रायपुर में जेंडर समानता और महिला सशक्तिकरण पर राज्य स्तरीय कार्यशाला, 67 जेंडर रिसोर्स सेंटर की भूमिका पर जोर

रायपुर के निमोरा स्थित SIRD में जेंडर समानता और महिला सशक्तिकरण पर राज्य स्तरीय कार्यशाला आयोजित हुई। विशेषज्ञों ने महिलाओं की सुरक्षा, आर्थिक आत्मनिर्भरता, जेंडर रिसोर्स सेंटरों की भूमिका और विभिन्न विभागों के समन्वय को मजबूत बनाने पर जोर दिया।

Jul 19, 2026 - 11:42
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रायपुर में जेंडर समानता और महिला सशक्तिकरण पर राज्य स्तरीय कार्यशाला, 67 जेंडर रिसोर्स सेंटर की भूमिका पर जोर

UNITED NEWS OF ASIA. रायपुर l रायपुर के SIRD, निमोरा में महिलाओं की सुरक्षा, सम्मान, न्याय और आर्थिक सशक्तिकरण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन (बिहान) और चैतन्य संस्था के संयुक्त तत्वावधान में "जेंडर नॉर्म्स, जेंडर रिसोर्स सेंटर (GRC) एवं सुदृढ़ीकरण" विषय पर एक दिवसीय राज्य स्तरीय कार्यशाला आयोजित की गई। कार्यशाला में जेंडर समानता को ग्रामीण विकास और आजीविका कार्यक्रमों से जोड़ने, जेंडर रिसोर्स सेंटरों को अधिक प्रभावी बनाने तथा विभिन्न विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने पर विस्तार से चर्चा हुई।

कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन और पौधारोपण के साथ हुआ। कार्यशाला में मिशन संचालक अश्विनी देवांगन, चैतन्य संस्था की एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर कल्पना पंत, SIRD की संयुक्त संचालक सीमा मिश्रा, लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासन अकादमी के एल.के. शर्मा, धमतरी की जेंडर मास्टर ट्रेनर सुलोचना साहू, कांकेर की जेंडर मास्टर ट्रेनर चैती रात्रे, उतई थाना (दुर्ग) की परामर्शदाता राधा बांधे सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी, विशेषज्ञ और महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में कार्यरत संस्थाओं के प्रतिनिधि शामिल हुए।

कार्यशाला में कल्पना पंत ने बताया कि वर्ष 2018 से राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (NRLM) के तहत जेंडर समानता कार्यक्रम संचालित किया जा रहा है। इसके सकारात्मक परिणामों के कारण छत्तीसगढ़ इस क्षेत्र में देश के अग्रणी राज्यों में शामिल हो गया है। उन्होंने कहा कि महिलाओं का वास्तविक सशक्तिकरण केवल आर्थिक आत्मनिर्भरता तक सीमित नहीं है, बल्कि उन्हें निर्णय लेने का अधिकार और नेतृत्व के अवसर भी समान रूप से मिलने चाहिए।

उन्होंने जानकारी दी कि प्रदेश में वर्तमान में 67 जेंडर रिसोर्स सेंटर (GRC) संचालित हैं, जो महिलाओं को उनके अधिकारों की जानकारी, कानूनी सहायता, सरकारी योजनाओं तक पहुंच, परामर्श सेवाएं और सुरक्षा संबंधी सहयोग उपलब्ध करा रहे हैं। महिला एवं बाल विकास विभाग, पुलिस विभाग और राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के बेहतर समन्वय से इन केंद्रों को वन स्टॉप सखी सेंटर के उप-केंद्र के रूप में विकसित किया गया है।

धमतरी की जेंडर मास्टर ट्रेनर सुलोचना साहू ने बताया कि जेंडर रिसोर्स सेंटर घरेलू हिंसा और लैंगिक हिंसा से प्रभावित महिलाओं एवं बालिकाओं को समय पर परामर्श, कानूनी सहायता और आवश्यक विभागीय सहयोग उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। वहीं कांकेर की जेंडर मास्टर ट्रेनर चैती रात्रे ने कहा कि सामुदायिक स्तर पर प्रशिक्षण और क्षमता विकास कार्यक्रमों के माध्यम से महिलाओं तक प्रभावी सहायता पहुंचाई जा रही है।

उतई थाना की परामर्शदाता राधा बांधे ने पुलिस थानों में संचालित परामर्श सेवाओं की जानकारी देते हुए कहा कि पारिवारिक विवादों और महिलाओं से जुड़े मामलों का संवेदनशील समाधान प्राथमिकता के साथ किया जा रहा है। वहीं सीनियर रिसर्चर श्रेया सिंह ने जेंडर नॉर्म्स पर किए गए अध्ययन के प्रमुख निष्कर्ष प्रस्तुत करते हुए महिलाओं की निर्णय क्षमता, आर्थिक भागीदारी और संस्थागत सहयोग को और मजबूत बनाने की आवश्यकता बताई।

कार्यशाला में स्वास्थ्य सेवाओं की संचालक डॉ. स्मृति देवांगन ने महिलाओं और किशोरियों में एनीमिया, सुरक्षित मातृत्व, पोषण और मातृ मृत्यु दर कम करने के लिए चल रहे प्रयासों की जानकारी दी। शिक्षा विभाग के सहायक संचालक ओ.पी. चौधरी ने बालिका शिक्षा, कौशल विकास और ड्रॉपआउट रोकने को जेंडर समानता की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया। महिला एवं बाल विकास विभाग की विशेषज्ञ निशा गोस्वामी ने महिला हेल्पलाइन-181, सखी वन स्टॉप सेंटर, नवा बिहान योजना, शक्ति सदन और महतारी वंदन योजना जैसी विभिन्न सरकारी योजनाओं की जानकारी साझा की।

मुख्य अतिथि अश्विनी देवांगन ने कहा कि जेंडर रिसोर्स सेंटर महिलाओं तक समयबद्ध और संवेदनशील सहायता पहुंचाने का प्रभावी माध्यम बन चुके हैं। उन्होंने जेंडर मास्टर ट्रेनर्स से महिलाओं की वास्तविक समस्याओं तक पहुंचने, उन्हें संस्थागत सहायता उपलब्ध कराने और विभिन्न विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने का आह्वान किया।

कार्यक्रम के अंत में विभिन्न विभागों के प्रतिनिधियों और अतिथियों को स्मृति-चिह्न देकर सम्मानित किया गया। कार्यशाला में राज्य और जिला स्तर के अधिकारी, पुलिस परामर्शदाता, तकनीकी सहयोगी संस्थाओं के प्रतिनिधि तथा महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में कार्यरत संगठनों ने भाग लिया। आयोजन का संचालन सुधा कड़व ने किया।