भारी स्कूल बैग से बच्चों की सेहत पर खतरा, बाल आयोग ने वजन सीमित करने की अनुशंसा की

छत्तीसगढ़ राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने स्कूली बच्चों को भारी बस्तों से राहत दिलाने के लिए स्कूल शिक्षा विभाग को अनुशंसा भेजी है। आयोग ने NEP 2020 और NCERT की स्कूल बैग पॉलिसी 2020 के अनुरूप नर्सरी से कक्षा 12वीं तक बस्ते का वजन निर्धारित करने, छोटे बच्चों को होमवर्क से राहत देने और साल में 10 बैगलेस डे आयोजित करने का सुझाव दिया है।

Oct 30, 2026 - 19:08
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भारी स्कूल बैग से बच्चों की सेहत पर खतरा, बाल आयोग ने वजन सीमित करने की अनुशंसा की

UNITED NEWS OF ASIA. अमृतेश्वर सिंह, रायपुर l स्कूली बच्चों के कंधों पर बढ़ते बस्तों के बोझ और इसके कारण उनके स्वास्थ्य पर पड़ने वाले संभावित प्रतिकूल प्रभाव को देखते हुए छत्तीसगढ़ राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने महत्वपूर्ण पहल की है। आयोग ने स्कूल शिक्षा विभाग को अनुशंसा भेजकर विद्यार्थियों के स्कूल बैग का वजन निर्धारित करने का सुझाव दिया है। आयोग का मानना है कि भारी बस्तों के कारण बच्चों की रीढ़, कंधों और शारीरिक मुद्रा पर दीर्घकालिक प्रभाव पड़ सकता है। इसी समस्या को ध्यान में रखते हुए प्रो. यशपाल समिति की रिपोर्ट 'शिक्षा बिना बोझ के', राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 (NEP 2020) और NCERT की 'स्कूल बैग पॉलिसी 2020' के प्रावधानों के अनुरूप सुझाव प्रस्तुत किए गए हैं।

आयोग ने अनुशंसा की है कि स्कूल बैग का वजन बच्चे के शरीर के कुल वजन के 10 प्रतिशत से अधिक नहीं होना चाहिए। इसके लिए अलग-अलग कक्षाओं के विद्यार्थियों के लिए वजन की सीमा प्रस्तावित की गई है। प्राथमिक स्तर पर नर्सरी से यूकेजी तक 'नो बैग, नो टेक्स्टबुक' व्यवस्था लागू करने का सुझाव दिया गया है। कक्षा 1 और 2 के विद्यार्थियों के लिए बस्ते का वजन 1.6 से 2.2 किलोग्राम तथा कक्षा 3 से 5 तक के विद्यार्थियों के लिए 1.7 से 2.5 किलोग्राम तक सीमित रखने की अनुशंसा की गई है। इसके साथ ही कक्षा 1 और 2 के बच्चों को होमवर्क नहीं देने का सुझाव भी शामिल है।

माध्यमिक स्तर पर कक्षा 6 और 7 के विद्यार्थियों के लिए स्कूल बैग का वजन 2 से 3 किलोग्राम तथा कक्षा 8 के लिए 2.5 से 4 किलोग्राम तक रखने का प्रस्ताव दिया गया है। आयोग ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के पैरा 4.26 का उल्लेख करते हुए प्रत्येक वर्ष 10 'बैगलेस डे' आयोजित करने की अनुशंसा की है। इसका उद्देश्य विद्यार्थियों को नियमित पुस्तकीय पढ़ाई के साथ अन्य गतिविधियों के माध्यम से सीखने के अवसर उपलब्ध कराना है।

उच्चतर कक्षाओं के लिए भी वजन की अलग-अलग सीमाएं प्रस्तावित की गई हैं। कक्षा 9 और 10 के विद्यार्थियों के लिए बस्ते का वजन 2.5 से 4.5 किलोग्राम तथा कक्षा 11 और 12 के लिए 3.5 से 5 किलोग्राम तक रखने का सुझाव दिया गया है। इसके अलावा भारी रेफरेंस बुक्स के स्थान पर DIKSHA और e-Pathshala जैसे डिजिटल शिक्षण संसाधनों के उपयोग को प्रोत्साहित करने की बात कही गई है।

संस्थागत स्तर पर आयोग ने प्रत्येक विद्यालय में डिजिटल तौल मशीन उपलब्ध कराने, बैग के वजन का रजिस्टर रखने, पुस्तकों पर उनके वजन का उल्लेख करने और विद्यार्थियों के लिए पेयजल की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित करने जैसे उपायों पर विचार करने की अनुशंसा की है। इन व्यवस्थाओं से स्कूलों में बच्चों के बस्तों के वजन की नियमित निगरानी संभव हो सकेगी।

आयोग ने शासन से अनुरोध किया है कि इन अनुशंसाओं पर विचार करते हुए प्रदेश के सभी शासकीय, अनुदान प्राप्त और निजी विद्यालयों के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश जारी करने पर विचार किया जाए। फिलहाल ये आयोग द्वारा भेजे गए सुझाव हैं। इन पर शासन की ओर से अंतिम निर्णय और दिशा-निर्देश जारी होना बाकी है। यदि अनुशंसाओं पर अमल किया जाता है, तो बच्चों को भारी बस्तों से राहत मिलने और पढ़ाई को अधिक सहज बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है।