जुन्नारदेव में ग्यारस के बाद कोयला और रेत के कथित अवैध कारोबार के बड़े स्तर पर शुरू होने की आशंका, सुरंगों में कोयला खनन को बताया जानलेवा

जुन्नारदेव और गुढ़ी अंबाड़ा क्षेत्र में दीपावली और ग्यारस के बाद कोयला एवं रेत के कथित अवैध कारोबार के बड़े स्तर पर शुरू होने की आशंका जताई गई है। स्थानीय रिपोर्ट के अनुसार बारिश के दौरान रास्ते खराब होने से ये गतिविधियां सीमित रहती हैं, जबकि मौसम खुलने पर इनका संचालन फिर तेज हो जाता है। विशेष रूप से असुरक्षित सुरंगों के माध्यम से कोयला निकालने को गंभीर हादसों और जान के खतरे से जुड़ा बताया गया है।

Oct 30, 2026 - 19:23
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जुन्नारदेव में ग्यारस के बाद कोयला और रेत के कथित अवैध कारोबार के बड़े स्तर पर शुरू होने की आशंका, सुरंगों में कोयला खनन को बताया जानलेवा

UNITED NEWS OF ASIA. यज्ञराज पटेल, छिंदवाड़ा l क्षेत्र में बारिश का मौसम समाप्त होने और दीपावली एवं ग्यारस पर्व के बाद कोयला और रेत के कथित अवैध कारोबार के बड़े पैमाने पर शुरू होने की आशंका जताई जा रही है। स्थानीय स्तर पर सामने आई जानकारी के अनुसार फिलहाल कोयले का कारोबार छोटे स्तर पर संचालित होने की बात कही जा रही है। आरोप है कि बारिश के दौरान आवागमन के रास्ते खराब हो जाने के कारण इन गतिविधियों पर कुछ हद तक विराम लग जाता है, लेकिन मौसम खुलने के बाद कारोबार फिर सक्रिय हो जाता है।

स्थानीय रिपोर्ट के मुताबिक, जुन्नारदेव और गुढ़ी अंबाड़ा क्षेत्र में कोयला और रेत का कारोबार पिछले तीन से चार दशकों से अलग-अलग स्तर पर चलता आ रहा है। बताया जाता है कि बारिश के दौरान कच्चे रास्तों की स्थिति खराब होने से ट्रैक्टर और अन्य वाहनों की आवाजाही प्रभावित होती है। इसी वजह से लगभग तीन से चार महीने तक इन गतिविधियों में कमी आ जाती है। बारिश समाप्त होने, दीपावली और ग्यारस के बाद रास्तों को दुरुस्त करने तथा अन्य व्यवस्थाएं जुटाने के बाद कारोबार दोबारा बड़े स्तर पर शुरू होने की आशंका जताई गई है।

आठ से नौ महीने तक सक्रिय रहने का दावा

स्थानीय स्तर पर लगाए जा रहे आरोपों के अनुसार, बारिश का मौसम समाप्त होने के बाद कोयला और रेत से जुड़ी गतिविधियां अगले आठ से नौ महीने तक जारी रहती हैं। इस दौरान कथित रूप से बड़े पैमाने पर आर्थिक लेन-देन होता है। हालांकि इन कारोबारों की वास्तविक स्थिति, इसमें शामिल लोगों और कथित अवैध गतिविधियों की पुष्टि संबंधित विभागों की जांच के बाद ही हो सकती है। ऐसे में प्रशासन और खनन विभाग की भूमिका महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

सुरंगों में कोयला निकालना बन सकता है जानलेवा

क्षेत्र में कोयला निकालने के तरीके को लेकर सबसे गंभीर चिंता जताई गई है। रिपोर्ट में आरोप लगाया गया है कि कुछ लोग जमीन के ऊपर से कोयला निकालने के बाद अंदर की ओर सुरंग बनाकर खुदाई करते हैं। इन कथित गतिविधियों में सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम नहीं होने की बात कही गई है। ऐसी स्थिति में सुरंग धंसने से लोगों की जान जाने और गंभीर रूप से घायल होने का खतरा बना रहता है। स्थानीय रिपोर्ट में पूर्व में भी इस तरह की घटनाओं में मौत और लोगों के गंभीर रूप से घायल होने का दावा किया गया है। यह स्थिति अवैध खनन के साथ-साथ श्रमिकों की सुरक्षा को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े करती है।

हादसों के बाद कुछ समय के लिए रुकता है कारोबार

रिपोर्ट के अनुसार, जब भी सुरंग धंसने जैसी घटना होती है और जनहानि की खबर सामने आती है, तब क्षेत्र में कुछ समय के लिए इन गतिविधियों पर रोक लग जाती है। हालांकि आरोप है कि दो से तीन सप्ताह बाद कारोबार फिर शुरू हो जाता है। यदि यह स्थिति सही है, तो यह प्रशासनिक निगरानी और अवैध खनन पर नियंत्रण की प्रभावशीलता को लेकर सवाल खड़े करती है।

एसपी और भोपाल तक शिकायत करने की तैयारी

स्थानीय स्तर पर इस वर्ष दीपावली और ग्यारस के बाद कोयला एवं रेत के कथित अवैध कारोबार के दोबारा बड़े स्तर पर शुरू होने की स्थिति में पुलिस अधीक्षक से शिकायत करने की बात कही गई है। इसके बाद भोपाल तक मामला पहुंचाने की तैयारी भी जताई गई है। मांग की जा रही है कि अवैध खनन और उससे जुड़े कारोबार पर प्रभावी कार्रवाई की जाए, ताकि संभावित हादसों को रोका जा सके और प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण हो सके।