास, रोजगार सृजन, आजीविका संवर्धन, उद्यमिता प्रोत्साहन और उत्पादक आधारभूत संरचना के विकास पर भी विशेष ध्यान देना होगा। इसके साथ ही विभिन्न विभागों की योजनाओं के समन्वय और उपलब्ध संसाधनों के बेहतर उपयोग के माध्यम से समग्र ग्राम विकास को गति देने पर जोर दिया गया।
प्रशिक्षण के दौरान ग्राम पंचायत विकास योजना (GPDP) के वैज्ञानिक एवं सहभागी निर्माण, प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन, वित्तीय अनुशासन, पारदर्शिता, सामाजिक उत्तरदायित्व तथा सुशासन के सिद्धांतों पर विस्तृत जानकारी दी गई। पंचायत प्रतिनिधियों को जनभागीदारी बढ़ाने, विकास कार्यों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने, योजनाओं की नियमित निगरानी तथा समयबद्ध क्रियान्वयन के व्यावहारिक तरीके भी बताए गए।
विशेषज्ञों ने कहा कि विकसित ग्राम पंचायत योजना के तहत तकनीक, नवाचार, सतत विकास और जलवायु अनुकूलन जैसे विषयों को ग्राम योजनाओं का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया जा रहा है, ताकि पंचायतें भविष्य की चुनौतियों का प्रभावी ढंग से सामना कर सकें और विकसित भारत के लक्ष्य को जमीनी स्तर पर साकार किया जा सके।
कार्यशाला में कबीरधाम, मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी और खैरागढ़-छुईखदान-गंडई जिलों के जनपद पंचायत प्रतिनिधियों ने सक्रिय भागीदारी करते हुए ग्रामीण विकास से जुड़े विभिन्न विषयों पर प्रशिक्षण प्राप्त किया। प्रतिनिधियों ने पंचायत प्रशासन, विकास योजनाओं के प्रभावी संचालन और स्थानीय स्तर पर बेहतर निर्णय लेने की प्रक्रिया को समझा।
तीन दिवसीय इस संभाग स्तरीय प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य पंचायत प्रतिनिधियों की नेतृत्व क्षमता, प्रशासनिक दक्षता और निर्णय लेने की योग्यता को मजबूत बनाना था, ताकि ग्रामीण विकास योजनाओं का प्रभावी, पारदर्शी और जनहितकारी क्रियान्वयन सुनिश्चित हो सके। विशेषज्ञों ने विश्वास जताया कि इस प्रकार के प्रशिक्षण से ग्राम पंचायतें आत्मनिर्भर, जवाबदेह और विकास के नए मॉडल के रूप में उभरेंगी तथा ग्रामीण क्षेत्रों में समग्र विकास को नई गति मिलेगी।