मनेन्द्रगढ़ में PMGSY सड़कों पर भ्रष्टाचार का डामर, EE मोतीराम सिंह और SDO शैलेश गुप्ता पर गंभीर आरोप

मनेन्द्रगढ़ में प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना के तहत भ्रष्टाचार और नियम विरुद्ध पदस्थापना का मामला सामने आया है। EE मोतीराम सिंह और SDO शैलेश गुप्ता पर गृह जिले में पदस्थ रहकर घटिया सड़क निर्माण और कमीशनखोरी के गंभीर आरोप लगे हैं।

Jan 17, 2026 - 15:40
Jan 17, 2026 - 16:35
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मनेन्द्रगढ़ में PMGSY सड़कों पर भ्रष्टाचार का डामर, EE मोतीराम सिंह और SDO शैलेश गुप्ता पर गंभीर आरोप

UNITED NEWS OF ASIA. प्रदीप पाटकर,कोरिया  मनेन्द्रगढ़ (एमसीबी)। मनेन्द्रगढ़ में प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना (PMGSY) अब विकास का माध्यम कम और भ्रष्टाचार का पर्याय अधिक बनती जा रही है। ग्रामीण क्षेत्रों को बेहतर सड़क कनेक्टिविटी देने की महत्वाकांक्षी योजना में नियमों की खुलेआम अनदेखी और घटिया निर्माण का आरोप सामने आया है, जिससे शासन की ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

स्थानीय सूत्रों और ग्रामीणों के अनुसार PMGSY कार्यालय मनेन्द्रगढ़ में नियम विरुद्ध पदस्थापना का खेल लंबे समय से चल रहा है। सामान्य प्रशासन विभाग के स्पष्ट दिशा-निर्देशों के बावजूद कि कोई भी राजपत्रित अधिकारी अपने गृह जिले में पदस्थ नहीं रह सकता, इसके उलट कार्यपालन अभियंता (EE) मोतीराम सिंह और अनुविभागीय अधिकारी (SDO) शैलेश गुप्ता वर्षों से अपने ही गृह जिले में पदस्थ हैं। आरोप है कि इन अधिकारियों के मजबूत राजनीतिक और प्रशासनिक रसूख के चलते अब तक इनका स्थानांतरण नहीं हो पाया है।

ग्रामीणों का कहना है कि नियमों की इस खुली अवहेलना का सीधा असर सड़क निर्माण की गुणवत्ता पर दिखाई दे रहा है। कमीशनखोरी और ठेकेदारों से कथित मिलीभगत के चलते मानकों को दरकिनार कर सड़कों का निर्माण किया जा रहा है। कई ग्रामीण सड़कें निर्माण के कुछ ही महीनों में उखड़ने लगी हैं, गड्ढों में तब्दील हो चुकी हैं और बरसात में हालात और भी बदतर हो जाते हैं।

आरोप है कि घटिया गुणवत्ता के बावजूद सड़कों को बिना तकनीकी जांच के स्वीकृति (क्लीयरेंस) दे दी जाती है। ग्रामीणों का कहना है कि सरकार द्वारा आवंटित लाखों-करोड़ों रुपये पानी की तरह बहाए जा रहे हैं, लेकिन बदले में उन्हें टिकाऊ और सुरक्षित सड़कें नहीं मिल पा रही हैं।

स्थानीय जनता में इस पूरे मामले को लेकर भारी रोष है। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते उच्च स्तरीय जांच नहीं हुई तो ग्रामीण क्षेत्रों में दुर्घटनाओं का खतरा और बढ़ सकता है।

राजनीतिक संरक्षण के चलते राशुकदार अधिकारियों का गृह जिले में पदस्थापना और बंदरबांट करना भ्रष्टाचार को संरक्षण देना प्रमुख कार्य बन चुका है।

अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या शासन-प्रशासन नामजद अधिकारियों पर कार्रवाई करने का साहस दिखाएगा, या फिर मनेन्द्रगढ़ की जनता को यूं ही भ्रष्टाचार की धूल फांकने के लिए मजबूर होना पड़ेगा। जनता की निगाहें अब सरकार के अगले कदम पर टिकी हैं।