DMF फंड में अनियमितता पर कलेक्टर का बड़ा एक्शन, 160 विकास कार्य निरस्त; 8.32 करोड़ रुपये लौटाने के निर्देश
गौरेला-पेण्ड्रा-मरवाही जिले में जिला खनिज संस्थान न्यास (DMF) फंड के उपयोग में निर्धारित प्रक्रिया का पालन नहीं किए जाने पर जिला प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई की है। वित्तीय वर्ष 2026-27 में बिना प्रबंधकारिणी समिति और शासी परिषद की आवश्यक मंजूरी के स्वीकृत किए गए 160 विकास कार्य निरस्त कर दिए गए हैं। इन कार्यों की कुल स्वीकृत राशि 17.46 करोड़ रुपये थी, जबकि पहली किश्त के रूप में जारी 8 करोड़ 32 लाख 48 हजार 70 रुपये संबंधित कार्यदायी एजेंसियों से वापस जमा कराने के निर्देश दिए गए हैं। कलेक्टर विजय दयाराम के. की रिपोर्ट और 26 अक्टूबर को हुई समिति की बैठक के बाद यह निर्णय लिया गया।
UNITED NEWS OF ASIA. अवास कैवर्त, गौरेला-पेण्ड्रा-मरवाही। छत्तीसगढ़ के गौरेला-पेण्ड्रा-मरवाही जिले में जिला खनिज संस्थान न्यास (DMF) फंड के इस्तेमाल में निर्धारित नियमों की अनदेखी का मामला सामने आने के बाद जिला प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई की है। वित्तीय वर्ष 2026-27 में बिना आवश्यक समितियों की मंजूरी के स्वीकृत किए गए 160 विकास कार्यों को निरस्त कर दिया गया है। इन कार्यों के लिए पहली किश्त के रूप में जारी की गई 8 करोड़ 32 लाख 48 हजार 70 रुपये की राशि संबंधित कार्यदायी एजेंसियों से वापस लेने के निर्देश दिए गए हैं।
यह मामला तत्कालीन कलेक्टर लीना मंडावी के कार्यकाल में DMF फंड से विकास कार्यों को दी गई स्वीकृति से जुड़ा है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, इन कार्यों को मंजूरी देते समय जिला खनिज संस्थान न्यास की निर्धारित प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया था। प्रस्तावों को न तो प्रबंधकारिणी समिति से मंजूरी मिली थी और न ही शासी परिषद का अनुमोदन लिया गया था। इसके बावजूद 160 विकास कार्यों को प्रशासकीय स्वीकृति जारी कर पहली किश्त की राशि संबंधित एजेंसियों को दे दी गई थी।
दस्तावेजों के अनुसार, इन सभी 160 विकास कार्यों की कुल स्वीकृत राशि 17 करोड़ 46 लाख 92 हजार 166 रुपये थी। इसमें से 8 करोड़ 32 लाख 48 हजार 70 रुपये पहली किश्त के रूप में जारी किए जा चुके थे। अब प्रशासन ने सभी कार्यों को निरस्त करते हुए जारी की गई राशि सरकारी खाते में वापस जमा कराने का आदेश दिया है।
DMF फंड का उपयोग करने के लिए छत्तीसगढ़ जिला खनिज संस्थान न्यास के नियमों और प्रधानमंत्री खनिज क्षेत्र कल्याण योजना (PMKKKY) के दिशा-निर्देशों के तहत निर्धारित प्रक्रिया का पालन करना जरूरी है। इसके अनुसार, विकास कार्यों के प्रस्ताव पहले प्रबंधकारिणी समिति के सामने रखे जाते हैं। समिति की अनुशंसा के बाद शासी परिषद से उनका अनुमोदन लिया जाना आवश्यक होता है। इसके अलावा DMF की कम से कम 70 प्रतिशत राशि उच्च प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में खर्च करने का प्रावधान है। इसमें पेयजल, स्वास्थ्य, शिक्षा, पर्यावरण संरक्षण, महिला एवं बाल कल्याण और कौशल विकास जैसे कार्य शामिल हैं। शेष 30 प्रतिशत राशि अन्य प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं के विकास पर खर्च की जा सकती है।
मामले में वर्तमान कलेक्टर विजय दयाराम के. ने खनिज साधन विभाग के सचिव पी. दयानंद को पत्र भेजकर स्वीकृतियों में हुई अनियमितताओं की जानकारी दी थी। इसके बाद जिला प्रशासन ने संबंधित कार्यदायी एजेंसियों से जवाब मांगा। नोटिस पाने वाली एजेंसियों में जनपद पंचायत गौरेला, पेण्ड्रा और मरवाही, विद्युत यांत्रिकी संभाग बिलासपुर, नगर पंचायत मरवाही, पशु चिकित्सा सेवाएं, क्रेडा और मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी कार्यालय शामिल थे।
एजेंसियों ने अपने जवाब में विकास कार्यों की आवश्यकता और DMF कार्यालय की ओर से प्रस्ताव मांगे जाने का हवाला दिया। हालांकि, निर्धारित समितियों की मंजूरी के बिना प्रशासकीय स्वीकृति और राशि जारी किए जाने के संबंध में वे वैध प्रशासनिक आधार प्रस्तुत नहीं कर सकीं।
शासन के निर्देशों के बाद 26 अक्टूबर 2026 को जिला प्रबंधकारिणी समिति की बैठक आयोजित की गई। बैठक में संबंधित कार्यों और एजेंसियों के जवाबों पर विस्तार से चर्चा हुई। इसके बाद सभी 160 विकास कार्यों को निरस्त करने के निर्णय को मंजूरी दी गई। साथ ही संबंधित एजेंसियों को पहली किश्त की पूरी राशि तत्काल सरकारी खाते में वापस जमा कराने के निर्देश जारी किए गए हैं। अब इस कार्रवाई के तहत कुल 8 करोड़ 32 लाख 48 हजार 70 रुपये की वसूली की जानी है।