शिवाय हॉस्पिटल कोरबा में 600 ग्राम के नन्हे योद्धा ने जीती जिंदगी की जंग, 90 दिन NICU में इलाज के बाद अब 2.070 किलो

कोरबा के शिवाय हॉस्पिटल में 25 सप्ताह के गर्भकाल में जन्मे महज 600 ग्राम वजन के अति-प्रीमैच्योर नवजात ने करीब 90 दिनों तक NICU में विशेषज्ञ चिकित्सा निगरानी के बाद अब 2 किलो 70 ग्राम वजन हासिल कर लिया है। सर्वमंगला नगर निवासी विजय समर्थ और उनके परिवार के लिए चार साल के इंतजार के बाद मिली यह खुशी बेहद चुनौतीपूर्ण दौर से गुजरी। डॉक्टरों और NICU टीम की लगातार निगरानी और उपचार के बाद बच्चे की स्थिति में सुधार हुआ और अब उसे डिस्चार्ज किए जाने की तैयारी है।

Sep 21, 2026 - 11:25
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शिवाय हॉस्पिटल कोरबा में 600 ग्राम के नन्हे योद्धा ने जीती जिंदगी की जंग, 90 दिन NICU में इलाज के बाद अब 2.070 किलो

UNITED NEWS OF ASIA. राहुल गुप्ता, कोरबा l कोरबा के शिवाय हॉस्पिटल में 25 सप्ताह के गर्भकाल में जन्मे महज 600 ग्राम वजन के एक अति-प्रीमैच्योर नवजात ने करीब 90 दिनों तक NICU में उपचार और विशेषज्ञ चिकित्सा निगरानी के बाद जिंदगी की कठिन चुनौती का सामना किया। 15 जून 2026 की रात गंभीर और आपात स्थिति में अस्पताल पहुंची गर्भवती महिला की करीब 2:20 बजे डिलीवरी हुई। जन्म के समय बच्चे का वजन केवल 600 ग्राम था। नवजात को तत्काल NICU में भर्ती कर विशेष देखभाल शुरू की गई। करीब तीन महीने के उपचार के बाद 19 सितंबर तक बच्चे का वजन बढ़कर 2 किलो 70 ग्राम हो गया और अब उसे डिस्चार्ज किए जाने की तैयारी है।

सर्वमंगला नगर निवासी विजय समर्थ और उनकी पत्नी करीब चार वर्षों से अपने घर में बच्चे की किलकारी का इंतजार कर रहे थे। लंबे इंतजार के बाद जब परिवार में खुशियां आईं तो बच्चे के समय से पहले जन्म लेने और बेहद कम वजन के कारण परिवार के सामने गंभीर चुनौती खड़ी हो गई। 15 जून की रात गर्भवती महिला को आपात स्थिति में शिवाय हॉस्पिटल लाया गया। गर्भकाल महज 25 सप्ताह होने के कारण अस्पताल की टीम ने तत्काल जांच और आवश्यक चिकित्सा प्रक्रिया शुरू की। डॉक्टरों की निगरानी में डिलीवरी हुई और जन्म के बाद बच्चे को विशेष नवजात देखभाल के लिए NICU में भर्ती किया गया।

600 ग्राम वजन के इस अति-प्रीमैच्योर नवजात को करीब 90 दिनों तक विशेषज्ञ चिकित्सा निगरानी में रखा गया। इस दौरान बच्चे को विशेष नवजात देखभाल, श्वसन सहायता, नियंत्रित तापमान और लगातार स्वास्थ्य निगरानी की आवश्यकता रही। Paediatric विशेषज्ञ डॉ. नागेंद्र बागरी सहित NICU टीम ने बच्चे की स्थिति पर लगातार नजर रखी। उपचार के दौरान बच्चे की सेहत में धीरे-धीरे सुधार हुआ और उसका वजन भी बढ़ता गया।

नवजात की देखरेख में RMO डॉ. प्रवीण और डॉ. बरखा की भी महत्वपूर्ण भूमिका रही। टीम द्वारा लगातार बच्चे की स्थिति की निगरानी की गई। डॉ. प्रवीण के अनुसार, बेहतर उपचार उपलब्ध कराना और मरीज को स्वस्थ जीवन की ओर ले जाने का प्रयास चिकित्सा टीम का उद्देश्य रहा। लगातार निगरानी और उपचार के दौरान बच्चे की स्थिति में सुधार दर्ज किया गया।

बच्चे के पिता विजय समर्थ ने इस पूरे सफर को परिवार के लिए बेहद कठिन बताया। उनका कहना है कि जन्म के समय जब उन्होंने पहली बार बच्चे को देखा तो वह बेहद छोटा और नाजुक था। उस समय परिवार की चिंता बढ़ गई थी। हालांकि अस्पताल के डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ ने बच्चे के उपचार के साथ परिवार को भी लगातार हिम्मत दी। करीब तीन महीने तक चले उपचार और निगरानी के बाद बच्चे की स्थिति में लगातार सुधार होता गया।

15 जून को जन्म के समय 600 ग्राम वजन वाले बच्चे का वजन 19 सितंबर तक बढ़कर 2 किलो 70 ग्राम हो गया। परिवार के लिए वजन में यह बढ़ोतरी लंबे इंतजार और चिंता के बाद मिली राहत का कारण बनी है। अस्पताल प्रबंधन के अनुसार बच्चे की स्थिति में लगातार सुधार हुआ है और अब उसे डिस्चार्ज किए जाने की तैयारी की जा रही है।

शिवाय हॉस्पिटल की NICU टीम के लिए भी यह मामला चुनौतीपूर्ण नवजात देखभाल का उदाहरण रहा। 600 ग्राम जैसे बेहद कम वजन वाले अति-प्रीमैच्योर नवजात को लगातार विशेषज्ञ निगरानी और विशेष चिकित्सा देखभाल की आवश्यकता होती है। डॉ. नागेंद्र बागरी, डॉ. बरखा, RMO डॉ. प्रवीण और NICU टीम की निरंतर निगरानी के बीच बच्चे की स्थिति में सुधार हुआ। करीब 90 दिनों के उपचार के बाद अब परिवार अपने बच्चे को घर ले जाने की तैयारी कर रहा है।