पोषण पुनर्वास केंद्र ने ओमेश को कुपोषण से उबारा, स्वस्थ होकर लौटा घर
गरियाबंद के दादरगांव निवासी डेढ़ वर्षीय ओमेश यादव गंभीर कुपोषण और कई स्वास्थ्य समस्याओं के साथ जिला चिकित्सालय स्थित पोषण पुनर्वास केंद्र पहुंचा था। 16 दिनों के उपचार, पोषक आहार और विशेष देखभाल के बाद उसका वजन 5.1 किलोग्राम से बढ़कर 6.40 किलोग्राम हो गया। अब वह स्वस्थ होकर घर लौट चुका है। केंद्र में उसकी मां को भी पोषण, स्वच्छता और बाल देखभाल का प्रशिक्षण दिया गया।
UNITED NEWS OF ASIA. राष्ट्रीय पोषण माह के दौरान गरियाबंद से सामने आई ओमेश यादव की कहानी यह बताती है कि समय पर पहचान, उपचार, पोषणयुक्त आहार और विशेष देखभाल से गंभीर कुपोषण को दूर किया जा सकता है। ग्राम दादरगांव निवासी डेढ़ वर्षीय ओमेश गंभीर कुपोषण की स्थिति में जिला चिकित्सालय गरियाबंद स्थित पोषण पुनर्वास केंद्र पहुंचा था। उपचार और नियमित देखभाल के बाद अब वह स्वस्थ होकर अपने घर लौट चुका है।
केंद्र में भर्ती किए जाने के समय ओमेश का वजन महज 5.1 किलोग्राम था। वह चलने-फिरने में असमर्थ था और निमोनिया, बुखार, सर्दी तथा कान के संक्रमण से भी पीड़ित था। चिकित्सकीय जांच के बाद उसे आवश्यक दवाइयों के साथ पोषक आहार और विशेष देखभाल उपलब्ध कराई गई। चिकित्सकीय निगरानी और नियमित उपचार के परिणामस्वरूप 16 दिनों बाद उसका वजन बढ़कर 6.40 किलोग्राम हो गया। स्वास्थ्य में सुधार के साथ ओमेश अब चलने-फिरने और मुस्कुराने लगा है। आवश्यक दवाइयों और देखभाल संबंधी सलाह देने के बाद उसे केंद्र से छुट्टी दी गई।
पोषण पुनर्वास केंद्र में ओमेश के उपचार के साथ उसकी मां सुरेखा यादव को भी बच्चे के खान-पान, स्वच्छता, पोषण और देखभाल से जुड़ी जरूरी जानकारी दी गई। केंद्र में निर्धारित अवधि तक रहने के दौरान उन्हें प्रतिदिन 150 रुपये की दर से कुल 2 हजार 250 रुपये की सहायता राशि बैंक खाते के माध्यम से प्रदान की गई। इससे बच्चे के उपचार के दौरान परिवार को आर्थिक सहयोग भी मिला।
जिला चिकित्सालय गरियाबंद स्थित पोषण पुनर्वास केंद्र में अब तक 3 हजार 876 बच्चों को भर्ती कर उपचार, पोषक आहार और विशेष देखभाल के माध्यम से कुपोषण से बाहर आने में सहायता दी जा चुकी है। अप्रैल से अगस्त 2026 तक केंद्र की बिस्तर अधिभोग दर 164 प्रतिशत तथा प्राप्तांक दर 95 प्रतिशत रही है। केंद्र लगातार उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए राज्य में प्रथम स्थान प्राप्त करता रहा है।
केंद्र में बच्चों के उपचार के साथ उनकी माताओं के स्वास्थ्य, पोषण, स्वच्छता और बाल देखभाल पर भी विशेष ध्यान दिया जाता है। माताओं को बच्चों के लिए संतुलित एवं पौष्टिक आहार तैयार करने, स्वच्छता बनाए रखने और बीमारी के लक्षणों की समय पर पहचान करने संबंधी जानकारी दी जाती है। इससे उपचार के बाद भी बच्चे के स्वास्थ्य और पोषण की निरंतर निगरानी में परिवार की भूमिका मजबूत होती है।
राष्ट्रीय पोषण माह के दौरान ओमेश की स्वस्थ होकर घर वापसी सेवा, संवेदना और समर्पित देखभाल की प्रेरक कहानी बनी है। गंभीर कुपोषण से स्वस्थ जीवन की ओर बढ़े ओमेश की मुस्कान यह संदेश देती है कि समय पर पहचान, उचित उपचार, पौष्टिक आहार और माताओं को सही जानकारी देकर बच्चों के बेहतर स्वास्थ्य की मजबूत नींव रखी जा सकती है।
पोषण पुनर्वास केंद्र के संचालन में सिविल सर्जन डॉ. वाय.के. ध्रुव, नोडल अधिकारी डॉ. अंकुश वर्मा, अस्पताल प्रबंधक डॉ. शंकर पटेल, आहार प्रदर्शनकर्ता अनीस अख्तर, स्टाफ नर्स डिगेश्वरी निषाद, खिलेश्वरी कंवर, मुनमुन देवांगन तथा रसोइया लक्ष्मी यादव की महत्वपूर्ण भूमिका रही।