तारीख पर तारीख... 80 साल पुराने मोती नाला पुल का कब होगा निर्माण? आश्वासनों से नाराज जनता

खैरागढ़ के टिकरापारा स्थित करीब 75 से 80 साल पुरानी मोती नाला पुलिया के नए निर्माण की मांग लंबे समय से की जा रही है। स्थानीय लोगों का दावा है कि करीब 25 वर्षों से आश्वासन मिलने के बावजूद अब तक निर्माण शुरू नहीं हुआ है। जर्जर पुलिया और बारिश के दौरान बढ़ते जलस्तर से आवागमन प्रभावित होने की बात कही जा रही है। लगातार देरी से नाराज लोगों ने अब प्रशासन से जल्द निर्माण शुरू कराने की मांग की है।

Sep 10, 2026 - 14:31
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तारीख पर तारीख... 80 साल पुराने मोती नाला पुल का कब होगा निर्माण? आश्वासनों से नाराज जनता

UNITED NEWS OF ASIA. खैरागढ़ जिला मुख्यालय के टिकरापारा स्थित मोती नाला पुलिया लंबे समय से स्थानीय लोगों के लिए परेशानी का कारण बनी हुई है। करीब 75 से 80 साल पुरानी बताई जा रही इस पुलिया के नए निर्माण की मांग पिछले करीब 25 वर्षों से किए जाने का दावा स्थानीय लोगों ने किया है। लोगों का कहना है कि हर बार पुल निर्माण को लेकर स्वीकृति, बजट और जल्द काम शुरू होने का आश्वासन मिलता रहा, लेकिन अब तक जमीन पर निर्माण कार्य शुरू नहीं हो पाया है। यही वजह है कि लंबे समय से इंतजार कर रहे लोगों में नाराजगी बढ़ती जा रही है।

मोती नाला पुलिया खैरागढ़ कलेक्टर कार्यालय क्षेत्र को नया टिकरापारा, अकरजन, सुतिया, देवरी और सिंगारघाट सहित आसपास के इलाकों से जोड़ने वाले महत्वपूर्ण मार्ग पर स्थित है। स्थानीय लोगों के मुताबिक इस रास्ते से प्रतिदिन स्कूली बच्चों, महिलाओं, बुजुर्गों, ग्रामीणों और वाहन चालकों की आवाजाही होती है। बारिश के मौसम में मोती नाला का जलस्तर बढ़ने पर आवागमन और ज्यादा चुनौतीपूर्ण हो जाता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि कई बार नया टिकरापारा क्षेत्र का संपर्क प्रभावित होने जैसी स्थिति बन जाती है।

पुलिया के नए निर्माण को लेकर सबसे बड़ा सवाल यह है कि लंबे समय से स्वीकृति और बजट की बातें सामने आने के बावजूद वास्तविक काम कब शुरू होगा। स्थानीय लोगों के अनुसार पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के कार्यकाल में भी पुल निर्माण की घोषणा किए जाने की बात कही गई थी। इसके बाद भाजपा सरकार के कार्यकाल में भी निर्माण के लिए स्वीकृति और बजट से संबंधित जानकारी सामने आई। दिसंबर में सांसद के प्रयास से स्वीकृति मिलने का दावा भी किया गया, लेकिन इसके बाद भी भूमि पूजन और निर्माण कार्य शुरू नहीं हुआ।

स्थानीय निवासी राजू यादव ने पुलिया की जर्जर स्थिति को लेकर कई दुर्घटनाओं का दावा किया है। उनका कहना है कि पिछले करीब 10 वर्षों में पुलिया से जुड़े हादसों में मवेशियों के बहने और लोगों के घायल होने की कई घटनाएं हुई हैं। उन्होंने करीब 17 से 18 मवेशियों के बहने तथा 25 से 30 लोगों के घायल होने का दावा किया है। कुछ लोगों के स्थायी रूप से दिव्यांग होने की बात भी कही गई है। हालांकि, इन आंकड़ों की आधिकारिक पुष्टि प्रशासन की ओर से होना बाकी है।

बारिश के दौरान पुलिया के आसपास की स्थिति को लेकर भी स्थानीय लोगों ने चिंता जताई है। उनका आरोप है कि नाले के आसपास कुछ जगहों पर मिट्टी डालने से प्राकृतिक जल निकासी प्रभावित हो सकती है। लोगों के अनुसार मोती नाला आसपास के जंगल और क्षेत्र का पानी लेकर मुस्का नदी की ओर जाता है। यदि नाले के बहाव क्षेत्र में किसी तरह का अतिक्रमण या मिट्टी भराव हुआ है तो भारी बारिश के दौरान इसका असर आसपास के इलाकों पर पड़ सकता है। इस संबंध में वास्तविक स्थिति प्रशासनिक जांच और स्थल निरीक्षण के बाद ही स्पष्ट होगी।

पुल निर्माण में लगातार हो रही देरी से नाराज स्थानीय लोगों का कहना है कि अब उन्हें केवल घोषणाएं और तारीखें नहीं चाहिए, बल्कि मौके पर काम शुरू होते हुए दिखाई देना चाहिए। इसी नाराजगी के बीच स्थानीय निवासी रमेश यादव ने बातचीत के दौरान गुस्से में पुल को बम से उड़ाने जैसी बात कही। यह बयान आक्रोश में दिया गया बताया गया है और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने या हिंसा का कोई समर्थन नहीं किया जा सकता।

अब स्थानीय लोगों की नजर प्रशासन और संबंधित विभाग की अगली कार्रवाई पर है। जनता चाहती है कि मोती नाला पुलिया के निर्माण की प्रक्रिया को आगे बढ़ाकर वास्तविक निर्माण जल्द शुरू किया जाए, ताकि वर्षों पुरानी समस्या का स्थायी समाधान हो सके।