स्कूलों में बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य को बढ़ावा देने तीन दिवसीय मास्टर ट्रेनर्स प्रशिक्षण आयोजित
छत्तीसगढ़ में स्कूली बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य और मनोसामाजिक कल्याण को बेहतर बनाने के उद्देश्य से रायपुर में तीन दिवसीय राज्य स्तरीय प्रशिक्षण आयोजित किया गया। यूनिसेफ ने समग्र शिक्षा के सहयोग से यह प्रशिक्षण कराया, जिसमें TISS के SIMHA ने तकनीकी सहयोग दिया। प्रशिक्षण में शामिल शिक्षकों और व्याख्याताओं को बच्चों की भावनात्मक जरूरतों, तनाव के संकेतों की पहचान और सहयोगपूर्ण शैक्षणिक वातावरण तैयार करने के तरीके बताए गए। प्रशिक्षित मास्टर ट्रेनर्स अब अपने जिलों में अन्य शिक्षकों को प्रशिक्षण देंगे।
UNITED NEWS OF ASIA. रामकुमार भारद्वाज, कोंडागांव l स्कूलों में बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य और मनोसामाजिक कल्याण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से छत्तीसगढ़ में तीन दिवसीय राज्य स्तरीय मास्टर ट्रेनर्स प्रशिक्षण आयोजित किया गया। यह प्रशिक्षण 28 से 30 अक्टूबर 2026 तक रायपुर के होटल सयाजी में आयोजित हुआ। यूनिसेफ ने समग्र शिक्षा के सहयोग से इस कार्यक्रम का आयोजन किया, जबकि टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज (TISS) की स्कूल इनिशिएटिव फॉर मेंटल हेल्थ एडवोकेसी (SIMHA) ने तकनीकी साझेदार के रूप में सहयोग दिया।
प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य स्कूलों में बच्चों के मानसिक और भावनात्मक स्वास्थ्य को बेहतर समर्थन देने के लिए शिक्षकों एवं व्याख्याताओं की समझ और क्षमता को मजबूत करना था। कार्यक्रम में इस बात पर जोर दिया गया कि बच्चों के सीखने, शिक्षा और समग्र विकास में मानसिक स्वास्थ्य की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। विशेषकर किशोरावस्था की शुरुआती अवधि में बच्चे कई तरह के शारीरिक, भावनात्मक और सामाजिक बदलावों से गुजरते हैं। ऐसे समय में स्कूल और शिक्षक उन्हें सुरक्षित, सहयोगपूर्ण तथा भरोसेमंद वातावरण उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
तीन दिवसीय प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को बच्चों की भावनाओं को समझने और पहचानने, तनाव के शुरुआती संकेतों को पहचानने तथा उससे निपटने के सरल तरीकों की जानकारी दी गई। इसके साथ ही बच्चों की खूबियों और क्षमताओं को पहचानकर उन्हें प्रोत्साहित करने, कक्षा में सकारात्मक माहौल तैयार करने और जरूरत पड़ने पर बच्चों को उपयुक्त सहायता सेवाओं से जोड़ने की प्रक्रिया पर भी प्रशिक्षण दिया गया। कार्यक्रम में व्याख्यान के बजाय सहभागी और गतिविधि आधारित पद्धति अपनाई गई। इसमें समूह चर्चा, व्यावहारिक अभ्यास और शिक्षकों के अनुभवों के आदान-प्रदान को विशेष महत्व दिया गया।
इस प्रशिक्षण में बस्तर संभाग के सभी सात जिलों और धमतरी जिले से चयनित शिक्षकों एवं व्याख्याताओं ने हिस्सा लिया। प्रशिक्षण पूरा होने के बाद ये मास्टर ट्रेनर्स अपने-अपने जिलों में अन्य शिक्षकों को प्रशिक्षित करेंगे। इसके माध्यम से स्कूलों में बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य और मनोसामाजिक कल्याण से जुड़ी गतिविधियों को आगे बढ़ाया जाएगा। आयोजन का उद्देश्य राज्य के अधिक से अधिक स्कूलों में बच्चों के लिए सुरक्षित, सहयोगपूर्ण और सकारात्मक वातावरण विकसित करना है।
समग्र शिक्षा के उप संचालक कौशिक ने कहा कि वर्तमान समय में बच्चों के बीच प्रतिस्पर्धा बढ़ने के कारण पढ़ाई और करियर को लेकर दबाव भी बढ़ रहा है। ऐसे में बच्चों का मानसिक स्वास्थ्य बेहतर होना जरूरी है, ताकि वे अनावश्यक दबाव के बिना अपनी रुचि और क्षमता के अनुसार भविष्य का निर्माण कर सकें।
यूनिसेफ छत्तीसगढ़ फील्ड ऑफिस की प्रमुख सीमा कुमार ने कहा कि प्रत्येक बच्चे को स्कूल में सुरक्षित और सम्मानित महसूस होना चाहिए। मानसिक स्वास्थ्य एवं मनोसामाजिक सहयोग देखभाल की निरंतर प्रक्रिया है, जिसमें स्कूल, परिवार और समुदाय की सहभागिता जरूरी है। उन्होंने मातृभाषा को बच्चों में सुरक्षा, पहचान और अपनेपन की भावना विकसित करने का महत्वपूर्ण माध्यम बताया।
यूनिसेफ छत्तीसगढ़ के शिक्षा विशेषज्ञ रवि राज दयाल ने कहा कि बच्चों के सीखने के परिणामों में सुधार और उनके मानसिक एवं भावनात्मक कल्याण को बढ़ावा देने के प्रयास साथ-साथ चलने चाहिए। स्कूल केवल पढ़ाई के केंद्र नहीं, बल्कि बच्चों को सुरक्षा, स्थिरता और सहयोग देने वाले स्थान भी होने चाहिए। शिक्षकों की क्षमता मजबूत करना प्रत्येक बच्चे को सीखने और आगे बढ़ने का अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।