जानकारी के अनुसार, कुत्तों ने तखतपुर नगर के अलावा भथरी और पचबहरा गांवों में भी लोगों को निशाना बनाया। अचानक हुए इन हमलों से लोग घबराकर इधर-उधर भागने लगे। कई लोगों को गंभीर चोटें आईं, जबकि छोटे बच्चों में डर का माहौल बन गया है।
घायलों को तत्काल तखतपुर से लगभग 7 किलोमीटर दूर स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती कराया गया। स्वास्थ्य केंद्र के रिकॉर्ड के अनुसार, गुरुवार को कुल 16 मरीज कुत्तों के काटने की शिकायत लेकर पहुंचे। सभी मरीजों को प्राथमिक उपचार के साथ एंटी-रेबीज वैक्सीन दी गई।
हालांकि, इस मामले में एक गंभीर समस्या भी सामने आई है। जिन मरीजों के घाव ज्यादा गहरे थे, उन्हें एंटी-रेबीज सीरम (RIG) की आवश्यकता थी, लेकिन अस्पताल में इसकी उपलब्धता नहीं थी। ऐसे में डॉक्टरों को मजबूरी में केवल वैक्सीन देकर मरीजों को वापस भेजना पड़ा। इससे स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं।
इस पूरे मामले पर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के डॉक्टर राज किरण शर्मा ने बताया कि सभी घायलों को आवश्यक प्राथमिक उपचार दिया गया है और एंटी-रेबीज इंजेक्शन लगाए गए हैं। उन्होंने कहा कि मरीजों की स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है।
वहीं दूसरी ओर, हमलावर कुत्तों को अब तक पकड़ा नहीं जा सका है। स्थानीय लोगों का कहना है कि एक से अधिक कुत्ते इस हमले में शामिल हैं, जो अभी भी इलाके में घूम रहे हैं और लोगों के लिए खतरा बने हुए हैं। इससे लोगों में भय का माहौल बना हुआ है।
स्थानीय प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग अब सतर्क हो गया है। लोगों को सावधानी बरतने की सलाह दी जा रही है, खासकर बच्चों को अकेले बाहर न जाने की हिदायत दी गई है। साथ ही, नगर प्रशासन से मांग की जा रही है कि आवारा कुत्तों को पकड़ने और इस समस्या का स्थायी समाधान निकालने के लिए जल्द कार्रवाई की जाए।
यह घटना एक बार फिर शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में बढ़ती आवारा पशुओं की समस्या को उजागर करती है। यदि समय रहते उचित कदम नहीं उठाए गए, तो ऐसे हादसे और बढ़ सकते हैं।
कुल मिलाकर, तखतपुर में हुई यह घटना न केवल स्वास्थ्य सुरक्षा की दृष्टि से गंभीर है, बल्कि प्रशासन के लिए भी एक चेतावनी है कि जनसुरक्षा के मुद्दों पर तुरंत और प्रभावी कार्रवाई आवश्यक है।