रायपुर में ‘क्रिएटिव वॉयसेज’ मीटअप: बच्चों के अधिकार और स्वास्थ्य के लिए एकजुट हुए 30 सोशल मीडिया क्रिएटर्स

रायपुर में आयोजित ‘क्रिएटिव वॉयसेज: ए मीटअप’ में 30 सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स, कलाकारों और कंटेंट क्रिएटर्स ने बच्चों के अधिकार, स्वास्थ्य और मानसिक कल्याण जैसे विषयों पर चर्चा की। यूनिसेफ छत्तीसगढ़ के विशेषज्ञों ने क्रिएटर्स से अपनी डिजिटल पहुंच और रचनात्मकता का उपयोग बच्चों से जुड़े मुद्दों पर जागरूकता बढ़ाने तथा समाज में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए करने की अपील की।

Oct 30, 2026 - 19:27
 0  8
रायपुर में ‘क्रिएटिव वॉयसेज’ मीटअप: बच्चों के अधिकार और स्वास्थ्य के लिए एकजुट हुए 30 सोशल मीडिया क्रिएटर्स

UNITED NEWS OF ASIA. अमृतेश्वर सिंह, रायपुर l बच्चों के अधिकार, स्वास्थ्य और उनके समग्र विकास से जुड़े मुद्दों पर जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से रायपुर में ‘क्रिएटिव वॉयसेज: ए मीटअप’ का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में 30 सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स, कलाकारों और डिजिटल कंटेंट क्रिएटर्स ने हिस्सा लिया। संवाद का मुख्य उद्देश्य रचनात्मक समुदाय को बच्चों से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों के प्रति जागरूक करना और सोशल मीडिया की ताकत के माध्यम से समाज में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए प्रेरित करना था।

कार्यक्रम की शुरुआत एक रोचक परिचय गतिविधि से हुई। इसमें प्रतिभागियों ने अपने बचपन की यादों और अनुभवों को साझा किया। इस गतिविधि के माध्यम से उन्होंने अपने बचपन के अनुभवों को आज के बच्चों की परिस्थितियों, आकांक्षाओं और चुनौतियों से जोड़कर समझने का प्रयास किया। इसके बाद बच्चों के अधिकार, स्वास्थ्य, मानसिक कल्याण और सामाजिक जिम्मेदारी जैसे विषयों पर चर्चा हुई।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए यूनिसेफ छत्तीसगढ़ के कम्युनिकेशन स्पेशलिस्ट अनिल गुलाटी और हेल्थ स्पेशलिस्ट डॉ. गजेंद्र सिंह ने सोशल मीडिया क्रिएटर्स को समाज के चेंजमेकर्स की भूमिका निभाने वाला बताया। उन्होंने कहा कि क्रिएटर्स की रचनात्मकता और डिजिटल प्लेटफॉर्म पर उनकी व्यापक पहुंच बच्चों से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों को समाज के सामने लाने में प्रभावी साबित हो सकती है।

अनिल गुलाटी ने चर्चा के दौरान बच्चों के सामने मौजूद चुनौतियों और उनसे जुड़े विषयों पर व्यापक संवाद विकसित करने की आवश्यकता बताई। उन्होंने प्रतिभागियों से एक समूह के रूप में काम करने, बच्चों के लिए महत्वपूर्ण मुद्दों की पहचान करने और अपनी रचनात्मकता के माध्यम से उन्हें सार्वजनिक विमर्श का हिस्सा बनाने की अपील की। उन्होंने कहा कि यूनिसेफ इस दिशा में तकनीकी जानकारी और विश्वसनीय तथ्यों के माध्यम से क्रिएटर्स को सहयोग दे सकता है, जिससे वे प्रमाण-आधारित जानकारी को प्रभावशाली डिजिटल कंटेंट में बदल सकें।

डॉ. गजेंद्र सिंह ने बाल स्वास्थ्य, शिशु मृत्यु दर और मानसिक स्वास्थ्य जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि इन मुद्दों का बच्चों के जीवन, विकास और भविष्य पर दीर्घकालिक प्रभाव पड़ता है। इसलिए समाज में इन विषयों को लेकर जागरूकता और तथ्यपरक संवाद को बढ़ावा देना जरूरी है। इस अवसर पर यूनिसेफ छत्तीसगढ़ के हेल्थ ऑफिसर श्वेताभ त्रिपाठी ने भी अपने बचपन की कुछ यादें साझा कीं।

वरिष्ठ पत्रकार डी. श्याम कुमार ने अपने मैदानी अनुभवों के आधार पर प्रतिभागियों को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि किसी भी मुद्दे को प्रभावी ढंग से सामने लाने के लिए जमीनी स्तर पर उसकी वास्तविक स्थिति को समझना और संवेदनशीलता के साथ लोगों तक पहुंचाना आवश्यक है। वहीं मीडिया प्रोफेशनल सना तमकीन ने सोशल मीडिया के बढ़ते प्रभाव पर चर्चा करते हुए कहा कि कंटेंट क्रिएटर्स युवा पीढ़ी की सोच और व्यवहार को प्रभावित करने की क्षमता रखते हैं। ऐसे में उन्हें अपने प्रभाव का जिम्मेदारीपूर्वक इस्तेमाल करना चाहिए।

कार्यक्रम में प्रिया लालवानी, आरजे अनिमेष, स्वाति खंडेलवाल, अंजनी गांगुली, स्पर्श लखानी, तशीष उपाध्याय, प्रियांशु सिंह, देवेश बजाज, रूबल सिंह, सत्यम यदु, अंकित दुबे, राहुल गुप्ता और प्रवीण त्रिपाठी सहित विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े क्रिएटर्स शामिल हुए।

कार्यक्रम के समापन पर प्रतिभागियों ने बच्चों के अधिकारों, जरूरतों और कल्याण से जुड़े मुद्दों को अपने डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से प्रमुखता से उठाने की प्रतिबद्धता जताई। ‘क्रिएटिव वॉयसेज’ का उद्देश्य ऐसे रचनात्मक समुदाय का निर्माण करना है, जो विश्वसनीय जानकारी और अपनी डिजिटल पहुंच के माध्यम से छत्तीसगढ़ के बच्चों की आवाज को व्यापक समाज तक पहुंचा सके।