भारी स्कूल बैग से बच्चों की सेहत पर असर, बाल आयोग ने बस्ते का वजन तय करने की अनुशंसा की

छत्तीसगढ़ राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने स्कूली बच्चों को भारी बस्तों के बोझ से राहत दिलाने के लिए स्कूल शिक्षा विभाग को महत्वपूर्ण अनुशंसाएं भेजी हैं। NEP 2020 और NCERT की स्कूल बैग पॉलिसी 2020 के अनुरूप कक्षा के अनुसार बस्ते का वजन निर्धारित करने, छोटे बच्चों के लिए नो बैग पॉलिसी, बैगलेस डे और डिजिटल शिक्षण संसाधनों को बढ़ावा देने का सुझाव दिया गया है।

Oct 31, 2026 - 07:52
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भारी स्कूल बैग से बच्चों की सेहत पर असर, बाल आयोग ने बस्ते का वजन तय करने की अनुशंसा की

UNITED NEWS OF ASIA. अमृतेश्वर सिंह, रायपुर l स्कूली बच्चों को भारी स्कूल बैग के बोझ से राहत दिलाने और उनके शारीरिक एवं मानसिक स्वास्थ्य की सुरक्षा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से छत्तीसगढ़ राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने महत्वपूर्ण पहल की है। आयोग ने स्कूल शिक्षा विभाग को राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 और NCERT की स्कूल बैग पॉलिसी 2020 के अनुरूप बस्ते का वजन निर्धारित करने की अनुशंसा भेजी है। आयोग का मानना है कि बच्चों को उनकी उम्र और शारीरिक क्षमता के अनुरूप ही किताबों एवं शैक्षणिक सामग्री का बोझ दिया जाना चाहिए, ताकि उनके स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव न पड़े।

आयोग ने अपने अनुशंसा पत्र में उल्लेख किया है कि लगातार भारी बस्ता उठाने से बच्चों की रीढ़, कंधों और शारीरिक मुद्रा पर दीर्घकालिक प्रभाव पड़ सकता है। बच्चों की उम्र के साथ उनकी शारीरिक क्षमता का भी ध्यान रखना आवश्यक है। इसी को ध्यान में रखते हुए प्रो. यशपाल समिति की रिपोर्ट 'शिक्षा बिना बोझ के', NEP 2020 और NCERT की स्कूल बैग पॉलिसी 2020 के प्रावधानों का हवाला देते हुए सुझाव दिए गए हैं। इनमें बस्ते का वजन बच्चे के शरीर के कुल वजन के 10 प्रतिशत से अधिक नहीं रखने की बात कही गई है।

आयोग ने प्राथमिक स्तर पर नर्सरी से यूकेजी तक 'नो बैग, नो टेक्स्टबुक' व्यवस्था लागू करने की अनुशंसा की है। वहीं कक्षा पहली और दूसरी के बच्चों के लिए बस्ते का वजन 1.6 से 2.2 किलोग्राम तथा कक्षा तीसरी से पांचवीं तक 1.7 से 2.5 किलोग्राम तक सीमित रखने का सुझाव दिया गया है। इसके अलावा कक्षा पहली और दूसरी के बच्चों को होमवर्क नहीं देने की अनुशंसा भी की गई है, ताकि प्रारंभिक शिक्षा का अनुभव बोझिल होने के बजाय सहज और आनंददायक बन सके।

माध्यमिक स्तर पर आयोग ने कक्षा छठवीं और सातवीं के लिए बस्ते का वजन 2 से 3 किलोग्राम तथा कक्षा आठवीं के लिए 2.5 से 4 किलोग्राम तक रखने का प्रस्ताव दिया है। इसके साथ ही राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के पैरा 4.26 के अनुरूप वर्ष में 10 बैगलेस डे आयोजित करने की अनुशंसा की गई है। इन दिनों बच्चों को किताबी पढ़ाई के बजाय गतिविधि आधारित और व्यावहारिक शिक्षा से जोड़ने पर जोर दिया जा सकता है।

उच्चतर माध्यमिक स्तर पर कक्षा नौवीं और दसवीं के लिए 2.5 से 4.5 किलोग्राम तथा कक्षा ग्यारहवीं और बारहवीं के लिए 3.5 से 5 किलोग्राम तक बस्ते का वजन निर्धारित करने का सुझाव दिया गया है। भारी रेफरेंस पुस्तकों का बोझ कम करने के लिए DIKSHA और e-Pathshala जैसे डिजिटल शैक्षणिक संसाधनों के उपयोग को प्रोत्साहित करने की बात भी कही गई है।

संस्थागत स्तर पर आयोग ने प्रत्येक विद्यालय में डिजिटल तौल मशीन उपलब्ध कराने, बैग वेट रजिस्टर बनाए रखने, पुस्तकों पर उनके वजन का उल्लेख करने और बच्चों के लिए पेयजल की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित करने की अनुशंसा की है। आयोग ने शासन से इन सुझावों पर विचार कर सभी शासकीय, अनुदान प्राप्त और निजी विद्यालयों के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश जारी करने का अनुरोध किया है। अब इन अनुशंसाओं पर स्कूल शिक्षा विभाग और शासन की ओर से लिए जाने वाले निर्णय पर नजर रहेगी।