UNITED NEWS OF ASIA. लोकेश्वर सिंह ठाकुर, दुर्ग। शासकीय प्राथमिक शाला ढौर क्रमांक 2 में छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति और परंपराओं से जुड़े पोला एवं तीजा पर्व का संयुक्त महोत्सव हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। कार्यक्रम में विद्यार्थियों, शिक्षकों, पालकों और ग्रामीणों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। इस अवसर पर अडानी फाउंडेशन की ओर से विद्यालय में निर्मित स्मार्ट क्लास और ई-लाइब्रेरी का लोकार्पण भी किया गया। इससे विद्यार्थियों को आधुनिक तकनीक के माध्यम से पढ़ाई करने और डिजिटल शैक्षणिक सामग्री तक पहुंच बनाने में सुविधा मिलने की उम्मीद है।
स्मार्ट क्लास और ई-लाइब्रेरी का लोकार्पण अडानी फाउंडेशन के प्रबंधक त्रिदेव कुमार त्रिपाठी और प्रदीप्ता कुमार मोहंती ने किया। विद्यालय में आधुनिक शैक्षणिक सुविधाओं की शुरुआत को शिक्षा के क्षेत्र में महत्वपूर्ण पहल बताया गया। स्मार्ट क्लास के माध्यम से विद्यार्थियों को पाठ्यक्रम से जुड़ी सामग्री को डिजिटल माध्यम से समझने का अवसर मिलेगा, वहीं ई-लाइब्रेरी के जरिए विभिन्न शैक्षणिक संसाधनों तक पहुंच आसान होगी। विद्यालय प्रबंधन ने इस पहल को बच्चों के सीखने के अनुभव को बेहतर बनाने की दिशा में उपयोगी कदम बताया।
कार्यक्रम की शुरुआत छत्तीसगढ़ महतारी की पूजा-अर्चना के साथ हुई। इसके बाद विद्यार्थियों ने पारंपरिक वेशभूषा में छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति और ग्रामीण जीवन से जुड़े विभिन्न कार्यक्रम प्रस्तुत किए। बच्चों ने लोकगीत और फुगड़ी की प्रस्तुति देकर उपस्थित लोगों का मनोरंजन किया। इसके अलावा बैलों को सजाने की परंपरा को भी कार्यक्रम में शामिल किया गया। विद्यार्थियों ने आकर्षक ढंग से बैल सजाकर पोला पर्व की कृषि संस्कृति और परंपरा को प्रदर्शित किया।
महोत्सव के दौरान बैल दौड़ प्रतियोगिता का भी आयोजन किया गया। प्रतियोगिता में बच्चों और ग्रामीणों ने उत्साह दिखाया। आयोजन में छबि ने प्रथम स्थान हासिल किया। प्रतियोगिता के माध्यम से पोला पर्व से जुड़ी पारंपरिक गतिविधियों को बच्चों के बीच जीवंत रखने का प्रयास किया गया। कार्यक्रम में विद्यार्थियों को यह भी बताया गया कि पोला पर्व छत्तीसगढ़ की कृषि संस्कृति से गहराई से जुड़ा हुआ है और किसानों के जीवन में बैलों तथा कृषि पशुओं के महत्व को दर्शाता है।
महिला समूहों ने भी महोत्सव में सक्रिय सहभागिता निभाई। महिलाओं ने तीजा कथा का आयोजन किया और पारंपरिक व्यंजनों का प्रदर्शन किया। इसके माध्यम से नई पीढ़ी को छत्तीसगढ़ के लोकपर्व, पारंपरिक खान-पान और सांस्कृतिक विरासत से परिचित कराने का प्रयास किया गया। कार्यक्रम में बच्चों को लोकपर्वों के सामाजिक और सांस्कृतिक महत्व की जानकारी दी गई तथा स्थानीय परंपराओं और संस्कृति को संरक्षित रखने का संकल्प दिलाया गया।
इस अवसर पर प्रधान पाठक अनिल कुमार थारवानी, शिक्षिका सुनीता साहू, शिक्षिका धनेश्वरी बंजारे, शाला प्रबंधन समिति के सदस्य, शिक्षकगण और बड़ी संख्या में पालक मौजूद रहे। सभी ने विद्यार्थियों की प्रस्तुतियों की सराहना की और स्मार्ट क्लास तथा ई-लाइब्रेरी जैसी सुविधाओं की शुरुआत को विद्यालय के लिए उपयोगी बताया। आयोजन ने एक ओर जहां छत्तीसगढ़ की लोक परंपराओं को बच्चों के बीच जीवंत किया, वहीं दूसरी ओर आधुनिक शैक्षणिक संसाधनों के माध्यम से विद्यालय में शिक्षा की नई संभावनाओं को भी सामने रखा।