सेवा संकल्प अभियान से सशक्तिकरण की ओर बढ़ रही महिलाओं और परिवारों की जिंदगी, योजनाओं से मिल रहा संबल

छत्तीसगढ़ में सेवा संकल्प अभियान के माध्यम से शासन की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं के लाभ से महिलाओं, बच्चों और जरूरतमंद परिवारों के जीवन में बदलाव की कहानियां सामने आ रही हैं। महतारी वंदन योजना से महिलाओं को आर्थिक सहयोग, सखी वन स्टॉप सेंटर से संकट के समय सहायता, मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना से विवाह में आर्थिक संबल, महिला समृद्धि योजना से स्वरोजगार और प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना से मातृत्व के दौरान सहायता मिल रही है। कुपोषण से जूझ रहे बच्चों के लिए पोषण प्रबंधन भी अभियान का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

Sep 17, 2026 - 15:21
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सेवा संकल्प अभियान से सशक्तिकरण की ओर बढ़ रही महिलाओं और परिवारों की जिंदगी, योजनाओं से मिल रहा संबल

UNITED NEWS OF ASIA. अमृतेश्वर सिंह, रायपुर l छत्तीसगढ़ में जनसेवा को केवल सरकारी योजनाओं और कार्यक्रमों तक सीमित न रखकर उसे लोगों के जीवन में बदलाव से जोड़ने की पहल की जा रही है। सेवा संकल्प अभियान इसी सोच के साथ आगे बढ़ रहा है। अभियान के माध्यम से शासन की विभिन्न योजनाओं से लाभान्वित महिलाओं, बच्चों और परिवारों की ऐसी कहानियों को सामने लाया जा रहा है, जिनमें आर्थिक सहयोग, सुरक्षा, स्वास्थ्य और आत्मनिर्भरता के अवसर दिखाई देते हैं। इन योजनाओं का उद्देश्य जरूरतमंद लोगों तक सहायता पहुंचाने के साथ उन्हें आगे बढ़ने का अवसर देना है।

महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण के लिए महतारी वंदन योजना के तहत पात्र महिलाओं को प्रतिमाह 1,000 रुपये की सहायता सीधे बैंक खातों में दी जा रही है। लेख में दिए गए आंकड़ों के अनुसार अब तक 31 किश्तों में 68 लाख से अधिक महिलाओं को 20 हजार करोड़ रुपये से अधिक की राशि प्रदान की जा चुकी है। जांजगीर-चांपा की उर्मिला यादव ने योजना से मिली राशि बचाकर आर्टिफिशियल गहनों का व्यवसाय शुरू किया। इसी जिले की ज्योति कसेर ने पापड़ व्यवसाय शुरू किया, जबकि सुमित्रा कर्ष ने श्रृंगार सामग्री की दुकान और कुसुम देवी पाण्डेय ने अपनी दुकान का विस्तार किया।

कबीरधाम की सतरूपा गंधर्व योजना की राशि का उपयोग बच्चों की पढ़ाई, घरेलू जरूरतों और बचत के लिए कर रही हैं। वहीं कोंडागांव की श्यामबती कोर्राम अपनी बेटियों के भविष्य के लिए सुकन्या समृद्धि योजना में राशि जमा कर रही हैं और परिवार के पौष्टिक आहार की जरूरत पूरी कर रही हैं। ये उदाहरण बताते हैं कि आर्थिक सहायता का उपयोग परिवारों की तत्काल जरूरतों के साथ भविष्य की योजनाओं में भी किया जा सकता है।

महिला सुरक्षा के लिए प्रदेश के सभी 33 जिलों में 42 सखी वन स्टॉप सेंटर संचालित होने की जानकारी दी गई है। घरेलू हिंसा, उत्पीड़न या अन्य संकट की परिस्थितियों में महिलाओं को इन केंद्रों पर कानूनी सहायता, चिकित्सकीय सुविधा, मनोवैज्ञानिक परामर्श और अस्थायी आश्रय जैसी सेवाएं उपलब्ध कराई जाती हैं। वहीं मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना के तहत अब तक 24,336 बालिकाओं का सामूहिक विवाह कराया गया है और प्रत्येक जोड़े के लिए 50 हजार रुपये की सहायता का प्रावधान बताया गया है।

महिला समृद्धि योजना के माध्यम से भी महिला समूहों को स्वरोजगार और आजीविका गतिविधियों से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। लेख के अनुसार अब तक 42,878 महिला समूहों को 129.46 करोड़ रुपये का रियायती ऋण उपलब्ध कराया गया है। इससे समूह आधारित छोटे व्यवसायों और आजीविका गतिविधियों को आगे बढ़ाने में सहायता मिल रही है।

मातृत्व और बाल स्वास्थ्य के क्षेत्र में प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना के तहत पात्र महिलाओं को आर्थिक सहायता दी जा रही है। कबीरधाम की संजू तिवारी को पहली संतान के जन्म पर 5 हजार रुपये और दूसरी संतान बालिका होने पर 6 हजार रुपये की सहायता मिली। उन्होंने राशि का उपयोग पोषण और स्वास्थ्य संबंधी जरूरतों में किया। वहीं मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी की हिमांशी कोवाची विशेष पोषण प्रबंधन के बाद अति गंभीर कुपोषण की स्थिति से सामान्य श्रेणी में पहुंची। इन उदाहरणों के जरिए सेवा संकल्प अभियान योजनाओं को केवल आंकड़ों के बजाय लोगों के जीवन में आए बदलावों से जोड़कर देखने का प्रयास कर रहा है।