महासमुंद के भुरकोनी उप स्वास्थ्य केंद्र में एक हफ्ते से ताला, ग्रामीणों में आक्रोश

महासमुंद जिले के भुरकोनी उप स्वास्थ्य केंद्र में एक सप्ताह से ताला लटकने के कारण 20-25 गांवों की स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित हो गई हैं। ग्रामीणों ने स्वास्थ्य कर्मियों की लापरवाही पर नाराजगी जताते हुए तत्काल कार्रवाई की मांग की है।

May 1, 2026 - 15:38
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महासमुंद के भुरकोनी उप स्वास्थ्य केंद्र में एक हफ्ते से ताला, ग्रामीणों में आक्रोश

UNITED NEWS OF ASIA. जगदीश पटेल, महासमुंद l छत्तीसगढ़ के ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं को सुलभ और बेहतर बनाने के लिए शासन-प्रशासन लगातार प्रयास कर रहा है, लेकिन जमीनी हकीकत कई जगहों पर इसके विपरीत नजर आती है। महासमुंद जिले के पिथौरा ब्लॉक अंतर्गत भुरकोनी उप स्वास्थ्य केंद्र का मामला इसी कड़वी सच्चाई को उजागर करता है, जहां एक सप्ताह से ताला लटका होने के कारण ग्रामीणों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा।

जानकारी के अनुसार, भुरकोनी उप स्वास्थ्य केंद्र, जो प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के अंतर्गत संचालित होता है, से आसपास के 20 से 25 गांवों को स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराई जाती हैं। यहां से दवाइयां, इंजेक्शन और बच्चों तथा गर्भवती महिलाओं के टीकाकरण के लिए जरूरी सामग्री अन्य उप स्वास्थ्य केंद्रों तक भेजी जाती है। ऐसे में इस केंद्र के बंद रहने से पूरे क्षेत्र की स्वास्थ्य व्यवस्था चरमरा गई।

ग्रामीणों का आरोप है कि यहां पदस्थ ग्रामीण स्वास्थ्य संयोजक यशवंत चतुर्वेदी का ट्रांसफर हो चुका था, लेकिन उन्होंने बिना किसी को जिम्मेदारी सौंपे ही केंद्र को बंद कर दिया और गायब हो गए। इस लापरवाही के चलते मरीजों को इलाज के लिए इधर-उधर भटकना पड़ा। मजबूरी में कई ग्रामीणों ने झोलाछाप डॉक्टरों का सहारा लिया, जिससे उनकी सेहत पर और अधिक खतरा बढ़ गया।

स्थिति की गंभीरता को देखते हुए स्थानीय जनप्रतिनिधियों और नागरिकों ने इस मामले का विरोध शुरू किया और इसे उच्च अधिकारियों तक पहुंचाया। मामला जब डॉ. तारा अग्रवाल तक पहुंचा, तो प्रशासन हरकत में आया।

इसी बीच एक सप्ताह बाद शुक्रवार रात को यशवंत चतुर्वेदी पिकअप वाहन लेकर चुपके से उप स्वास्थ्य केंद्र पहुंचे और वहां रखी दवाइयों व अन्य सरकारी सामान को हटाने लगे। रात के समय इस तरह की गतिविधि देखकर स्थानीय लोगों ने इसका विरोध किया, जिससे माहौल तनावपूर्ण हो गया।

स्थिति इतनी बिगड़ गई कि दोनों पक्षों के बीच बहस और विवाद बढ़ गया और नौबत हाथापाई तक पहुंच गई। इसके बाद मौके पर पुलिस को बुलाया गया, जिसने स्थिति को नियंत्रित किया। मामले को अगले दिन अधिकारियों की मौजूदगी में सुलझाने का निर्णय लिया गया।

अगले दिन ब्लॉक चिकित्सा अधिकारी डॉ. तारा अग्रवाल, भुरकोनी पंचायत की सरपंच सरिताराज दीवान, स्थानीय जनप्रतिनिधि और पत्रकार मौके पर पहुंचे। घंटों इंतजार के बाद स्वास्थ्य संयोजक भी वहां पहुंचे। इस दौरान हल्की नोकझोंक के बाद मामला शांत तो हो गया, लेकिन ग्रामीणों की मूल समस्या का स्थायी समाधान नहीं निकल पाया।

ग्रामीणों ने स्वास्थ्य विभाग से मांग की है कि इस मामले में तुरंत हस्तक्षेप कर जिम्मेदारों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए और स्वास्थ्य सेवाओं को जल्द से जल्द बहाल किया जाए। उनका कहना है कि यदि समय रहते उचित कदम नहीं उठाए गए, तो क्षेत्र में मातृ एवं शिशु मृत्यु दर और कुपोषण जैसी गंभीर समस्याएं बढ़ सकती हैं।

यह मामला एक बार फिर ग्रामीण स्वास्थ्य व्यवस्था की खामियों को उजागर करता है, जहां लापरवाही का खामियाजा सीधे आम जनता को भुगतना पड़ता है। अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस मामले में क्या ठोस कदम उठाता है और ग्रामीणों को कब तक राहत मिल पाती है।