मनेंद्रगढ़ अस्पताल में जांघ की त्वचा का हाथ में सफल प्रत्यारोपण, सेप्टिक शॉक से जूझ रहे युवक को मिला नया जीवन

मनेंद्रगढ़ के 220 बिस्तरीय शासकीय अस्पताल में नेक्रोटाइजिंग फेशियाइटिस से पीड़ित युवक का 35 दिनों तक सफल इलाज कर जांघ की त्वचा का हाथ में प्रत्यारोपण किया गया। जटिल सर्जरी के बाद मरीज पूरी तरह स्वस्थ होकर अस्पताल से डिस्चार्ज हो गया।

Aug 5, 2026 - 17:34
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मनेंद्रगढ़ अस्पताल में जांघ की त्वचा का हाथ में सफल प्रत्यारोपण, सेप्टिक शॉक से जूझ रहे युवक को मिला नया जीवन

UNITED NEWS OF ASIA. जमील अंसारी, कोरिया l 220 बिस्तरीय शासकीय अस्पताल, मनेंद्रगढ़ ने जटिल शल्य चिकित्सा के क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल करते हुए नेक्रोटाइजिंग फेशियाइटिस (Necrotizing Fasciitis) से पीड़ित एक युवक का सफल उपचार कर नया कीर्तिमान स्थापित किया है। अस्पताल के जनरल सर्जरी विभाग ने 35 दिनों तक चले उपचार के बाद मरीज के हाथ में जांघ की त्वचा का सफल प्रत्यारोपण (स्किन ग्राफ्टिंग) कर उसकी जान के साथ हाथ भी सुरक्षित बचा लिया।

अस्पताल के अनुसार 35 वर्षीय कैलाश कोल गंभीर संक्रमण से पीड़ित होकर अस्पताल पहुंचे थे। संक्रमण तेजी से फैलने के कारण उनकी स्थिति सेप्टिक शॉक तक पहुंच गई थी, जिससे जीवन पर गंभीर खतरा मंडरा रहा था। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए जनरल सर्जन डॉ. राजीव गुप्ता और उनकी टीम ने तत्काल आपातकालीन सर्जरी कर संक्रमित एवं मृत ऊतकों को हटाया। इसके बाद लगभग 35 दिनों तक लगातार ड्रेसिंग, संक्रमण नियंत्रण, आधुनिक घाव प्रबंधन और गहन चिकित्सकीय निगरानी के जरिए मरीज का उपचार किया गया।

जब घाव में स्वस्थ ग्रेनुलेशन टिश्यू विकसित हो गया, तब मरीज की जांघ से त्वचा लेकर हाथ में स्प्लिट थिकनेस स्किन ग्राफ्टिंग की गई। यह प्रत्यारोपण पूरी तरह सफल रहा और मरीज स्वस्थ होकर अस्पताल से छुट्टी प्राप्त कर चुका है।

डॉ. राजीव गुप्ता ने बताया कि नेक्रोटाइजिंग फेशियाइटिस अत्यंत गंभीर संक्रमण है, जिसमें समय पर पहचान और तत्काल सर्जरी बेहद जरूरी होती है। यदि इलाज में देरी हो जाए तो संक्रमण तेजी से फैलकर जानलेवा साबित हो सकता है। उन्होंने कहा कि समय रहते उपचार मिलने से न केवल मरीज की जान बचाई जा सकती है, बल्कि प्रभावित अंग को भी सुरक्षित रखा जा सकता है।

उन्होंने नागरिकों से अपील की कि शरीर पर किसी भी प्रकार की चोट, कट या खरोंच को हल्के में न लें। यदि चोट लगने के बाद लंबे समय तक पानी, कीचड़ या खेतों में कार्य करना पड़े तो संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे में घाव को साफ और सूखा रखें तथा किसी भी प्रकार की लालिमा, सूजन, तेज दर्द, प्रभावित हिस्से का गर्म होना, बुखार या कंपकंपी जैसे लक्षण दिखाई देने पर तुरंत अस्पताल पहुंचकर उपचार कराएं।

डॉ. गुप्ता ने बताया कि यदि शुरुआती अवस्था में सेल्युलाइटिस का इलाज शुरू हो जाए तो अधिकांश मरीज दवाइयों और ड्रेसिंग से ही स्वस्थ हो सकते हैं। लेकिन उपचार में देरी होने पर यही संक्रमण नेक्रोटाइजिंग फेशियाइटिस का रूप ले सकता है, जिसमें बार-बार सर्जरी, स्किन ग्राफ्टिंग और लंबे समय तक अस्पताल में भर्ती रहने की आवश्यकता पड़ती है।

उन्होंने जानकारी दी कि केवल इसी माह अस्पताल में नेक्रोटाइजिंग फेशियाइटिस के 22 से 23 मरीजों का सफल ऑपरेशन किया गया, जबकि लगभग 50 मरीजों का बिना ऑपरेशन के कंजर्वेटिव उपचार कर स्वस्थ किया गया।

अस्पताल प्रशासन के अनुसार आधुनिक ऑपरेशन थिएटर और चिकित्सा सुविधाओं के विस्तार के कारण अब मनेंद्रगढ़ में कई जटिल एवं उच्चस्तरीय सर्जरियां सफलतापूर्वक की जा रही हैं। इससे क्षेत्र के मरीजों को बड़े शहरों की ओर जाने की आवश्यकता कम हो रही है और उन्हें स्थानीय स्तर पर गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध हो रही हैं।