"जब गलियां कीचड़ में हों और वार्ड अंधेरे में तुलसी (नेवरा) तो विकास की गाथा आखिर किसके लिए?"
UNITED NEWS OF ASIA. अशोक मिश्रा, तिल्दा - नेवरा l ग्राम पंचायत तुलसी (नेवरा) में विकास के दावों और जमीनी हकीकत के बीच बड़ा अंतर दिखाई देने का आरोप ग्रामीण लगा रहे हैं। एक ओर पंचायत में 31 दुकानों के आवंटन और नए विकास कार्यों की चर्चा हो रही है, वहीं दूसरी ओर गांव के कई वार्डों और गलियों की बदहाल स्थिति लोगों के लिए परेशानी का कारण बनी हुई है।
ग्रामीणों का कहना है कि पंचायत की कई गलियां कीचड़ से लबालब हैं, जिससे पैदल चलना भी मुश्किल हो गया है। बारिश के दिनों में हालात और खराब हो जाते हैं। वहीं कई वार्डों में बिजली के खंभों पर लगी स्ट्रीट लाइटें खराब या टूटी हुई हैं, जिससे रात के समय गलियां अंधेरे में डूबी रहती हैं। इससे लोगों को आवागमन में परेशानी के साथ सुरक्षा को लेकर भी चिंता बनी रहती है।
इसी बीच पंचायत द्वारा 31 दुकानों के आवंटन की प्रक्रिया भी चर्चा का विषय बनी हुई है। ग्रामीण सवाल उठा रहे हैं कि यदि पंचायत विकास की नई इबारत लिखने का दावा कर रही है, तो गांव की मूलभूत समस्याओं का समाधान पहले क्यों नहीं किया जा रहा है।
ग्रामीणों ने गोठान में हुए वृक्षारोपण अभियान पर भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि पौधरोपण की तस्वीरें और कागजी रिकॉर्ड तो बने, लेकिन मौके पर न तो पर्याप्त पौधे दिखाई दे रहे हैं और न ही उनके संरक्षण की व्यवस्था नजर आती है। लोगों ने वृक्षारोपण पर हुए खर्च और उसकी वर्तमान स्थिति की भी जांच की मांग की है।
ग्रामीणों का कहना है कि पंचायत पहले गांव की सड़क, नाली, स्ट्रीट लाइट और अन्य मूलभूत सुविधाओं को दुरुस्त करे, ताकि विकास के दावे धरातल पर भी दिखाई दें। अब लोगों की निगाहें संबंधित अधिकारियों और जिला प्रशासन पर टिकी हैं कि इन समस्याओं के समाधान के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं।