स्कूलों में बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य को मिलेगा बढ़ावा, रायपुर में तीन दिवसीय मास्टर ट्रेनर्स प्रशिक्षण आयोजित

छत्तीसगढ़ में स्कूली बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य और मनोसामाजिक कल्याण को बढ़ावा देने के लिए रायपुर में 28 से 30 नवंबर तक तीन दिवसीय राज्य स्तरीय प्रशिक्षण आयोजित किया गया। यूनिसेफ ने समग्र शिक्षा के सहयोग से प्रशिक्षण आयोजित किया, जबकि TISS के SIMHA ने तकनीकी सहयोग दिया। बस्तर संभाग के सात जिलों और धमतरी से चयनित शिक्षक एवं व्याख्याता प्रशिक्षण लेकर अपने-अपने जिलों में अन्य शिक्षकों को प्रशिक्षित करेंगे।

Oct 30, 2026 - 19:18
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स्कूलों में बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य को मिलेगा बढ़ावा, रायपुर में तीन दिवसीय मास्टर ट्रेनर्स प्रशिक्षण आयोजित

UNITED NEWS OF ASIA. अमृतेश्वर सिंह, रायपुर l स्कूलों में बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य और मनोसामाजिक कल्याण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से राजधानी रायपुर में तीन दिवसीय राज्य स्तरीय मास्टर ट्रेनर्स प्रशिक्षण आयोजित किया गया। 28 से 30 नवंबर 2026 तक होटल सयाजी में आयोजित इस प्रशिक्षण का आयोजन यूनिसेफ ने समग्र शिक्षा के सहयोग से किया। वहीं, टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज (TISS) की स्कूल इनिशिएटिव फॉर मेंटल हेल्थ एडवोकेसी (SIMHA) ने तकनीकी साझेदार के रूप में सहयोग प्रदान किया।

प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य शिक्षकों और व्याख्याताओं की क्षमता को मजबूत करना था, ताकि वे स्कूलों में बच्चों को सुरक्षित, सहयोगपूर्ण और भरोसेमंद वातावरण उपलब्ध करा सकें। बच्चों के सीखने, शिक्षा और समग्र विकास में मानसिक एवं भावनात्मक स्वास्थ्य की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। खासतौर पर किशोरावस्था की शुरुआती अवधि बच्चों के विकास और सीखने का अहम चरण है। इस दौरान बच्चे कई तरह के शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक बदलावों से गुजरते हैं। ऐसे में शिक्षकों की भूमिका केवल पढ़ाई तक सीमित नहीं रहती, बल्कि बच्चों की भावनात्मक जरूरतों को समझना भी महत्वपूर्ण हो जाता है।

तीन दिवसीय प्रशिक्षण में प्रतिभागियों को बच्चों की भावनाओं को समझने और पहचानने, तनाव के संकेतों को जानने तथा उससे निपटने के सरल तरीके अपनाने की जानकारी दी गई। इसके साथ ही बच्चों की खूबियों और क्षमताओं को पहचानने एवं प्रोत्साहित करने, कक्षा में सकारात्मक माहौल बनाने और जरूरत पड़ने पर बच्चों को उचित सहायता सेवाओं से जोड़ने की प्रक्रिया यानी रेफरल के बारे में भी प्रशिक्षण दिया गया। कार्यक्रम में सहभागी और गतिविधि आधारित शिक्षण पद्धति अपनाई गई। इसमें समूह चर्चा, व्यावहारिक अभ्यास और प्रतिभागियों के अनुभवों के आदान-प्रदान पर विशेष जोर दिया गया।

इस प्रशिक्षण में बस्तर संभाग के सभी सात जिलों और धमतरी जिले से चयनित शिक्षकों एवं व्याख्याताओं ने हिस्सा लिया। प्रशिक्षण पूरा करने के बाद ये मास्टर ट्रेनर्स अपने-अपने जिलों में अन्य शिक्षकों को प्रशिक्षित करेंगे। इसके माध्यम से स्कूलों में बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य और मनोसामाजिक कल्याण से जुड़ी गतिविधियों को आगे बढ़ाया जाएगा। इसका उद्देश्य अधिक से अधिक स्कूलों में बच्चों के लिए सुरक्षित, सहयोगपूर्ण और सकारात्मक वातावरण तैयार करना है।

समग्र शिक्षा के उप संचालक कौशिक ने कहा कि वर्तमान समय में बच्चों के बीच प्रतिस्पर्धा बढ़ गई है। डॉक्टर और इंजीनियर बनने की चाह तथा पढ़ाई एवं करियर को लेकर बढ़ते दबाव के कारण बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य पर ध्यान देना बेहद जरूरी है। बच्चों को अनावश्यक दबाव से मुक्त रखते हुए उनकी रुचि और क्षमता के अनुसार भविष्य चुनने का अवसर मिलना चाहिए।

यूनिसेफ छत्तीसगढ़ फील्ड ऑफिस की प्रमुख सीमा कुमार ने कहा कि प्रत्येक बच्चे को स्कूल में सुरक्षित और सम्मानित महसूस होना चाहिए। मानसिक स्वास्थ्य एवं मनोसामाजिक सहयोग देखभाल की एक सतत प्रक्रिया है, जिसमें स्कूल, परिवार और समुदाय की संयुक्त भूमिका महत्वपूर्ण है। उन्होंने मातृभाषा को बच्चों में सुरक्षा, पहचान और अपनेपन की भावना विकसित करने का अहम माध्यम बताया।

वहीं, यूनिसेफ छत्तीसगढ़ के शिक्षा विशेषज्ञ रवि राज दयाल ने कहा कि बच्चों के सीखने के परिणामों में सुधार के साथ उनके मानसिक और भावनात्मक कल्याण पर भी समान रूप से ध्यान दिया जाना चाहिए। स्कूल केवल पढ़ाई के केंद्र नहीं, बल्कि बच्चों को सुरक्षा, स्थिरता और सहयोग देने वाले स्थान भी होने चाहिए। शिक्षकों की क्षमता मजबूत करना प्रत्येक बच्चे को सीखने और आगे बढ़ने का अवसर देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।