'मोर गांव मोर पानी' अभियान का असर, दुर्ग में 15.96 करोड़ लीटर जल भंडारण क्षमता विकसित

दुर्ग जिले में 'मोर गांव मोर पानी' अभियान के तहत विकसित जल संरक्षण संरचनाएं मानसूनी बारिश से लबालब भरने लगी हैं। अब तक करीब 15.96 करोड़ लीटर जल भंडारण क्षमता विकसित की जा चुकी है, जिससे भू-जल स्तर, सिंचाई और ग्रामीण आजीविका को मजबूती मिल रही है।

Jul 20, 2026 - 15:29
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'मोर गांव मोर पानी' अभियान का असर, दुर्ग में 15.96 करोड़ लीटर जल भंडारण क्षमता विकसित

UNITED NEWS OF ASIA. रोहिताश सिंह भुवाल, दुर्ग l जिले में सक्रिय मानसून के साथ 'मोर गांव मोर पानी' महाअभियान के सकारात्मक परिणाम अब ग्रामीण क्षेत्रों में स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगे हैं। हाल के दिनों में हुई अच्छी बारिश के कारण अभियान के तहत बनाई गई जल संरक्षण संरचनाएं तेजी से वर्षा जल से भर रही हैं। इससे न केवल जल संरक्षण को बढ़ावा मिला है, बल्कि खेती, सिंचाई, पशुपालन, मत्स्य पालन और ग्रामीण आजीविका को भी नई मजबूती मिलने लगी है।

जिला प्रशासन के अनुसार अभियान के तहत बनाए गए वॉटर एब्जॉर्प्शन ट्रेंच (WAT), अमृत सरोवर, आजीविका डबरी, नवा तरिया, कंटूर ट्रेंच, चेक डैम, रिचार्ज पिट और अन्य जल संरक्षण संरचनाएं मानसूनी वर्षा के कारण लबालब भर रही हैं। इससे वर्षा जल का अधिकतम संचयन हो रहा है और भू-जल स्तर में भी सुधार देखने को मिल रहा है।

कलेक्टर अभिजीत सिंह ने बताया कि अभियान का उद्देश्य केवल जल संरक्षण संरचनाओं का निर्माण करना नहीं, बल्कि उन्हें ग्रामीण समृद्धि का स्थायी आधार बनाना है। अच्छी बारिश के साथ इन संरचनाओं का भरना इस बात का प्रमाण है कि यह अभियान जल संरक्षण के साथ रोजगार सृजन, कृषि उत्पादकता बढ़ाने और ग्रामीण आजीविका को मजबूत करने में प्रभावी साबित हो रहा है।

जिले में अब तक लगभग 15.96 करोड़ लीटर जल भंडारण क्षमता विकसित की जा चुकी है। इसका लाभ किसानों को सिंचाई सुविधा बढ़ने, पेयजल उपलब्धता में सुधार और प्राकृतिक संसाधनों के बेहतर संरक्षण के रूप में मिल रहा है। प्रशासन का मानना है कि इससे आने वाले समय में जल संकट की स्थिति को काफी हद तक कम किया जा सकेगा।

अभियान के तहत जिले में 30 आजीविका डबरियों का निर्माण किया गया है, जो वर्षा जल का प्रभावी संचयन कर रही हैं। वहीं 'नवा तरिया-आय के जरिया' पहल के अंतर्गत निर्मित 112 डबरियां और तालाब भी बारिश के पानी से भरने लगे हैं। इन जलाशयों का उपयोग वर्षभर मत्स्य पालन, बागवानी, सिंचाई और अन्य आयवर्धक गतिविधियों के लिए किया जाएगा, जिससे ग्रामीणों की आमदनी बढ़ाने में मदद मिलेगी।

विकसित भारत रोजगार एवं आजीविका गारंटी मिशन (ग्रामीण) के अंतर्गत भी जिले में जल संरक्षण को प्राथमिकता दी गई है। इस मिशन के तहत 303 कार्यों को स्वीकृति दी गई है, जिनका उद्देश्य वर्षा जल संचयन, भू-जल पुनर्भरण और प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण करना है। इन कार्यों से दीर्घकालिक जल सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रयास किए जा रहे हैं।

जिले की 300 ग्राम पंचायतों में जनभागीदारी के माध्यम से जल संरक्षण अभियान को व्यापक रूप दिया गया। ग्रामीणों के सहयोग से वॉटर एब्जॉर्प्शन ट्रेंच, स्टैगर्ड कंटूर ट्रेंच, प्रधानमंत्री आवासों में सोख्ता गड्ढे, रूफटॉप रेन वाटर हार्वेस्टिंग, बोरवेल रिचार्ज, कुओं का निर्माण और अन्य संरचनाएं तैयार की गई हैं। इससे जल संरक्षण के प्रति लोगों में जागरूकता भी बढ़ी है।

मुख्य कार्यपालन अधिकारी, जिला पंचायत बजरंग कुमार दुबे के मार्गदर्शन में एक ही वित्तीय वर्ष के दौरान जिले में 55,965 वॉटर एब्जॉर्प्शन ट्रेंच, 15 परकोलेशन पॉन्ड, 834 रिचार्ज पिट, 1,324 रूफटॉप रेन वाटर हार्वेस्टिंग संरचनाएं, 9,663 सोख्ता गड्ढे, 123 तालाब, 20,518 कंटूर ट्रेंच, 26 चेक डैम और 28 बोरवेल रिचार्ज संरचनाओं का निर्माण किया गया है।

जिला प्रशासन का कहना है कि अच्छी मानसूनी वर्षा के साथ इन संरचनाओं के भरने से भू-जल स्तर में सुधार, सिंचाई क्षमता में वृद्धि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को स्थायी मजबूती मिल रही है। 'मोर गांव मोर पानी' अभियान जल संरक्षण को जनभागीदारी का आंदोलन बनाते हुए जल सुरक्षा, प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण और सतत ग्रामीण विकास की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।