अमेरिकी मेयर जोहरान ममदानी ने जेल में बंद उमर खालिद को लिखा पत्र, कहा– “हम आपके बारे में सोच रहे हैं”

न्यूयॉर्क के नवनिर्वाचित मेयर जोहरान ममदानी ने जेल में बंद भारतीय एक्टिविस्ट उमर खालिद को हाथ से लिखी चिट्ठी भेजकर समर्थन और सहानुभूति व्यक्त की है। यह पत्र अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नागरिक अधिकारों और न्याय की आवाज के रूप में देखा जा रहा है।

Jan 2, 2026 - 12:14
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अमेरिकी मेयर जोहरान ममदानी ने जेल में बंद उमर खालिद को लिखा पत्र, कहा– “हम आपके बारे में सोच रहे हैं”

 UNITED NEWS OF ASIA. न्यूयॉर्क/नई दिल्ली। अमेरिका के न्यूयॉर्क शहर के नवनिर्वाचित मेयर जोहरान ममदानी (Zohran Mamdani) ने जेल में बंद भारतीय सामाजिक कार्यकर्ता उमर खालिद को एक भावनात्मक, हाथ से लिखी चिट्ठी भेजी है। यह जानकारी 1 जनवरी 2026 को ममदानी के मेयर पद की शपथ लेने के बाद सामने आई, जिससे यह पत्र अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बन गया है।

भारतीय मूल के मुस्लिम नेता जोहरान ममदानी की यह पहल उमर खालिद के प्रति समर्थन और सहानुभूति के संदेश के रूप में देखी जा रही है। इसे नागरिक अधिकारों, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और न्याय की वैश्विक वकालत के रूप में भी देखा जा रहा है।

चिट्ठी में क्या लिखा?

जोहरान ममदानी ने अपने पत्र में लिखा,
“प्रिय उमर, मैं अक्सर तुम्हारे उन शब्दों को याद करता हूं जिनमें कड़वाहट को खुद पर हावी न होने देने की बात थी। तुम्हारे माता-पिता से मिलकर खुशी हुई। हम सब तुम्हारे बारे में सोच रहे हैं।”

यह नोट दिसंबर 2025 में लिखा गया था, जब उमर खालिद के माता-पिता अमेरिका यात्रा पर गए थे। उमर की साथी बनोज्योत्सना लाहिड़ी ने इस चिट्ठी को सोशल मीडिया पर साझा किया, जिसके बाद यह सार्वजनिक हुई और ममदानी के समर्थन का संदेश स्पष्ट रूप से सामने आया।

पुरानी दोस्ती और समर्थन

यह पहला मौका नहीं है जब जोहरान ममदानी ने उमर खालिद के समर्थन में आवाज उठाई हो। वर्ष 2023 में न्यूयॉर्क में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने उमर की जेल से लिखी चिट्ठी को सार्वजनिक रूप से पढ़ा था। उस समय ममदानी ने उमर को नफरत और लिंचिंग के खिलाफ मजबूती से आवाज उठाने वाला बताया था। मेयर बनने के बाद भी उनका यह रुख कायम रहना, उमर के प्रति निरंतर समर्थन का संकेत देता है।

जेल और जमानत का मामला

उमर खालिद वर्ष 2020 से दिल्ली दंगों से जुड़े कथित मामले में यूएपीए के तहत जेल में बंद हैं। दिसंबर 2025 में उन्हें बहन की शादी के लिए अंतरिम जमानत मिली थी। इस दौरान वे अधिकतर समय परिवार के साथ घर पर रहे, लेकिन शर्तों के कारण सार्वजनिक कार्यक्रमों में शामिल नहीं हो सके। शादी के बाद वे पुनः जेल लौट गए।

अमेरिका से उठ रही न्याय की आवाज

इसी बीच अमेरिकी सांसद जेम्स पी. मैकगवर्न सहित आठ सांसदों ने भारत के राजदूत को पत्र लिखकर उमर खालिद और अन्य मुस्लिम एक्टिविस्ट्स की लंबी हिरासत पर चिंता जताई है। उन्होंने निष्पक्ष जांच, शीघ्र ट्रायल या रिहाई की प्रक्रिया सुनिश्चित करने की मांग की है।

यह घटनाक्रम दर्शाता है कि उमर खालिद का मामला अब केवल भारत तक सीमित नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार विमर्श का हिस्सा बनता जा रहा है।