अंबिकापुर पहुंचे भूपेश बघेल, झीरम घाटी मामले पर बोले- सजा हुई, लेकिन न्याय अभी बाकी
संभाग स्तरीय कांग्रेस प्रशिक्षण शिविर में शामिल होने पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल सरगुजा पहुंचे। इस दौरान उन्होंने मुख्यमंत्री विष्णु देव साय को आमने-सामने बहस की चुनौती देने की बात कही। झीरम घाटी मामले में 16 सितंबर 2026 को जगदलपुर की विशेष NIA अदालत ने 10 दोषियों को मृत्युदंड सुनाया। बघेल ने अदालत के फैसले का सम्मान करते हुए कहा कि उनके अनुसार मामले में न्याय के कुछ अन्य पहलुओं की जांच अभी बाकी है।
UNITED NEWS OF ASIA. आकाश सोनकर, अंबिकापुर l पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल संभाग स्तरीय कांग्रेस प्रशिक्षण शिविर में शामिल होने के लिए सरगुजा दौरे पर पहुंचे। अंबिकापुर में आयोजित कार्यक्रम के दौरान उन्होंने प्रदेश की मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों और झीरम घाटी मामले को लेकर अपनी बात रखी। बघेल ने मुख्यमंत्री विष्णु देव साय को आमने-सामने बहस की चुनौती देने की बात भी कही। उनके दौरे के दौरान कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं के साथ उनकी मुलाकातों का दौर भी चला।
सरगुजा प्रवास के दौरान भूपेश बघेल ने पूर्व उपमुख्यमंत्री टीएस सिंहदेव से भी मुलाकात की। दोनों नेताओं के बीच लंबे समय तक बातचीत हुई। इस मुलाकात को लेकर कांग्रेस कार्यकर्ताओं और राजनीतिक हलकों में चर्चा रही। प्रशिक्षण शिविर में संगठनात्मक विषयों पर भी चर्चा की गई और पार्टी कार्यकर्ताओं को आगामी राजनीतिक गतिविधियों को लेकर मार्गदर्शन दिया गया।
इसी दौरान झीरम घाटी मामले में आए अदालत के फैसले पर भी भूपेश बघेल ने प्रतिक्रिया दी। 16 सितंबर 2026 को जगदलपुर की विशेष NIA अदालत ने 2013 के झीरम घाटी हमले के मामले में दोषी ठहराए गए 10 लोगों को मृत्युदंड की सजा सुनाई। इससे पहले 5 सितंबर को अदालत ने इन आरोपियों को दोषी करार दिया था। यह मामला 25 मई 2013 को कांग्रेस की परिवर्तन यात्रा के दौरान हुए हमले से जुड़ा है। विभिन्न रिपोर्टों के अनुसार इस घटना में कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं और सुरक्षाकर्मियों समेत बड़ी संख्या में लोगों की मौत हुई थी।
अदालत के फैसले पर भूपेश बघेल ने कहा कि वह न्यायालय के निर्णय का सम्मान करते हैं, लेकिन उनके अनुसार झीरम घाटी मामले में अभी पूरा न्याय नहीं हुआ है। उन्होंने जांच के दायरे और हमले की कथित साजिश से जुड़े अन्य पहलुओं को लेकर सवाल उठाए। बघेल का कहना है कि केवल दोषियों को सजा मिलने से उन सभी सवालों का जवाब नहीं मिलता, जिन्हें वे मामले से जुड़ा मानते हैं। यह उनके द्वारा व्यक्त किया गया राजनीतिक और कानूनी दृष्टिकोण है।
बघेल ने अपने मुख्यमंत्री कार्यकाल के दौरान गठित एसआईटी का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार ने झीरम घाटी मामले की जांच के लिए एसआईटी बनाई थी और पूछताछ की प्रक्रिया शुरू हुई थी। उन्होंने यह भी कहा कि NIA जांच के चलते एसआईटी की जांच को लेकर कानूनी स्थिति बनी थी और तत्कालीन सरकार ने इस विषय में हाईकोर्ट तथा सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था।
पूर्व मुख्यमंत्री ने सुरक्षा व्यवस्था और कथित साजिश से जुड़े पहलुओं की जांच पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि घटना के समय मौके पर कांग्रेस नेताओं, कार्यकर्ताओं और सुरक्षाकर्मियों की मौजूदगी थी और जांच में हमले में बड़ी संख्या में माओवादियों की भूमिका सामने आई थी। बघेल ने सवाल किया कि अन्य संदिग्ध आरोपियों और बड़े माओवादी नेताओं की भूमिका की जांच किस स्तर तक हुई। उन्होंने कहा कि उनके अनुसार सुरक्षा व्यवस्था से जुड़े अधिकारियों और घटना से जुड़े सभी पहलुओं की जांच स्पष्ट रूप से सामने आनी चाहिए। दूसरी ओर, मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने अदालत के फैसले को न्याय की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया है।