श्रमिक योजनाओं के लंबित आवेदनों को लेकर सुशील सन्नी अग्रवाल ने सरकार पर उठाए सवाल

छत्तीसगढ़ भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण मंडल के पूर्व अध्यक्ष सुशील सन्नी अग्रवाल ने श्रमिक कल्याण योजनाओं के लंबित आवेदनों को लेकर राज्य सरकार और श्रम विभाग पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने विभिन्न जिलों और योजनाओं के लंबित आवेदनों के आंकड़े सामने रखते हुए शीघ्र निराकरण की मांग की। श्रम विभाग की वेबसाइट पर भी श्रमिक पंजीयन, योजना आवेदन और उनकी स्थिति से संबंधित ऑनलाइन रिपोर्ट उपलब्ध हैं।

Sep 19, 2026 - 09:01
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श्रमिक योजनाओं के लंबित आवेदनों को लेकर सुशील सन्नी अग्रवाल ने सरकार पर उठाए सवाल

UNITED NEWS OF ASIA. अमृतेश्वर सिंह, रायपुर l छत्तीसगढ़ भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण मंडल के पूर्व अध्यक्ष सुशील सन्नी अग्रवाल ने प्रदेश में श्रमिक कल्याण योजनाओं के लंबित आवेदनों को लेकर राज्य सरकार और श्रम विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने एक बयान जारी कर आरोप लगाया कि बड़ी संख्या में श्रमिक योजनाओं के लाभ से वंचित हैं और लंबित आवेदनों के निराकरण की गति को लेकर सरकार को गंभीरता से काम करने की जरूरत है। छत्तीसगढ़ श्रम विभाग की आधिकारिक वेबसाइट पर भवन निर्माण और असंगठित श्रमिकों के पंजीयन तथा विभिन्न योजनाओं की आवेदन स्थिति से संबंधित रिपोर्ट उपलब्ध हैं।

अग्रवाल ने दावा किया कि पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार के दौरान छत्तीसगढ़ भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण मंडल के तहत लगभग 30 जनकल्याणकारी योजनाएं संचालित थीं और पंजीकृत श्रमिकों को इनका लाभ दिया जाता था। उन्होंने आरोप लगाया कि वर्तमान व्यवस्था में बड़ी संख्या में आवेदन लंबित हैं। उनके द्वारा जारी आंकड़ों में रायपुर जिले में 86,812, धमतरी में 80,009, दुर्ग में 43,556, महासमुंद में 22,346 और गरियाबंद में 26,194 आवेदन लंबित होने का दावा किया गया है। इन आंकड़ों की स्वतंत्र पुष्टि इस बयान के आधार पर नहीं की गई है।

सुशील सन्नी अग्रवाल ने योजना संबंधी आवेदनों को लेकर भी आंकड़े जारी किए। उन्होंने नौनिहाल छात्रवृत्ति योजना में 3,56,556 और बच्चों के गणवेश एवं पुस्तक-कॉपी से जुड़े 1,67,922 आवेदन सहित विभिन्न योजनाओं में कुल 6,10,310 आवेदन लंबित होने का दावा किया। उन्होंने कहा कि इतनी बड़ी संख्या में आवेदन लंबित रहने से पात्र श्रमिकों को योजनाओं का लाभ मिलने में परेशानी हो सकती है। वहीं श्रम विभाग की आधिकारिक योजना रिपोर्ट में अलग-अलग योजनाओं के लिए कुल आवेदन, लंबित, स्वीकृत, निरस्त और दस्तावेज अपूर्ण मामलों की अलग-अलग जानकारी उपलब्ध कराई जाती है।

अग्रवाल ने श्रम विभाग के अधिकारियों और चॉइस सेंटरों के बीच कथित मिलीभगत का आरोप भी लगाया। उन्होंने कहा कि श्रमिकों को आवेदन और योजनाओं के लाभ के लिए परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने ब्लॉक स्तर पर संचालित श्रम संसाधन केंद्रों की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और संबंधित अधिकारियों या विभाग का पक्ष इस बयान में उपलब्ध नहीं है।

ई-केवाईसी प्रक्रिया को लेकर भी अग्रवाल ने सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने दावा किया कि ई-केवाईसी के कारण कई श्रमिकों को योजनाओं का लाभ लेने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। दूसरी ओर, 17 सितंबर को राजनांदगांव में श्रम विभाग द्वारा व्हीएलई की बैठक आयोजित किए जाने की रिपोर्ट सामने आई, जिसमें पंजीकृत श्रमिकों के ई-केवाईसी को पारदर्शिता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से शुरू की गई प्रक्रिया बताया गया।

अग्रवाल ने सरकार से मांग की कि लंबित आवेदनों का जल्द निराकरण किया जाए और पात्र श्रमिकों को योजनाओं का लाभ सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि श्रमिकों की समस्याओं का समाधान नहीं हुआ तो कांग्रेस श्रमिकों के अधिकारों को लेकर आंदोलन करेगी। उनके बयान में सरकार और श्रम विभाग पर लगाए गए अन्य आरोप भी शामिल हैं, जिनकी स्वतंत्र पुष्टि इस रिपोर्ट में नहीं की गई है। आधिकारिक श्रम विभाग की वेबसाइट पर श्रमिक पंजीयन, योजना आवेदन, शिकायत और आवेदन की स्थिति जांचने की सुविधाएं उपलब्ध हैं।