सुरक्षित मातृत्व की नई पहचान बना नारायणपुर का मायका सेंटर, अबूझमाड़ में सुरक्षित प्रसव से बढ़ा भरोसा

नारायणपुर जिले के अबूझमाड़ क्षेत्र स्थित आदेर मायका सेंटर में ग्राम भटबेड़ा की गर्भवती महिला सामबती का सुरक्षित संस्थागत प्रसव कराया गया। मां और नवजात दोनों स्वस्थ हैं। मायका सेंटर दूरस्थ क्षेत्रों की गर्भवती महिलाओं के लिए सुरक्षित मातृत्व का भरोसेमंद केंद्र बनकर उभर रहा है।

Jul 28, 2026 - 16:38
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सुरक्षित मातृत्व की नई पहचान बना नारायणपुर का मायका सेंटर, अबूझमाड़ में सुरक्षित प्रसव से बढ़ा भरोसा

UNITED NEWS OF ASIA. छत्तीसगढ़ के नारायणपुर जिले के अबूझमाड़ क्षेत्र में सुरक्षित मातृत्व को बढ़ावा देने की दिशा में मायका सेंटर प्रभावी पहल के रूप में सामने आया है। दुर्गम वनांचल क्षेत्रों में रहने वाली गर्भवती महिलाओं के लिए बरसात का मौसम हमेशा से चुनौतीपूर्ण रहा है। उफनते नदी-नाले, खराब सड़कें और स्वास्थ्य संस्थानों तक समय पर पहुंचने में आने वाली कठिनाइयों के कारण कई बार प्रसव जोखिमपूर्ण हो जाता है। ऐसे हालात में विकासखंड ओरछा के आदेर मायका सेंटर ने सुरक्षित मातृत्व की नई उम्मीद जगाई है।

हाल ही में ग्राम भटबेड़ा निवासी गर्भवती महिला सामबती का आदेर मायका सेंटर में सफल एवं सुरक्षित संस्थागत प्रसव कराया गया। प्रसव के बाद मां और नवजात दोनों पूरी तरह स्वस्थ हैं तथा चिकित्सकीय निगरानी में उनका समुचित उपचार और देखभाल की जा रही है। इस सफल प्रसव ने क्षेत्र के लोगों में स्वास्थ्य सेवाओं के प्रति विश्वास और मजबूत किया है।

मायका सेंटर का उद्देश्य दूरस्थ और दुर्गम क्षेत्रों की गर्भवती महिलाओं को प्रसव पूर्व सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराना है। यहां गर्भवती महिलाओं को समय से पहले लाकर नियमित स्वास्थ्य परीक्षण, पौष्टिक भोजन, चिकित्सकीय निगरानी और आवश्यक स्वास्थ्य सुविधाएं प्रदान की जाती हैं, ताकि प्रसव के दौरान किसी प्रकार का जोखिम न रहे। इससे महिलाओं को समय पर उपचार मिलता है और आपातकालीन परिस्थितियों में होने वाले खतरे भी काफी हद तक कम हो जाते हैं।

अबूझमाड़ जैसे कठिन भौगोलिक क्षेत्र में स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच सुनिश्चित करना हमेशा बड़ी चुनौती रही है। कई गांव ऐसे हैं जहां बरसात के दौरान सड़क संपर्क पूरी तरह बाधित हो जाता है। ऐसे में मायका सेंटर गर्भवती महिलाओं के लिए सुरक्षित आश्रय स्थल बनकर सामने आया है, जहां वे प्रसव तक आरामदायक और सुरक्षित वातावरण में रह सकती हैं।

सामबती का सुरक्षित प्रसव इस बात का उदाहरण है कि यदि समय पर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध हों और गर्भवती महिलाओं को उचित देखभाल मिले, तो दूरस्थ क्षेत्रों में भी सुरक्षित मातृत्व सुनिश्चित किया जा सकता है। इससे अन्य ग्रामीण महिलाओं में भी संस्थागत प्रसव के प्रति जागरूकता और विश्वास बढ़ रहा है।

स्वास्थ्य विभाग और जिला प्रशासन लगातार प्रयास कर रहे हैं कि अबूझमाड़ सहित सभी दुर्गम क्षेत्रों की गर्भवती महिलाओं को सुरक्षित प्रसव की सुविधा उपलब्ध हो। मायका सेंटरों के माध्यम से मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में कमी लाने, स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच बढ़ाने और प्रत्येक महिला को सुरक्षित मातृत्व का अधिकार दिलाने की दिशा में कार्य किया जा रहा है।

स्वास्थ्य विभाग का मानना है कि हर सफल संस्थागत प्रसव केवल एक परिवार की खुशी नहीं, बल्कि पूरे समाज के लिए सकारात्मक संदेश है। मायका सेंटरों की यह पहल ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों की महिलाओं के जीवन में सुरक्षा, विश्वास और बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं का नया अध्याय लिख रही है। आने वाले समय में ऐसे प्रयासों से दूरस्थ क्षेत्रों में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाएं और अधिक सशक्त होने की उम्मीद है।