सक्ती वेदांता पावर प्लांट हादसा: बिलासपुर आयुक्त को सौंपी गई जांच, 30 दिन में रिपोर्ट देने के निर्देश

सक्ती जिले के सिंघीतराई स्थित वेदांता पावर प्लांट में हुए भीषण हादसे की जांच के आदेश जारी कर दिए गए हैं। राज्य शासन ने बिलासपुर संभाग के आयुक्त को जांच अधिकारी नियुक्त किया है, जिन्हें 30 दिनों के भीतर रिपोर्ट सौंपनी होगी।

Apr 18, 2026 - 11:59
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सक्ती वेदांता पावर प्लांट हादसा: बिलासपुर आयुक्त को सौंपी गई जांच, 30 दिन में रिपोर्ट देने के निर्देश

UNITED NEWS OF ASIA.  जीके कुरे, सक्ती l छत्तीसगढ़ के सक्ती जिले में स्थित वेदांता पावर लिमिटेड में हुए गंभीर हादसे को लेकर राज्य शासन ने सख्त कदम उठाते हुए जांच के आदेश जारी कर दिए हैं। यह दुर्घटना 14 अप्रैल 2026 को डभरा तहसील के अंतर्गत सिंघीतराई स्थित प्लांट में हुई थी, जिसमें कई श्रमिकों की जान चली गई, जबकि कई अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए।

घटना की गंभीरता को देखते हुए सामान्य प्रशासन विभाग ने बिलासपुर संभाग के आयुक्त को जांच अधिकारी नियुक्त किया है। उन्हें निर्देश दिए गए हैं कि वे पूरे मामले की गहनता से जांच कर 30 दिनों के भीतर अपनी रिपोर्ट राज्य शासन को प्रस्तुत करें। इस जांच का उद्देश्य दुर्घटना के वास्तविक कारणों का पता लगाना और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति को रोकना है।

प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, हादसा प्लांट की बॉयलर यूनिट-1 में हुआ, जहां स्टीम पाइप से जुड़े वाटर सप्लाई पाइप के ज्वाइंट में तकनीकी खराबी आ गई थी। इसी वजह से अचानक विस्फोट जैसी स्थिति बनी, जिससे वहां काम कर रहे श्रमिक इसकी चपेट में आ गए। हादसा इतना गंभीर था कि मौके पर अफरा-तफरी मच गई और तत्काल राहत एवं बचाव कार्य शुरू करना पड़ा।

जांच के दायरे में कई महत्वपूर्ण बिंदुओं को शामिल किया गया है। इसमें यह देखा जाएगा कि दुर्घटना कब और कैसे हुई, इसके पीछे क्या तकनीकी या मानवीय कारण थे, सुरक्षा मानकों का पालन किया गया था या नहीं, और यदि कोई लापरवाही हुई है तो उसकी जिम्मेदारी किसकी बनती है। इसके अलावा, भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए आवश्यक सुझाव भी जांच रिपोर्ट में शामिल किए जाएंगे।

मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने इस घटना को गंभीरता से लेते हुए निष्पक्ष और त्वरित जांच सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने स्पष्ट किया है कि हादसे के लिए जिम्मेदार व्यक्तियों या संस्थाओं पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। साथ ही, घायलों के समुचित इलाज और प्रभावित परिवारों को हर संभव सहायता प्रदान करने के निर्देश भी दिए गए हैं।

यह हादसा न केवल औद्योगिक सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि बड़े उद्योगों में सुरक्षा मानकों का सख्ती से पालन कितना आवश्यक है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते तकनीकी खामियों की पहचान कर ली जाए और नियमित निरीक्षण किया जाए, तो इस तरह की घटनाओं को काफी हद तक रोका जा सकता है।

स्थानीय प्रशासन और संबंधित विभागों ने घटना के बाद प्लांट में सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा शुरू कर दी है। साथ ही, अन्य औद्योगिक इकाइयों को भी सतर्क रहने और अपने सुरक्षा प्रोटोकॉल को मजबूत करने के निर्देश दिए जा रहे हैं।

फिलहाल, पूरे जिले में इस घटना को लेकर शोक और चिंता का माहौल है। सभी की नजर अब जांच रिपोर्ट पर टिकी है, जिससे यह स्पष्ट हो सके कि आखिर इस दुखद हादसे के पीछे कौन से कारण जिम्मेदार थे और आगे इससे कैसे बचा जा सकता है।