तमनार दोहरे हत्याकांड में चार दोषियों को आजीवन कारावास, विशेष न्यायालय ने सुनाया फैसला

रायगढ़ जिले के तमनार थाना क्षेत्र में वर्ष 2023 में हुए चर्चित दोहरे हत्याकांड में विशेष न्यायालय ने चार आरोपियों को दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। न्यायालय ने हत्या, साक्ष्य मिटाने की साजिश और एससी-एसटी अत्याचार निवारण अधिनियम के तहत दोषसिद्धि दर्ज की।

Aug 2, 2026 - 11:17
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तमनार दोहरे हत्याकांड में चार दोषियों को आजीवन कारावास, विशेष न्यायालय ने सुनाया फैसला

UNITED NEWS OF ASIA. महेंद्र अग्रवाल, रायगढ़ l रायगढ़ जिले के तमनार थाना क्षेत्र में वर्ष 2023 में हुए चर्चित दोहरे हत्याकांड में विशेष न्यायाधीश, अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, रायगढ़ की अदालत ने चार आरोपियों को दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। 31 जुलाई 2026 को पारित निर्णय में न्यायालय ने हत्या, साक्ष्य मिटाने की साजिश और एससी-एसटी अत्याचार निवारण अधिनियम के तहत आरोप सिद्ध होने पर यह फैसला सुनाया।

अभियोजन के अनुसार 19 जुलाई 2023 की रात लगभग 10:30 बजे ग्राम गोढ़ी, थाना तमनार क्षेत्र में पुरानी रंजिश के चलते आरोपियों ने पूर्व नियोजित षड्यंत्र के तहत अनुसूचित जनजाति वर्ग के राघुवन चौहान और उद्धव चौहान पर टांगी, डंडे तथा अन्य कठोर हथियारों से हमला किया था। गंभीर चोटों के कारण दोनों की घटनास्थल पर ही मृत्यु हो गई। पुलिस के अनुसार घटना के बाद आरोपियों ने एक मृतक के शव को मुख्य सड़क तक घसीटकर मामले को सड़क दुर्घटना का रूप देने का भी प्रयास किया था।

घटना की सूचना मिलते ही तमनार पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की। प्रारंभिक विवेचना तत्कालीन थाना प्रभारी आशीर्वाद राहटगांवकर ने की। जांच के दौरान घटनास्थल से भौतिक और वैज्ञानिक साक्ष्य एकत्र किए गए, आरोपियों से पूछताछ की गई तथा उनके मेमोरेण्डम के आधार पर हत्या में प्रयुक्त हथियार और अन्य महत्वपूर्ण साक्ष्य बरामद किए गए। अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम के तहत आगे की विवेचना तत्कालीन एसडीओपी धरमजयगढ़ दीपक मिश्रा ने पूरी की। जांच के दौरान प्रत्यक्षदर्शी गवाहों के बयान धारा 164 के तहत दर्ज कराए गए और आवश्यक दस्तावेजी साक्ष्य संकलित कर मजबूत अभियोग पत्र न्यायालय में प्रस्तुत किया गया।

राज्य शासन की ओर से विशेष लोक अभियोजक राजीव बेरीवाल ने न्यायालय में प्रभावी पैरवी की। अभियोजन पक्ष ने 22 गवाहों के बयान, 81 दस्तावेजी साक्ष्य तथा 20 भौतिक साक्ष्य न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किए। उपलब्ध साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर न्यायालय ने चारों आरोपियों को दोषी माना।

दोषी ठहराए गए आरोपियों में हरिलाल उरांव, मुकेश पडिहारी, जितेन्द्र पटनायक उर्फ जीतू तथा गणेश पडिहारी शामिल हैं। सभी आरोपी ग्राम गोढ़ी, थाना तमनार, जिला रायगढ़ के निवासी हैं। न्यायालय ने भारतीय दंड संहिता की धारा 302/120-बी, 201/120-बी तथा अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम की धारा 3(2)(v) के तहत प्रत्येक आरोपी को दो-दो आजीवन कारावास तथा अर्थदंड की सजा सुनाई।

रायगढ़ पुलिस ने इस निर्णय को गंभीर अपराधों की वैज्ञानिक एवं तथ्यपरक विवेचना का परिणाम बताया है। पुलिस का कहना है कि भविष्य में भी गंभीर मामलों में मजबूत साक्ष्य संकलित कर न्यायालय में प्रभावी पैरवी सुनिश्चित की जाएगी, ताकि दोषियों को कानून के अनुसार कठोर दंड मिल सके।