डिजिटल लेन-देन पर MDR का भार व्यापारियों पर डालना अनुचित: चेम्बर प्रदेश अध्यक्ष सतीश थौरानी
छत्तीसगढ़ चेम्बर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज ने डिजिटल लेन-देन पर लागू MDR शुल्क को लेकर चिंता जताई है। चेम्बर प्रदेश अध्यक्ष सतीश थौरानी ने कहा कि डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने में व्यापारियों की महत्वपूर्ण भूमिका रही है, ऐसे में लेन-देन से जुड़े शुल्क का वित्तीय भार व्यापारियों पर डालना उचित नहीं है। चेम्बर ने केंद्र सरकार और वित्त मंत्रालय से व्यापारियों के लिए सभी UPI लेन-देन पर MDR शुल्क शून्य करने तथा डिजिटल पेमेंट इंफ्रास्ट्रक्चर की लागत सरकार और बैंकों द्वारा वहन करने की मांग की है। संगठन ने इस संबंध में केंद्रीय नेतृत्व और NPCI को ज्ञापन सौंपने की बात कही है।
UNITED NEWS OF ASIA. अमृतेश्वर सिंह, रायपुर l छत्तीसगढ़ चेम्बर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज ने डिजिटल लेन-देन पर MDR शुल्क को लेकर चिंता व्यक्त की है। चेम्बर प्रदेश अध्यक्ष सतीश थौरानी ने हाल ही में UPI लेन-देन शुल्क को लेकर सामने आए आधिकारिक बयान का उल्लेख करते हुए कहा कि डिजिटल भुगतान व्यवस्था में उपभोक्ताओं के लिए लेन-देन को शून्य शुल्क पर बनाए रखने के साथ व्यापारियों पर अतिरिक्त वित्तीय भार डालना उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने में देश के व्यापारी वर्ग ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है और व्यापारियों को भी इससे जुड़े शुल्क के संबंध में राहत मिलनी चाहिए।
सतीश थौरानी के अनुसार वर्तमान समय में खुदरा और थोक व्यापार सीमित लाभ मार्जिन के साथ संचालित हो रहा है। ऐसे में डिजिटल लेन-देन से जुड़े किसी भी अतिरिक्त शुल्क का सीधा प्रभाव व्यापारियों की लागत पर पड़ता है। उन्होंने कहा कि डिजिटल इंडिया और कैशलेस अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने के उद्देश्य से व्यापारियों ने बड़े स्तर पर डिजिटल भुगतान प्रणालियों को अपनाया है। चेम्बर का कहना है कि डिजिटल भुगतान व्यवस्था के संचालन से जुड़ी लागत का पूरा भार व्यापारिक वर्ग पर नहीं डाला जाना चाहिए।
चेम्बर प्रदेश अध्यक्ष ने 0.4 प्रतिशत शुल्क अथवा 300 रुपये तक की कैपिंग का उल्लेख करते हुए कहा कि इस तरह का शुल्क व्यापारियों के लिए अतिरिक्त वित्तीय भार बन सकता है। उन्होंने कहा कि एक तरफ डिजिटल अर्थव्यवस्था को प्रोत्साहित करने की बात की जाती है, वहीं दूसरी ओर डिजिटल भुगतान के संचालन से संबंधित खर्च व्यापारियों से वसूला जाता है तो इससे व्यापारिक समुदाय की लागत बढ़ सकती है। चेम्बर ने इस व्यवस्था पर पुनर्विचार किए जाने की मांग की है।
छत्तीसगढ़ चेम्बर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज ने केंद्र सरकार और वित्त मंत्रालय के समक्ष दो प्रमुख मांगें रखी हैं। पहली मांग है कि व्यापारियों के लिए भी सभी UPI लेन-देन पर MDR शुल्क पूरी तरह शून्य यानी 0 प्रतिशत रखा जाए। दूसरी मांग डिजिटल पेमेंट इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास और संचालन से संबंधित खर्च को लेकर है। चेम्बर का कहना है कि इस खर्च का वहन बैंकों और सरकार द्वारा किया जाना चाहिए तथा इसे सीधे व्यापारिक वर्ग पर नहीं डाला जाना चाहिए।
चेम्बर ने कहा है कि डिजिटल भुगतान व्यवस्था आज व्यापार का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुकी है। छोटे दुकानदारों से लेकर बड़े व्यापारिक प्रतिष्ठानों तक डिजिटल भुगतान का उपयोग लगातार किया जा रहा है। ऐसे में व्यापारियों पर लगने वाले शुल्क और उसकी दरों को लेकर स्पष्ट और व्यापारी हितैषी व्यवस्था आवश्यक है। संगठन का कहना है कि इससे व्यापारियों को डिजिटल भुगतान अपनाने में सुविधा मिलेगी और डिजिटल अर्थव्यवस्था को भी बढ़ावा मिलेगा।
छत्तीसगढ़ चेम्बर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज ने इस मुद्दे को आगे केंद्रीय स्तर पर उठाने की बात कही है। संगठन के अनुसार जल्द ही केंद्रीय नेतृत्व और NPCI यानी भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम को इस विषय पर विस्तृत ज्ञापन सौंपा जाएगा। ज्ञापन के माध्यम से व्यापारियों के लिए UPI लेन-देन पर MDR शुल्क शून्य रखने और डिजिटल भुगतान से जुड़ी आधारभूत व्यवस्था की लागत को व्यापारियों पर नहीं डालने की मांग रखी जाएगी। प्रेस विज्ञप्ति प्रदेश महामंत्री अजय भसीन की ओर से जारी की गई है।