रायपुर में आज निकलेगी भगवान जगन्नाथ की बाहुड़ा रथयात्रा, नौ दिवसीय प्रवास के बाद श्रीमंदिर वापसी

रायपुर के गायत्री नगर स्थित श्री जगन्नाथ सेवा समिति के तत्वावधान में 24 जुलाई को भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा की बाहुड़ा रथयात्रा श्रद्धा और उत्साह के साथ निकलेगी। नौ दिवसीय प्रवास के बाद भगवान श्रीमंदिर लौटेंगे। हजारों श्रद्धालुओं की भागीदारी और व्यापक व्यवस्थाओं के बीच यह आयोजन धार्मिक आस्था, संस्कृति और सामाजिक समरसता का संदेश देगा।

Jul 24, 2026 - 11:41
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रायपुर में आज निकलेगी भगवान जगन्नाथ की बाहुड़ा रथयात्रा, नौ दिवसीय प्रवास के बाद श्रीमंदिर वापसी

UNITED NEWS OF ASIA. अमृतेश्वर सिंह, रायपुर l रायपुर में भगवान जगन्नाथ की बाहुड़ा रथयात्रा को लेकर श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह और उल्लास का वातावरण है। गायत्री नगर (शंकर नगर) स्थित श्री जगन्नाथ सेवा समिति के तत्वावधान में 24 जुलाई को भगवान जगन्नाथ, भगवान बलभद्र और देवी सुभद्रा की पावन बाहुड़ा रथयात्रा निकाली जाएगी। नौ दिनों तक मौसी घर में प्रवास करने के बाद भगवान पुनः अपने मूल निवास श्री जगन्नाथ मंदिर लौटेंगे। इस पावन अवसर पर हजारों श्रद्धालु रथ खींचने का सौभाग्य प्राप्त करेंगे और पूरे शहर में जय जगन्नाथ के जयघोष से भक्तिमय वातावरण निर्मित होगा।

बाहुड़ा रथयात्रा को भगवान जगन्नाथ की वापसी यात्रा के रूप में देखा जाता है, लेकिन इसका महत्व केवल धार्मिक आयोजन तक सीमित नहीं है। यह यात्रा सनातन संस्कृति में सेवा, समर्पण, समानता और लोककल्याण का संदेश देती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भगवान जगन्नाथ अपने भक्तों के बीच नौ दिनों तक निवास कर उन्हें दर्शन और आशीर्वाद प्रदान करते हैं तथा इसके बाद बाहुड़ा यात्रा के माध्यम से श्रीमंदिर लौटते हैं। इसी कारण इस यात्रा में शामिल होने और रथ खींचने को अत्यंत पुण्यदायी माना जाता है।

इस वर्ष भी दोपहर तीन बजे से बाहुड़ा रथयात्रा का शुभारंभ किया जाएगा। यात्रा के दौरान भगवान का सुसज्जित रथ निर्धारित मार्गों से होते हुए श्री जगन्नाथ मंदिर पहुंचेगा। श्रद्धालु पूरे मार्ग में भजन-कीर्तन, जयघोष और पुष्पवर्षा के माध्यम से भगवान का स्वागत करेंगे। विभिन्न सामाजिक और धार्मिक संस्थाएं भी यात्रा के दौरान सेवा कार्यों में भाग लेंगी।

मौसी मंदिर में नौ दिवसीय प्रवास के दौरान प्रतिदिन भगवान का विशेष श्रृंगार, आरती, भजन-कीर्तन और महाप्रसाद का आयोजन किया गया। परंपरा के अनुसार भगवान को छप्पन भोग अर्पित किए गए और बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने दर्शन कर पुण्य लाभ अर्जित किया। सुबह से लेकर देर रात तक मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की लंबी कतारें लगी रहीं। पूरे आयोजन के दौरान धार्मिक अनुष्ठानों के साथ सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने भी श्रद्धालुओं को आकर्षित किया।

बाहुड़ा यात्रा को लेकर समिति ने व्यापक तैयारियां पूरी कर ली हैं। रथ मार्ग को आकर्षक सजावट से सजाया गया है। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए पेयजल, प्राथमिक चिकित्सा, सुरक्षा, यातायात नियंत्रण तथा अन्य आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित की गई हैं। स्वयंसेवकों की अलग-अलग टीमें विभिन्न स्थानों पर तैनात रहेंगी ताकि श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े। प्रशासन और समिति के समन्वय से पूरे आयोजन को सुरक्षित एवं व्यवस्थित ढंग से संपन्न कराने की तैयारी की गई है।

इस धार्मिक आयोजन में प्रदेश के अनेक जनप्रतिनिधियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं, धार्मिक संगठनों के प्रतिनिधियों और बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिकों के शामिल होने की संभावना है। हजारों श्रद्धालु परिवार सहित इस पावन यात्रा में भाग लेकर भगवान जगन्नाथ का आशीर्वाद प्राप्त करेंगे। हर वर्ष की तरह इस बार भी बाहुड़ा रथयात्रा रायपुर की प्रमुख धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान के रूप में विशेष आकर्षण का केंद्र बनी हुई है।

विधायक पुरंदर मिश्रा ने कहा कि भगवान जगन्नाथ की बाहुड़ा यात्रा भारतीय संस्कृति की समरसता, सेवा और लोकमंगल की भावना का प्रतीक है। उन्होंने प्रदेशवासियों से इस दिव्य आयोजन में परिवार सहित शामिल होकर भगवान का आशीर्वाद प्राप्त करने का आग्रह किया। उन्होंने बताया कि समिति का उद्देश्य हर वर्ष इस आयोजन को अधिक भव्य, सुव्यवस्थित और भक्तिमय स्वरूप प्रदान करना है ताकि नई पीढ़ी भी सनातन संस्कृति और धार्मिक परंपराओं से जुड़ सके।

बाहुड़ा रथयात्रा का धार्मिक महत्व सदियों पुराना है। मान्यता है कि भगवान जगन्नाथ स्वयं अपने भक्तों के बीच जाकर उन्हें दर्शन देते हैं और फिर श्रीमंदिर लौटते हैं। यह यात्रा समाज में समानता और भाईचारे का संदेश भी देती है, क्योंकि इसमें हर वर्ग, हर समुदाय और हर आयु के लोग बिना किसी भेदभाव के शामिल होकर भगवान का रथ खींचते हैं। यही कारण है कि जगन्नाथ संस्कृति को सामाजिक समरसता का प्रतीक माना जाता है।

रायपुर में पिछले कुछ वर्षों के दौरान बाहुड़ा रथयात्रा का स्वरूप लगातार विस्तृत हुआ है। हर वर्ष श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ रही है और यह आयोजन शहर के प्रमुख धार्मिक आयोजनों में शामिल हो चुका है। समिति द्वारा धार्मिक परंपराओं का पालन करते हुए आधुनिक व्यवस्थाओं का भी विशेष ध्यान रखा जाता है, जिससे श्रद्धालुओं को बेहतर अनुभव मिल सके।

धार्मिक विशेषज्ञों का मानना है कि भगवान जगन्नाथ की बाहुड़ा यात्रा केवल एक धार्मिक परंपरा नहीं, बल्कि सामाजिक एकता, सेवा, त्याग और मानवीय मूल्यों का भी संदेश देती है। इस अवसर पर श्रद्धालु भगवान के दर्शन के साथ-साथ सेवा कार्यों में भाग लेकर समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारियों का भी निर्वहन करते हैं।

आज आयोजित होने वाली यह पावन बाहुड़ा रथयात्रा रायपुर को एक बार फिर भक्तिरस में सराबोर कर देगी। भगवान जगन्नाथ, भगवान बलभद्र और देवी सुभद्रा की दिव्य यात्रा में हजारों श्रद्धालुओं की सहभागिता के साथ पूरा शहर आस्था, श्रद्धा और उत्सव के रंग में रंगा नजर आएगा। नौ दिवसीय प्रवास के बाद भगवान की श्रीमंदिर वापसी का यह पावन अवसर धार्मिक परंपरा, सांस्कृतिक विरासत और सामाजिक समरसता का अद्भुत संगम प्रस्तुत करेगा।