पूर्व मंत्री मोहम्मद अकबर ने मुख्य सचिव से की मांग, जनप्रतिनिधियों के सम्मान से जुड़े 18 आदेशों का हो सख्ती से पालन
पूर्व मंत्री मोहम्मद अकबर ने मुख्य सचिव से मांग की है कि सांसदों और विधायकों के सम्मान, समय पर जानकारी उपलब्ध कराने तथा सरकारी कार्यक्रमों में उचित प्रोटोकॉल सुनिश्चित करने से जुड़े 18 सरकारी आदेशों का कड़ाई से पालन कराया जाए।
UNITED NEWS OF ASIA. अमृतेश्वर सिंह, रायपुर l छत्तीसगढ़ में जनप्रतिनिधियों और सरकारी अधिकारियों के बीच समन्वय एवं प्रोटोकॉल के पालन को लेकर एक बार फिर चर्चा तेज हो गई है। पूर्व कैबिनेट मंत्री मोहम्मद अकबर ने मुख्य सचिव से मांग की है कि सांसदों और विधायकों के सम्मान तथा उनके अधिकारों से जुड़े शासन के 18 महत्वपूर्ण आदेशों का प्रदेशभर में सख्ती से पालन सुनिश्चित कराया जाए।
मोहम्मद अकबर ने जारी एक वीडियो संदेश में कहा कि राज्य सरकार ने समय-समय पर विभिन्न विभागों को जनप्रतिनिधियों के साथ सम्मानजनक व्यवहार करने, उनके पत्रों का समयबद्ध जवाब देने और विकास कार्यों की जानकारी उपलब्ध कराने संबंधी कई निर्देश जारी किए हैं। इसके बावजूद कई स्थानों पर इन आदेशों का प्रभावी पालन नहीं हो रहा है, जिससे जनप्रतिनिधियों को अनावश्यक कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
उन्होंने कहा कि शासन के पास ऐसे कुल 18 आदेश मौजूद हैं, जिनका उद्देश्य सांसदों और विधायकों को उनके संवैधानिक दायित्वों के निर्वहन में सहयोग प्रदान करना है। यदि इन आदेशों का सही तरीके से पालन हो, तो प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित हो सकता है तथा जनता की समस्याओं का समाधान भी अधिक प्रभावी ढंग से संभव होगा।
पूर्व मंत्री ने विशेष रूप से सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा 21 अप्रैल 2010 को जारी उस आदेश का उल्लेख किया, जिसमें यह कहा गया था कि शासन के संज्ञान में यह बात आई है कि विभिन्न विभागों और कार्यालयों द्वारा जनप्रतिनिधियों से संबंधित निर्देशों का समुचित पालन नहीं किया जा रहा है। उस समय शासन ने इसे गंभीर विषय मानते हुए सभी विभागों को पूर्व में जारी 18 महत्वपूर्ण निर्देशों का पालन सुनिश्चित करने के लिए कहा था।
इन निर्देशों में सांसदों और विधायकों के पत्रों की तत्काल अभिस्वीकृति देना, प्राप्त पत्रों का अंतरिम उत्तर 15 दिनों के भीतर उपलब्ध कराना, सरकारी कार्यक्रमों, भूमि पूजन एवं लोकार्पण समारोहों में क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों को आमंत्रित करना, जिला एवं विकासखंड स्तर की समीक्षा बैठकों की सूचना समय पर उपलब्ध कराना तथा अधिकारियों द्वारा जनप्रतिनिधियों के साथ सौहार्दपूर्ण एवं सम्मानजनक व्यवहार सुनिश्चित करना जैसे प्रावधान शामिल हैं।
मोहम्मद अकबर ने कहा कि जनप्रतिनिधि जनता द्वारा चुने गए होते हैं और वे लोगों की समस्याओं को प्रशासन तक पहुंचाने का कार्य करते हैं। ऐसे में यदि उन्हें समय पर जानकारी नहीं मिलती या उनके साथ निर्धारित प्रोटोकॉल के अनुरूप व्यवहार नहीं किया जाता, तो इसका सीधा असर जनता के हितों पर पड़ता है।
उन्होंने मुख्य सचिव से आग्रह किया कि सभी विभागों, संभागीय आयुक्तों, कलेक्टरों और अन्य प्रशासनिक अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश जारी किए जाएं ताकि शासन के सभी 18 आदेशों का प्रभावी और अनिवार्य रूप से पालन सुनिश्चित हो सके। साथ ही उन्होंने यह भी अपेक्षा जताई कि भविष्य में ऐसे मामलों की नियमित समीक्षा की जाए और निर्देशों की अनदेखी करने वाले अधिकारियों के विरुद्ध आवश्यक कार्रवाई भी सुनिश्चित की जाए।
पूर्व मंत्री की इस मांग के बाद अब निगाहें मुख्य सचिव कार्यालय पर टिकी हैं। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि प्रशासन इस मुद्दे पर क्या कदम उठाता है और क्या प्रदेशभर में जनप्रतिनिधियों से जुड़े शासन के निर्देशों के पालन को लेकर नई व्यवस्था लागू की जाती है।