संभागीय सरस मेले में तीन दिन में 4.51 लाख रुपये का कारोबार, महिला समूहों के उत्पादों को मिली शानदार प्रतिक्रिया
कवर्धा के भोरमदेव मंदिर परिसर में आयोजित संभागीय सरस मेले में तीन दिनों के भीतर 4.51 लाख रुपये से अधिक का कारोबार हुआ। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन ‘विहान’ से जुड़ी महिला समूहों के उत्पादों को लोगों ने खूब पसंद किया, जिससे ग्रामीण महिला उद्यमियों का उत्साह बढ़ा है।
UNITED NEWS OF ASIA. सौरभ नामदेव, कवर्धा l भोरमदेव मंदिर परिसर के ग्राम चौरा में आयोजित पांच दिवसीय संभागीय सरस मेले को आम लोगों का भरपूर समर्थन मिल रहा है। मेले के पहले तीन दिनों में ही महिला स्व-सहायता समूहों द्वारा तैयार किए गए उत्पादों की जमकर बिक्री हुई है। अब तक 4 लाख 51 हजार रुपये से अधिक का कारोबार दर्ज किया जा चुका है, जिससे ग्रामीण महिला उद्यमियों का उत्साह काफी बढ़ा है।
राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन ‘विहान’ के तहत आयोजित इस मेले में दुर्ग संभाग के विभिन्न जिलों के अलावा अन्य क्षेत्रों से आई महिला समूहों ने अपने उत्पादों की प्रदर्शनी लगाई है। मेले में जैविक खाद्य सामग्री, हस्तनिर्मित सजावटी सामान, दैनिक उपयोग की वस्तुएं, वस्त्र, हस्तशिल्प और घरेलू उत्पाद लोगों के आकर्षण का प्रमुख केंद्र बने हुए हैं।
मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत अभिषेक अग्रवाल ने बताया कि संभागीय सरस मेला महिला स्व-सहायता समूहों को अपने उत्पाद सीधे आम जनता तक पहुंचाने का प्रभावी मंच उपलब्ध करा रहा है। इससे ग्रामीण महिलाओं को अपने उत्पादों के विपणन का अवसर मिलने के साथ-साथ आत्मनिर्भर बनने की दिशा में भी मजबूती मिल रही है।
उन्होंने बताया कि मेले में अब तक 3,550 से अधिक लोगों ने खरीदारी की है। लोगों ने महिला समूहों द्वारा तैयार उत्पादों की गुणवत्ता और उचित कीमत की सराहना करते हुए बड़ी संख्या में खरीदारी की। इससे महिला उद्यमियों का आत्मविश्वास बढ़ा है और उन्हें भविष्य में अपने व्यवसाय का विस्तार करने की प्रेरणा मिली है।
मेले में लगाए गए विभिन्न स्टॉलों पर अलग-अलग प्रकार के उत्पाद उपलब्ध हैं। पॉपकॉर्न स्टॉल पर लगभग 15 हजार रुपये की बिक्री दर्ज की गई है, जबकि दुर्ग जिले के हैंडलूम साड़ी स्टॉल पर 20 हजार रुपये से अधिक का कारोबार हुआ है। इसके अलावा अन्य स्टॉलों पर भी अच्छी बिक्री हुई है, जिससे महिला समूहों को आर्थिक लाभ मिला है।
संभागीय सरस मेला 2 अगस्त से 6 अगस्त 2026 तक आयोजित किया जा रहा है। मेले में 50 से अधिक स्टॉल लगाए गए हैं, जहां खाद्य सामग्री, जैविक उत्पाद, कपड़े, हस्तशिल्प, घरेलू उपयोग की वस्तुएं और अन्य आकर्षक सामान बिक्री के लिए उपलब्ध हैं। सभी उत्पाद गुणवत्ता मानकों के अनुरूप और किफायती कीमतों पर उपलब्ध कराए जा रहे हैं, जिसके कारण लोगों का अच्छा प्रतिसाद मिल रहा है।
विशेष रूप से जैविक खाद्य सामग्री की मांग लगातार बढ़ रही है। स्थानीय स्तर पर तैयार किए गए इन उत्पादों को लोग स्वास्थ्यवर्धक और विश्वसनीय मानकर खरीद रहे हैं। वहीं हस्तनिर्मित सजावटी सामान और दैनिक उपयोग की वस्तुएं भी खरीदारों को आकर्षित कर रही हैं।
सरस मेला केवल खरीदारी का केंद्र नहीं, बल्कि ग्रामीण महिलाओं को स्वरोजगार और उद्यमिता से जोड़ने का सशक्त माध्यम भी बन रहा है। इस तरह के आयोजन महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने, उनके उत्पादों को बाजार उपलब्ध कराने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। जिला प्रशासन ने आम नागरिकों से अपील की है कि वे मेले में पहुंचकर महिला समूहों के उत्पादों की खरीदारी करें और ग्रामीण उद्यमिता को प्रोत्साहित करें।