कांकेर में लंबित CFR दावों को लेकर आंदोलन की तैयारी, कलेक्ट्रेट घेराव की चेतावनी

कांकेर जिले में दो वर्षों से अधिक समय से लंबित सामुदायिक वन संसाधन अधिकार (CFR) के दावों को लेकर आंदोलन की तैयारी की जा रही है। जिला पंचायत सदस्य एवं कांग्रेस कमेटी की महामंत्री मृदुला भास्कर ने जिला प्रशासन पर दावों के निराकरण में उदासीनता बरतने का आरोप लगाया है। उन्होंने जिला स्तरीय समिति (DLC) की तत्काल बैठक बुलाने और लंबित दावों का नियमानुसार निराकरण करने की मांग की है। मांगों पर कार्रवाई नहीं होने पर प्रभावित ग्रामसभाओं और आदिवासी समुदाय द्वारा कलेक्ट्रेट घेराव की चेतावनी दी गई है।

Nov 4, 2026 - 10:19
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कांकेर में लंबित CFR दावों को लेकर आंदोलन की तैयारी, कलेक्ट्रेट घेराव की चेतावनी

UNITED NEWS OF ASIA. डेनिरो सलाम, कांकेर l छत्तीसगढ़ के कांकेर जिले में सामुदायिक वन संसाधन अधिकार (CFR) के लंबित दावों को लेकर आंदोलन की तैयारी शुरू हो गई है। दो वर्षों से अधिक समय से जिला स्तरीय समिति (DLC) के समक्ष लंबित दावों का निराकरण नहीं होने पर जिला पंचायत सदस्य एवं कांग्रेस कमेटी की महामंत्री मृदुला भास्कर ने जिला प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर आरोप लगाया है कि ग्रामसभाओं द्वारा प्रस्तुत दावों पर अब तक ठोस कार्रवाई नहीं की गई है। मांगों का जल्द निराकरण नहीं होने पर प्रभावित ग्रामसभाओं और आदिवासी समुदाय द्वारा कांकेर जिला मुख्यालय स्थित कलेक्ट्रेट परिसर का घेराव करने की चेतावनी दी गई है।

मृदुला भास्कर की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति में अनुसूचित जनजाति एवं अन्य परंपरागत वन निवासी (वन अधिकारों की मान्यता) अधिनियम, 2006 का उल्लेख करते हुए कहा गया है कि इस कानून का उद्देश्य आदिवासी और अन्य परंपरागत वन निवासियों के साथ हुए ऐतिहासिक अन्याय को दूर करना तथा उनके पारंपरिक वन अधिकारों को कानूनी मान्यता देना है। इसके तहत पात्र समुदायों और ग्रामसभाओं को वन संसाधनों पर उनके अधिकारों की पहचान और मान्यता का प्रावधान किया गया है।

विज्ञप्ति के अनुसार, कांकेर जिले की अनेक ग्रामसभाओं ने वन अधिकार अधिनियम की धारा 3(1)(क) के तहत व्यक्तिगत वन अधिकारों और धारा 3(1)(झ) के तहत सामुदायिक वन संसाधन अधिकारों के दावे प्रस्तुत किए हैं। इनमें से कई दावे पिछले दो वर्षों से अधिक समय से जिला स्तरीय समिति के समक्ष लंबित बताए गए हैं। आरोप है कि इन दावों के निराकरण के लिए DLC की बैठक आयोजित करने और प्रक्रिया को आगे बढ़ाने की दिशा में अपेक्षित पहल नहीं की जा रही है।

प्रेस विज्ञप्ति में दिए गए आंकड़ों के मुताबिक, कांकेर जिले में कुल 1080 राजस्व ग्राम हैं। इनमें से लगभग 450 ग्रामसभाओं को सामुदायिक वन संसाधन अधिकार प्राप्त हो चुके हैं। इन अधिकारों के आधार पर ग्रामसभाएं जंगलों में आग बुझाने, जल स्रोतों का संरक्षण करने, अवैध गतिविधियों पर निगरानी रखने, पौधारोपण करने और वन संसाधनों के संरक्षण एवं प्रबंधन में भूमिका निभा रही हैं।

मृदुला भास्कर का कहना है कि एक ओर ग्रामसभाएं जंगलों की सुरक्षा और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण की जिम्मेदारी निभा रही हैं, वहीं दूसरी ओर कई ग्रामसभाएं अपने वैधानिक अधिकारों की मान्यता के लिए लंबे समय से इंतजार कर रही हैं। उन्होंने इसे वन अधिकार अधिनियम की मूल भावना के विपरीत बताते हुए कहा कि पात्र ग्रामसभाओं को उनके अधिकारों से वंचित नहीं रखा जाना चाहिए।

इस मामले में तीन प्रमुख मांगें रखी गई हैं। पहली, जिला स्तरीय समिति की तत्काल बैठक आयोजित की जाए। दूसरी, दो वर्षों से अधिक समय से लंबित सभी सामुदायिक वन संसाधन अधिकारों के दावों का नियमानुसार शीघ्र निराकरण किया जाए। तीसरी, पात्र ग्रामसभाओं को उनके अधिकार पत्र प्रदान किए जाएं।

प्रेस विज्ञप्ति में स्पष्ट किया गया है कि यदि जिला प्रशासन इन मांगों पर तत्काल कार्रवाई नहीं करता है, तो प्रभावित ग्रामसभाओं और आदिवासी समुदाय द्वारा लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन किया जाएगा। इसके तहत कांकेर कलेक्ट्रेट परिसर का घेराव किया जाएगा। मृदुला भास्कर ने कहा कि वन अधिकार प्रशासन की कृपा नहीं, बल्कि कानून से मान्यता प्राप्त अधिकार हैं। अब देखना होगा कि जिला प्रशासन लंबित दावों के निराकरण के लिए कब तक बैठक आयोजित कर ठोस निर्णय लेता है और प्रस्तावित आंदोलन को टालने के लिए क्या कदम उठाता है।