कोरबा में बाल विवाह पर प्रशासन की बड़ी कार्रवाई, 13 साल की दुल्हन और 15 साल के दूल्हे की शादी रुकवाई

कोरबा के चिमनीभठा वार्ड में 13 वर्षीय नाबालिग लड़की और 15 वर्षीय लड़के की शादी ऐन मौके पर महिला एवं बाल विकास विभाग और पुलिस की संयुक्त कार्रवाई से रुकवा दी गई। दोनों पक्षों को बाल विवाह कानून की जानकारी देकर जागरूक किया गया।

Jul 20, 2026 - 13:06
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कोरबा में बाल विवाह पर प्रशासन की बड़ी कार्रवाई, 13 साल की दुल्हन और 15 साल के दूल्हे की शादी रुकवाई

UNITED NEWS OF ASIA. कोरबा l छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले में बाल विवाह रोकने के लिए प्रशासन ने समय रहते बड़ी कार्रवाई करते हुए 13 वर्षीय नाबालिग लड़की और 15 वर्षीय लड़के की शादी रुकवा दी। विवाह की सभी तैयारियां पूरी हो चुकी थीं, मंडप सज चुका था और बारात भी पहुंच गई थी, लेकिन सूचना मिलते ही महिला एवं बाल विकास विभाग की टीम और मानिकपुर चौकी पुलिस मौके पर पहुंच गई। टीम की समझाइश और कानूनी जानकारी के बाद दोनों पक्षों ने शादी रोकने पर सहमति जताई।

जानकारी के अनुसार, यह मामला कोरबा शहर के चिमनीभठा वार्ड क्रमांक-14 का है। यहां रहने वाले 15 वर्षीय किशोर और 13 वर्षीय किशोरी एक-दूसरे को पसंद करते थे। दोनों की इच्छा और पारिवारिक सहमति के बाद सामाजिक रीति-रिवाजों के अनुसार विवाह की तैयारी कर ली गई थी। घर में मंडप सजाया गया था और गाजे-बाजे के साथ बारात भी पहुंच चुकी थी।

इसी दौरान किसी जागरूक व्यक्ति ने प्रस्तावित बाल विवाह की सूचना महिला एवं बाल विकास विभाग को दी। सूचना मिलते ही विभाग की टीम मानिकपुर चौकी पुलिस के साथ मौके पर पहुंची। अधिकारियों को देखकर विवाह समारोह में मौजूद लोगों और परिजनों में हड़कंप मच गया।

महिला एवं बाल विकास विभाग की टीम ने दोनों परिवारों को बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम के प्रावधानों की जानकारी दी और बताया कि नाबालिग बच्चों का विवाह कराना कानूनन अपराध है। अधिकारियों ने समझाया कि कम उम्र में विवाह बच्चों के स्वास्थ्य, शिक्षा और भविष्य पर गंभीर प्रभाव डालता है। जागरूकता और कानूनी कार्रवाई की जानकारी मिलने के बाद दोनों परिवारों ने विवाह रोकने पर सहमति जताई। इसके बाद दूल्हा और दुल्हन अपने-अपने घर लौट गए।

इस पूरे मामले में एक महत्वपूर्ण तथ्य यह भी सामने आया कि जिस वार्ड में विवाह की तैयारी चल रही थी, वहां तैनात आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और सहायिका को इसकी कोई जानकारी नहीं थी। इसे लेकर स्थानीय स्तर पर निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल उठ रहे हैं।

महिला एवं बाल विकास अधिकारी बसंत मिंज ने बताया कि विभाग को बाल विवाह की सूचना मिलने के बाद तत्काल टीम गठित कर मौके पर भेजा गया। समय रहते कार्रवाई करते हुए विवाह रुकवाया गया और दोनों परिवारों को बाल विवाह के दुष्परिणामों तथा कानूनी प्रावधानों के बारे में विस्तार से समझाया गया। उन्होंने कहा कि विभाग भविष्य में भी ऐसी सूचनाओं पर तत्काल कार्रवाई करेगा।

प्रशासन ने आम लोगों से भी अपील की है कि यदि कहीं भी बाल विवाह की जानकारी मिले तो तुरंत महिला एवं बाल विकास विभाग, पुलिस या संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों को इसकी सूचना दें, ताकि समय रहते कार्रवाई कर बच्चों के अधिकारों और भविष्य की रक्षा की जा सके। बाल विवाह जैसी सामाजिक कुरीति को समाप्त करने के लिए समाज और प्रशासन दोनों की सक्रिय भागीदारी आवश्यक है।